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अदाणी पोर्ट्स को पारादीप में 18 एमएमटी क्षमता का एलओए, पूर्वी भारत में 16 बंदरगाहों का नेटवर्क

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अदाणी पोर्ट्स को पारादीप में 18 एमएमटी क्षमता का एलओए, पूर्वी भारत में 16 बंदरगाहों का नेटवर्क

सारांश

अदाणी पोर्ट्स को पारादीप में 18 एमएमटी की नई क्षमता का एलओए मिला है — यह सिर्फ एक बंदरगाह सौदा नहीं, बल्कि 2030 तक 1 बिलियन टन कार्गो के लक्ष्य की दिशा में एक निर्णायक कदम है। खनिज-समृद्ध पूर्वी भारत में पैठ और 16 बंदरगाहों के नेटवर्क के साथ, एपीएसईजेड देश का सबसे बड़ा पोर्ट इकोसिस्टम बनने की राह पर है।

मुख्य बातें

अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (एपीएसईजेड) को पारादीप पोर्ट, ओडिशा पर दो ड्राई बल्क बर्थ्स के लिए लेटर ऑफ अवॉर्ड (एलओए) प्राप्त हुआ।
इस परियोजना से कंपनी की क्षमता में 18 एमएमटी की वृद्धि होगी और कुल पोर्टफोलियो 671 एमएमटीपीए तक पहुँचेगा।
परियोजना पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत विकसित होगी; परिचालन अधिकार 30 वर्षों के लिए।
एपीएसईजेड का नेटवर्क अब भारत के 11,000 किलोमीटर तट पर 16 बंदरगाहों और टर्मिनलों तक फैल गया है।
कंपनी का लक्ष्य 2030 तक 1 बिलियन टन कार्गो हासिल करना है; फिलहाल वह भारत के कुल पोर्ट वॉल्यूम का 27 प्रतिशत संभालती है।
पारादीप भारत का दूसरा सबसे बड़ा प्रमुख बंदरगाह है और बल्क कार्गो के लिए पूर्वी भारत का प्रमुख प्रवेशद्वार।

अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (एपीएसईजेड) को ओडिशा के पारादीप पोर्ट पर दो ड्राई बल्क बर्थ्स विकसित और संचालित करने के लिए लेटर ऑफ अवॉर्ड (एलओए) प्राप्त हुआ है। 9 सितंबर को की गई इस घोषणा के अनुसार, इस परियोजना से कंपनी की कुल क्षमता में 18 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) की वृद्धि होगी और समग्र पोर्टफोलियो 671 एमएमटीपीए तक पहुँच जाएगा। यह कदम एपीएसईजेड के 2030 तक 1 बिलियन टन कार्गो के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को गति देने में अहम भूमिका निभाएगा।

परियोजना का ढाँचा और अवधि

यह परियोजना पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के अंतर्गत विकसित की जाएगी, जिसमें एपीएसईजेड को 30 वर्षों तक परिचालन का अधिकार प्राप्त होगा। सबसे ऊँची बोली लगाने वाली कंपनी के रूप में उभरी एपीएसईजेड ने कहा कि वह 'सीक्यू-I और सीक्यू-II बर्थ' को अत्याधुनिक मशीनीकृत कार्गो हैंडलिंग प्रणाली, गहरे ड्राफ्ट वाले बर्थ और बड़े पैमाने पर भंडारण अवसंरचना के साथ तैयार करेगी। यह बंदरगाह कोयले, चूना पत्थर और अन्य सूखे बल्क सामानों की बढ़ती आवक को संभालने में सक्षम होगा।

कंपनी प्रमुख की प्रतिक्रिया

एपीएसईजेड के होल-टाइम डायरेक्टर और सीईओ अश्वनी गुप्ता ने कहा, 'पारादीप कंसेशन से पूर्वी तट पर एपीएसईजेड की मौजूदगी मजबूत होगी और भारत के सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक और खनिज-समृद्ध इलाकों तक हमारी पहुँच बढ़ेगी।' गुप्ता ने आगे कहा कि पारादीप के जुड़ने के बाद, भारत के 11,000 किलोमीटर लंबे तटरेखा पर एपीएसईजेड का नेटवर्क 16 बंदरगाहों और टर्मिनलों तक विस्तृत हो गया है।

पारादीप की रणनीतिक अहमियत

पारादीप खनिज-समृद्ध अंतर्देशीय क्षेत्र और बड़े इस्पात संयंत्रों के बीच स्थित होने के कारण भारत का दूसरा सबसे बड़ा प्रमुख बंदरगाह है और बल्क कार्गो के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेशद्वार माना जाता है। यह टर्मिनल पूर्वी और मध्य भारत के प्रमुख औद्योगिक एवं विनिर्माण केंद्रों तक एपीएसईजेड की पहुँच को और सुदृढ़ करेगा। गौरतलब है कि कार्गो की बढ़ती माँग के बीच पूर्वी तट के बंदरगाहों पर क्षमता का दबाव लगातार बढ़ रहा है।

एपीएसईजेड का समग्र इकोसिस्टम

अदाणी पोर्ट्स फिलहाल रणनीतिक रूप से स्थित 16 बंदरगाहों और टर्मिनलों का संचालन करती है। इसके अतिरिक्त, कंपनी के पास 136 जहाजों का विविध समुद्री बेड़ा, 12 मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क, 31 लाख वर्ग फुट के गोदाम और अपने प्लेटफॉर्म पर 25,000 से अधिक ट्रक हैं। आँकड़ों के अनुसार, अदाणी पोर्ट्स वर्तमान में भारत के कुल पोर्ट वॉल्यूम का लगभग 27 प्रतिशत संभालती है।

आगे की राह

पारादीप टर्मिनल के विकास के साथ एपीएसईजेड एकीकृत बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स और समुद्री समाधान प्रदान करने की अपनी क्षमता को और व्यापक बनाने की दिशा में अग्रसर है। यह विस्तार ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार बंदरगाह-आधारित औद्योगिक विकास को प्राथमिकता दे रही है और पूर्वी तट पर निवेश के नए अवसर उभर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और पारादीप के जुड़ने से यह एकाग्रता और गहरी होगी। आलोचकों का कहना है कि इस स्तर के बाज़ार वर्चस्व पर नियामकीय निगरानी की ज़रूरत है, खासकर तब जब बंदरगाह अवसंरचना राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला की रीढ़ बन चुकी है। 2030 तक 1 बिलियन टन का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि क्या यह विस्तार छोटे बंदरगाह संचालकों और प्रतिस्पर्धा के लिए जगह बचाता है।
RashtraPress
9 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अदाणी पोर्ट्स को पारादीप में किस परियोजना के लिए एलओए मिला है?
एपीएसईजेड को ओडिशा के पारादीप पोर्ट पर दो ड्राई बल्क बर्थ्स — 'सीक्यू-I और सीक्यू-II' — विकसित और संचालित करने के लिए लेटर ऑफ अवॉर्ड मिला है। यह परियोजना PPP मॉडल के तहत 30 वर्षों के परिचालन अधिकार के साथ विकसित की जाएगी।
पारादीप परियोजना से एपीएसईजेड की क्षमता कितनी बढ़ेगी?
इस परियोजना से एपीएसईजेड की कुल क्षमता में 18 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) की वृद्धि होगी, जिससे कंपनी का समग्र पोर्टफोलियो 671 एमएमटीपीए तक पहुँच जाएगा। यह 2030 तक 1 बिलियन टन कार्गो के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पारादीप बंदरगाह रणनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है?
पारादीप भारत का दूसरा सबसे बड़ा प्रमुख बंदरगाह है और खनिज-समृद्ध अंतर्देशीय क्षेत्र तथा बड़े इस्पात संयंत्रों के बीच स्थित होने के कारण बल्क कार्गो के लिए एक अहम प्रवेशद्वार है। यह पूर्वी और मध्य भारत के प्रमुख औद्योगिक एवं विनिर्माण केंद्रों तक सीधी पहुँच प्रदान करता है।
अदाणी पोर्ट्स का 2030 तक क्या लक्ष्य है?
एपीएसईजेड का लक्ष्य 2030 तक 1 बिलियन टन कार्गो हासिल करना है। फिलहाल कंपनी भारत के कुल पोर्ट वॉल्यूम का लगभग 27 प्रतिशत संभालती है और उसके पास 16 बंदरगाह व टर्मिनल, 136 जहाजों का बेड़ा, 12 मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क और 31 लाख वर्ग फुट के गोदाम हैं।
पारादीप टर्मिनल पर किस तरह का कार्गो संभाला जाएगा?
पारादीप टर्मिनल मुख्य रूप से कोयले, चूना पत्थर और अन्य सूखे बल्क सामानों को संभालेगा। इसे अत्याधुनिक मशीनीकृत कार्गो हैंडलिंग प्रणाली, गहरे ड्राफ्ट वाले बर्थ और बड़े पैमाने पर भंडारण अवसंरचना के साथ विकसित किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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