कारगिल विजय दिवस 2026: पॉइंट 5140 से टाइगर हिल तक, बर्फीली चोटियों पर भारतीय वीरों की अमर गाथा
सारांश
मुख्य बातें
कारगिल विजय दिवस पर 26 जुलाई 2026 को पूरा देश उन अमर शहीदों को नमन कर रहा है, जिन्होंने 1999 में ऑपरेशन विजय के तहत जम्मू-कश्मीर की दुर्गम बर्फीली चोटियों से पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़कर तिरंगे की शान बुलंद की थी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सेना प्रमुख ने कारगिल वॉर मेमोरियल पर पुष्पांजलि अर्पित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। यह दिन केवल एक सैन्य विजय का स्मरण नहीं, बल्कि भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान को राष्ट्रीय सलाम है।
युद्धक्षेत्र की विषम परिस्थितियाँ
कारगिल की लड़ाई उन परिस्थितियों में लड़ी गई, जिन्हें दुनिया के सबसे कठिन युद्धक्षेत्रों में गिना जाता है। कई स्थानों पर ऊँचाई 20,000 फीट तक पहुँचती थी, जहाँ ऑक्सीजन की भारी कमी, सांस लेने में कठिनाई और माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तक गिरता तापमान सैनिकों की हर साँस की परीक्षा लेता था। बर्फ से ढकी खड़ी चट्टानें और दुश्मन की ऊँचाई से होने वाली गोलाबारी — इन सबके बावजूद भारतीय जवानों ने अपने संकल्प में कभी कोई कमी नहीं आने दी। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस युद्ध को आज भी दुनिया की सेनाएँ अनुशासन, रणनीति और वीरता के अध्ययन के रूप में देखती हैं।
पॉइंट 5140: युद्ध का सबसे निर्णायक अभियान
कारगिल युद्ध की अनेक लड़ाइयों में पॉइंट 5140 — जिसे आज गन हिल के नाम से जाना जाता है — की विजय सबसे निर्णायक अभियानों में मानी जाती है। सेना के अनुसार, लगभग 17,000 फीट की ऊँचाई पर स्थित यह चोटी उस समय दुश्मन का सुदृढ़ ठिकाना थी। द्रास क्षेत्र की निगरानी के लिए यह सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण थी — यहाँ से दुश्मन भारतीय सेना की गतिविधियों पर नज़र रखता था और आसपास की कब्जाई चोटियों तक रसद पहुँचा सकता था। इसलिए इस चोटी को मुक्त कराना युद्ध में निर्णायक बढ़त की अनिवार्य शर्त थी।
शत्रुनाश: तोपखाने और पैदल सेना का अभूतपूर्व समन्वय
13 और 14 जून 1999 की रात 18 ग्रेनेडियर्स ने 'हंप' पर कब्जा किया, जबकि 13 जम्मू एवं कश्मीर राइफल्स ने 'रॉकी नॉब' को अपने नियंत्रण में लिया। इसके बाद 19 और 20 जून 1999 की रात 'शत्रुनाश' नामक व्यापक तोपखाना योजना के तहत बोफोर्स तोपों और बहु-नाल रॉकेट प्रक्षेपक प्रणालियों ने पूर्व और पश्चिम, दोनों दिशाओं से दुश्मन के ठिकानों पर अनवरत गोलाबारी की। बोफोर्स तोपों की सटीक मारक क्षमता ने दुश्मन के बंकरों को ध्वस्त कर उसकी प्रतिरोध क्षमता लगभग समाप्त कर दी। तोपखाने की इस जबरदस्त कार्रवाई के बाद भारतीय पैदल सेना ने आगे बढ़कर हमला बोला और 20 जून 1999 की सुबह 13 जम्मू एवं कश्मीर राइफल्स ने पॉइंट 5140 पर तिरंगा फहरा दिया।
विजय का व्यापक प्रभाव और शौर्य अभियान
पॉइंट 5140 की विजय के साथ द्रास सेक्टर में दुश्मन की एक महत्वपूर्ण रक्षा पंक्ति ध्वस्त हो गई, और टाइगर हिल सहित अन्य रणनीतिक चोटियों को मुक्त कराने का मार्ग प्रशस्त हुआ। इस वर्ष कारगिल विजय दिवस के उपलक्ष्य में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली के राष्ट्रीय युद्ध स्मारक से 'शौर्य अभियान' नामक विशेष मोटरसाइकिल अभियान को रवाना किया। यह अभियान कारगिल के रणबांकुरों के साहस और बलिदान की गाथा को देशभर में पहुँचाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया और रविवार को कारगिल पहुँचकर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई।
राष्ट्रीय संकल्प का प्रतीक
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि कारगिल की विजय केवल एक तिथि नहीं, बल्कि यह भारत का स्थायी संकल्प है कि हमारी भूमि, हमारी अस्मिता और हमारे सम्मान पर उठने वाली हर नज़र का जवाब पूरी शक्ति से दिया जाएगा। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कारगिल विजय दिवस उस राष्ट्रीय संकल्प का प्रतीक है जो यह बताता है कि भारत अपनी संप्रभुता और अखंडता की रक्षा के लिए हर चुनौती का सामना करने में सक्षम है। बर्फीली चोटियों पर लड़ी गई वह लड़ाई आने वाली पीढ़ियों के लिए साहस, कर्तव्य और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा बनी रहेगी।