कारगिल विजय दिवस पूर्व संध्या: राजनाथ सिंह बोले — हर चुनौती से निपटने को भारतीय सेना तैयार
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 25 जुलाई 2026 को 27वें कारगिल विजय दिवस की पूर्व संध्या पर स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारतीय रक्षा बल किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह सक्षम और तैयार हैं। द्रास में आयोजित स्मरण समारोह में उन्होंने 1999 के कारगिल युद्ध में प्राण न्योछावर करने वाले वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
रक्षा मंत्री का संदेश: शत्रु की हरकतें बेकार
राजनाथ सिंह ने कहा कि दुश्मन घुसपैठ, प्रॉक्सी वॉर और नापाक गतिविधियों से बाज नहीं आया है, लेकिन भारतीय सेनाएँ हर परिस्थिति में देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि जब तक भारतीय सैनिकों का मनोबल और राष्ट्रभक्ति अडिग है, तब तक कोई भी शक्ति भारत की ओर बुरी नज़र उठाने का साहस नहीं कर सकती।
रक्षा मंत्री ने 'बाराखाना' कार्यक्रम में सैनिकों से सीधे संवाद करते हुए कहा कि कारगिल विजय केवल इतिहास का गौरवशाली अध्याय नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का अखंड स्रोत है।
रक्षा आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता पर ज़ोर
राजनाथ सिंह ने कहा कि वर्तमान सुरक्षा चुनौतियाँ लगातार बदल रही हैं और सरकार सेना को आधुनिक हथियारों, अत्याधुनिक तकनीकों तथा विश्वस्तरीय प्रशिक्षण से लैस करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा उत्पादन में हुई उल्लेखनीय प्रगति का उल्लेख किया और विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारतीय सेना दुनिया की सबसे सक्षम और आधुनिक सेनाओं में शुमार होगी।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की सैनिक कल्याण और रक्षा आधुनिकीकरण के प्रति प्रतिबद्धता भी दोहराई।
शौर्य भोज में सैन्य शक्ति का प्रदर्शन
विश्वनाथन स्टेडियम में आयोजित 'शौर्य भोज' कार्यक्रम में सेना की ओर से ड्रोन, रोबोटिक म्यूल, मार्शल आर्ट रूटीन और अन्य अत्याधुनिक सैन्य क्षमताओं का प्रदर्शन किया गया। इसके साथ ही लद्दाख की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाने वाले रंगारंग कार्यक्रमों ने समारोह को विशेष गरिमा प्रदान की।
समारोह में उपस्थित प्रमुख हस्तियाँ
इस अवसर पर लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना, सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, उत्तरी कमान के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा, कारगिल युद्ध के पूर्व सैनिक, वीरता पुरस्कार विजेता, वीर नारियाँ, शहीदों के परिजन और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। गौरतलब है कि यह समारोह हर वर्ष उस भावना को जीवित रखता है जिसने 26 जुलाई 1999 को भारत को विजय दिलाई थी।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत की उत्तरी सीमाओं पर सुरक्षा वातावरण संवेदनशील बना हुआ है — और रक्षा मंत्री का यह संबोधन केवल स्मृति नहीं, एक स्पष्ट रणनीतिक संकेत भी है।