कारगिल विजय दिवस: राजनाथ सिंह श्रीनगर पहुंचे, खराब मौसम में सड़क मार्ग से द्रास रवाना
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शनिवार, 26 जुलाई 2025 को 27वें कारगिल विजय दिवस समारोह में भाग लेने के लिए श्रीनगर पहुंचे। प्रतिकूल मौसम के चलते हेलीकॉप्टर उड़ान रद्द होने के बाद उन्होंने सड़क मार्ग से द्रास जाने का निर्णय लिया, जहाँ कारगिल युद्ध स्मारक पर दो दिवसीय राष्ट्रीय स्मरण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।
श्रीनगर में स्वागत और मार्ग परिवर्तन
श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर रक्षा मंत्री का स्वागत जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने वरिष्ठ प्रशासनिक एवं सुरक्षा अधिकारियों के साथ किया। मूल कार्यक्रम के अनुसार राजनाथ सिंह को हेलीकॉप्टर से सीधे द्रास पहुंचना था, किंतु खराब उड़ान परिस्थितियों के कारण यह संभव नहीं हो सका और उन्होंने सड़क मार्ग से यात्रा करने का फैसला किया।
द्रास में दो दिवसीय समारोह का आगाज़
द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक में शनिवार से दो दिवसीय कार्यक्रम की शुरुआत हो चुकी है। इस समारोह में सेना के वरिष्ठ अधिकारी, 1999 के कारगिल युद्ध के पूर्व सैनिक, शहीदों के परिजन, नागरिक गणमान्य व्यक्ति और सरकार के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। यह आयोजन भारतीय सशस्त्र बलों के उन वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का राष्ट्रीय अवसर है जिन्होंने सर्वोच्च बलिदान दिया।
कारगिल विजय दिवस का ऐतिहासिक महत्व
कारगिल विजय दिवस प्रत्येक वर्ष 26 जुलाई को मनाया जाता है। 26 जुलाई 1999 को भारतीय सेना ने लद्दाख के उत्तरी कारगिल जिले की ऊंची पहाड़ियों पर कब्जाई गई चौकियों से पाकिस्तान समर्थित घुसपैठियों और पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़कर ऐतिहासिक विजय हासिल की थी। इस वर्ष इस विजय की 27वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है।
पाकिस्तान की भूमिका और ऐतिहासिक तथ्य
युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने शुरुआत में अपनी सेना की भागीदारी से इनकार किया था और दावा किया था कि लड़ाई कश्मीरी उग्रवादियों द्वारा लड़ी जा रही है। हालाँकि, युद्ध में मारे गए लोगों के पास मिले दस्तावेज़, युद्धबंदियों की गवाही और बाद में पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ तथा तत्कालीन सेना प्रमुख परवेज़ मुशर्रफ के बयानों से यह स्पष्ट हुआ कि इस अभियान में जनरल अशरफ राशिद के नेतृत्व में पाकिस्तानी अर्द्धसैनिक बलों की सीधी भूमिका थी।
आगे क्या
मुख्य समारोह 26 जुलाई को कारगिल युद्ध स्मारक, द्रास में आयोजित होगा, जिसमें राजनाथ सिंह शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। यह समारोह न केवल अतीत की वीरता को याद करने का अवसर है, बल्कि भारत की सामरिक दृढ़ता और सशस्त्र बलों के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता की पुनः अभिव्यक्ति भी है।