26 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कारगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ: पूर्व सैनिकों ने सुनाई बलिदान और साहस की अनकही दास्तान

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कारगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ: पूर्व सैनिकों ने सुनाई बलिदान और साहस की अनकही दास्तान

सारांश

कारगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ पर चंडीगढ़ में पूर्व सैनिकों ने अपनी आपबीती सुनाई — कुपवाड़ा में गोली लगने से लेकर 14-15 सर्जरी तक। यह दिन उन 527 शहीदों को नमन है जिन्होंने 5,000 मीटर की ऊँचाई पर लड़कर भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाई।

मुख्य बातें

भारत 26 जुलाई 2026 को कारगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ मना रहा है।
ऑपरेशन विजय में 527 सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था।
पूर्व सैनिक ज्योति शर्मा को कुपवाड़ा ऑपरेशन में दोनों पैरों में गोली लगी और 14-15 सर्जरी करानी पड़ीं।
लड़ाई मई–जुलाई 1999 के बीच 5,000 मीटर से अधिक ऊँचाई पर लड़ी गई।
भारतीय सेना ने LOC पार किए बिना पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़ा और अंतरराष्ट्रीय सराहना पाई।

कारगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ पर चंडीगढ़ में 26 जुलाई 2026 को सेना के पूर्व सैनिकों ने अपनी सेवा के अनुभव, युद्ध के दौरान किए गए बलिदान और वर्दी पहनने के गर्व को साझा किया। 1999 के कारगिल युद्ध में 527 वीर सैनिकों की शहादत को नमन करते हुए देशभर में यह दिन श्रद्धा और संकल्प के साथ मनाया गया।

पूर्व सैनिकों की आपबीती

सेना की पूर्व अधिकारी ज्योति शर्मा ने जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान मिली गंभीर चोटों का ज़िक्र किया। उन्होंने बताया कि गश्त के दौरान आतंकवादियों की गोलीबारी में उनके दोनों पैरों में गुलियाँ लगीं, जिसके बाद 14-15 सर्जरी करानी पड़ीं।

शर्मा ने कहा, 'भगवान की कृपा से मैं बच गई और अब अपने परिवार के साथ हूँ। मुझे गर्व है कि मुझे देश की सेवा करने का मौका मिला।' कारगिल विजय दिवस के अवसर पर उन्हें पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और पंजाब एंड सिंध बैंक की ओर से स्कूटर प्रदान किया गया, जिसके लिए उन्होंने हृदय से आभार व्यक्त किया।

सेना के मूल मूल्य

सेना के पूर्व मेजर वी.वी. नारायणन ने भारतीय सेना की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि 'सेना में हम मानते हैं कि देश की सुरक्षा, सम्मान और कल्याण सर्वोपरि है, और सैनिकों की सुरक्षा व सम्मान उसके बाद।' यह वक्तव्य उस अटूट अनुशासन और समर्पण को दर्शाता है जो भारतीय सेना की पहचान है।

पूर्व कर्नल उदय कुमार ने कहा कि कारगिल विजय दिवस उन वीरों की बहादुरी और बलिदान को सम्मान देने का दिन है जिन्होंने 1999 में भारत को निर्णायक जीत दिलाई। उन्होंने स्मरण कराया कि 1999 में पाकिस्तानी घुसपैठियों ने कारगिल सेक्टर की रणनीतिक ऊँचाइयों पर कब्ज़ा कर लिया था, लेकिन भारतीय सशस्त्र सेनाओं ने उन्हें सफलतापूर्वक खदेड़ दिया।

ऑपरेशन विजय: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

मई से जुलाई 1999 के बीच लड़ी गई कारगिल की यह लड़ाई लद्दाख के कारगिल, द्रास, बटालिक, मुश्कोह और काकसर के पहाड़ी इलाकों में 5,000 मीटर से अधिक की ऊँचाई पर लड़ी गई। यह दुनिया के सबसे कठिन युद्ध-क्षेत्रों में से एक था।

कड़ाके की ठंड, दुर्गम रास्तों और रणनीतिक चोटियों पर दुश्मन की मज़बूत स्थिति के बावजूद भारतीय सेना ने लाइन ऑफ कंट्रोल (LOC) को पार किए बिना घुसपैठियों को सफलतापूर्वक बाहर खदेड़ा। इस संयम और पेशेवर क्षमता के लिए भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक सराहना मिली।

आम जनता और राष्ट्र पर असर

ऑपरेशन विजय में 527 सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया। यह जीत न केवल भारत की सैन्य ताकत का प्रतीक बनी, बल्कि इसने देश की रक्षा तैयारियों, रणनीतिक योजना और राष्ट्रीय सुरक्षा ढाँचे को एक नई दिशा भी दी। गौरतलब है कि यह युद्ध परमाणु-सक्षम दो देशों के बीच हुई एक दुर्लभ पारंपरिक सैन्य मुठभेड़ थी, जिसे भारत ने कूटनीतिक और सैन्य — दोनों मोर्चों पर जीता।

हर वर्ष 26 जुलाई को मनाया जाने वाला यह दिन आने वाली पीढ़ियों को उन वीरों की कुर्बानी की याद दिलाता रहेगा जिन्होंने देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन पूर्व सैनिकों की प्रत्यक्ष गवाहियाँ इसे महज़ एक सरकारी आयोजन से कहीं ऊपर उठाती हैं। ज्योति शर्मा जैसे घायल सैनिकों को स्कूटर देना सम्मानजनक है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या पुनर्वास और पेंशन नीतियाँ उस बलिदान के अनुरूप हैं जो इन सैनिकों ने दिया। 1999 की जीत ने भारत की रणनीतिक सोच को बदला, पर उसके 27 साल बाद भी कई पूर्व सैनिक बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करते हैं — यह विरोधाभास मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर अनदेखा रह जाता है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कारगिल विजय दिवस क्यों मनाया जाता है?
कारगिल विजय दिवस हर वर्ष 26 जुलाई को मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन 1999 में भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन विजय' के तहत पाकिस्तानी घुसपैठियों को कारगिल की रणनीतिक ऊँचाइयों से सफलतापूर्वक खदेड़ा था। यह दिन 527 शहीद सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धांजलि देने का अवसर है।
1999 के कारगिल युद्ध में कितने सैनिक शहीद हुए थे?
'ऑपरेशन विजय' के दौरान 527 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। इसके अलावा हज़ारों सैनिकों ने दुनिया के सबसे कठिन युद्ध-क्षेत्रों में से एक — 5,000 मीटर से अधिक की ऊँचाई पर — लड़ाई लड़ी।
कारगिल की लड़ाई कहाँ और कब लड़ी गई थी?
यह लड़ाई मई से जुलाई 1999 के बीच लद्दाख के कारगिल, द्रास, बटालिक, मुश्कोह और काकसर के पहाड़ी इलाकों में लड़ी गई थी। यह 5,000 मीटर से अधिक की ऊँचाई पर लड़ी गई अब तक की सबसे कठिन सैन्य मुठभेड़ों में से एक मानी जाती है।
पूर्व सैनिक ज्योति शर्मा को किस ऑपरेशन में चोट लगी थी?
पूर्व सैनिक ज्योति शर्मा को कुपवाड़ा (जम्मू-कश्मीर) में एक आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान गश्त पर निकलने पर आतंकवादियों की गोलीबारी में दोनों पैरों में गोलियाँ लगी थीं। इसके बाद उन्हें 14-15 सर्जरी करानी पड़ीं।
कारगिल विजय दिवस 2026 पर क्या विशेष आयोजन हुए?
26 जुलाई 2026 को चंडीगढ़ में पूर्व सैनिकों ने अपने युद्ध अनुभव साझा किए। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और पंजाब एंड सिंध बैंक ने घायल पूर्व सैनिकों को स्कूटर प्रदान किए। देशभर में शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई और 27वीं वर्षगांठ के अवसर पर सैन्य बलिदान को याद किया गया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 39 मिनट पहले
  2. 3 घंटे पहले
  3. 3 घंटे पहले
  4. 4 घंटे पहले
  5. 5 घंटे पहले
  6. 7 घंटे पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले