27वें कारगिल विजय दिवस पर जयशंकर, राजनाथ सिंह ने शहीदों को नमन; बोले — साहस और बलिदान अमर रहेगा
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित देश के शीर्ष नेतृत्व ने 26 जुलाई 2025 को 27वें कारगिल विजय दिवस पर 1999 के कारगिल युद्ध के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की ओर से भी देशवासियों को शुभकामनाएँ दी गईं। यह दिन उस ऐतिहासिक विजय का प्रतीक है जब भारतीय सेना ने लद्दाख की बर्फ से ढकी चोटियों पर तिरंगा फिर से लहराया था।
जयशंकर का संदेश — साहस और बलिदान को नमन
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'कारगिल विजय दिवस पर, देश की रक्षा करने वाले हमारे बहादुर सैनिकों के साहस और वीरता का सम्मान करें। उनकी सेवा और बलिदान को हमेशा याद रखा जाएगा।' उनका यह संदेश उस भावना को प्रतिबिंबित करता है जो हर वर्ष 26 जुलाई को पूरे देश में उमड़ती है।
राजनाथ सिंह का कारगिल युद्ध स्मारक पर संबोधन
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कारगिल युद्ध स्मारक पर ध्वजारोहण समारोह के साथ शौर्य विजय यात्रा (मोटरसाइकिल रैली) का समापन किया और लद्दाख में तैनात भारतीय सेना को संबोधित किया। उन्होंने कहा, 'जो तिरंगा कारगिल वॉर मेमोरियल पर इतनी शान से लहरा रहा है, इसकी आन, बान और शान की एक बहुत बड़ी कीमत है।'
राजनाथ सिंह ने 1999 के उस कायरतापूर्ण हमले को याद किया जब पाकिस्तान ने अपनी सेना के घुसपैठियों के माध्यम से, सर्दियों में खाली रहने वाली भारतीय चोटियों पर छल से कब्जा कर लिया था। उन्होंने कहा, 'दुश्मन हमारी सेना के शौर्य और संकल्प की ऊंचाई को भांपने में चूक गया। हमारे जवानों ने सिर्फ पहाड़ की ऊंचाइयों को ही नहीं, बल्कि मानवीय सीमाओं की हर परिभाषा को भी पार करके दिखाया।'
शहीद वीरों की विरासत — कैप्टन बत्रा और कैप्टन पांडे
रक्षा मंत्री ने कैप्टन विक्रम बत्रा और कैप्टन मनोज पांडे जैसे अमर शहीदों का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा, 'आज भी हमारी माएं अपने बच्चों को जब वीरता की कहानियाँ सुनाती हैं, तो उनकी कहानियों में इन वीरों का जिक्र होता है। हमने इन वीरों को अपनी धरोहर बना कर रखा है और आने वाली पीढ़ियाँ इनके शौर्य से प्रेरणा लेती रहेंगी।'
गौरतलब है कि कारगिल विजय दिवस केवल एक स्मृति दिवस नहीं, बल्कि रक्षा मंत्री के शब्दों में, 'हर उस युवा के लिए प्रेरणा का दिन है जो व्यक्तिगत सफलता और राष्ट्रीय कर्तव्य के बीच का अंतर समझना चाहता है।'
ऑपरेशन सिंदूर का संदर्भ और पाकिस्तान पर कड़ा रुख
राजनाथ सिंह ने हाल ही में पूर्ण हुए ऑपरेशन सिंदूर के एक वर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय सेनाओं ने आतंकवादियों और उनके सरपरस्तों को ऐसा जवाब दिया जिसे वे आजीवन नहीं भूल पाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब पाकिस्तान के साथ कोई बातचीत नहीं होगी — और यदि होगी भी तो केवल पाक-अधिकृत कश्मीर (PoK) के मसले पर, जो भारत का अभिन्न अंग है। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव पहले से ऊंचाई पर है।
राष्ट्रीय एकता का प्रतीक दिन
हर वर्ष 26 जुलाई को मनाया जाने वाला कारगिल विजय दिवस भारत के सैन्य इतिहास के सबसे गौरवशाली अध्यायों में से एक है। 1999 में लगभग 60 दिनों तक चले इस संघर्ष में भारत ने अपनी सामरिक चोटियाँ वापस हासिल कीं, जिसमें सैकड़ों सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया। इस वर्ष 27वाँ संस्करण देश भर में श्रद्धा और संकल्प के साथ मनाया जा रहा है — और शीर्ष नेतृत्व के संदेश यही दोहराते हैं कि शहीदों का त्याग कभी व्यर्थ नहीं जाएगा।