कारगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ: सहवाग-जाधव ने 527 शहीदों को किया नमन, 'उनका कर्ज कभी नहीं भूलेंगे'
सारांश
मुख्य बातें
कारगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ पर 26 जुलाई 2026 को पूरा देश उन 527 बहादुर सैनिकों को श्रद्धांजलि दे रहा है, जिन्होंने ऑपरेशन विजय के दौरान मातृभूमि की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर किए। इस अवसर पर भारत के पूर्व क्रिकेटरों वीरेंद्र सहवाग और केदार जाधव ने भी अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
सहवाग की भावुक श्रद्धांजलि
पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, '16,000 फीट की ऊंचाई। बर्फ से ढकी चोटियां। दुश्मन ऊपर बैठा था, हमारे बहादुर सैनिक नीचे से ऊपर चढ़ रहे थे। हर कदम देश के लिए।' उन्होंने आगे लिखा कि यदि दुनिया में निस्वार्थ इंसान खोजने हों, तो किसी सैनिक की ज़िंदगी देखना काफी है — वह केवल यही चाहता है कि उसके पीछे का देश सुरक्षित रहे।
सहवाग ने लिखा, '527 सैनिकों ने अपनी जान दी, ताकि हम आज चैन से सो सकें, खुलकर सांस ले सकें। 27 साल बीत चुके हैं। हम उनका कर्ज कभी नहीं भूलेंगे। उन सभी को सलाम। जय हिंद।'
केदार जाधव का नमन
पूर्व भारतीय क्रिकेटर केदार जाधव ने भी अपनी श्रद्धांजलि में लिखा, 'हमारे उन बहादुर सैनिकों को विनम्र श्रद्धांजलि, जिन्होंने कारगिल के युद्धक्षेत्र में वीरता, बलिदान और देशभक्ति की अमर गाथा लिखी। उनकी वीरता के कारण ही आज तिरंगा गर्व से लहरा रहा है।'
कारगिल युद्ध: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
मई से जुलाई 1999 तक चला कारगिल युद्ध भारत और पाकिस्तान के बीच लड़ा गया एक पारंपरिक सशस्त्र संघर्ष था। यह लड़ाई लद्दाख के कारगिल, द्रास, बटालिक, मुश्कोह और काक्सर जैसे दुर्गम पहाड़ी इलाकों में 5,000 मीटर से भी अधिक ऊंचाई पर लड़ी गई — जो इसे इतिहास के सबसे कठिन युद्धक्षेत्रों में से एक बनाता है।
गौरतलब है कि कड़ाके की ठंड और ऊंची चोटियों पर दुश्मन की सुदृढ़ स्थिति के बावजूद भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) पार किए बिना ही पाकिस्तानी घुसपैठियों को पीछे हटने पर मजबूर किया — एक ऐसी रणनीतिक और नैतिक जीत जिसकी दुनियाभर में सराहना हुई।
राष्ट्रीय स्मृति और आगे की राह
कारगिल विजय दिवस केवल एक सैन्य उत्सव नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना का पुनर्जागरण है। यह दिन उन हज़ारों जवानों के अदम्य साहस और अनुशासन की याद दिलाता है, जिन्होंने असंभव परिस्थितियों में भी भारत की संप्रभुता अक्षुण्ण रखी। इस जीत के बाद भारत ने अपनी रक्षा तैयारियों और सीमा सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया है।