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कारगिल विजय दिवस से पहले संसद के दोनों सदनों में शहीदों को मौन श्रद्धांजलि

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कारगिल विजय दिवस से पहले संसद के दोनों सदनों में शहीदों को मौन श्रद्धांजलि

सारांश

कारगिल विजय दिवस से दो दिन पहले संसद के दोनों सदनों ने 1999 के युद्ध के शहीदों को मौन श्रद्धांजलि दी। 26 जुलाई को रविवार होने से सदन बंद रहेगा, इसलिए शुक्रवार को ही यह भावपूर्ण नमन अदा किया गया — देश के सर्वोच्च विधायी मंच से वीर सैनिकों के बलिदान की सामूहिक स्वीकृति।

मुख्य बातें

राज्यसभा और लोकसभा दोनों सदनों ने 24 जुलाई को 1999 के कारगिल युद्ध के शहीदों को मौन श्रद्धांजलि अर्पित की।
26 जुलाई को रविवार होने के कारण सदन नहीं चलेगा, इसलिए श्रद्धांजलि एक दिन पहले शुक्रवार को दी गई।
राज्यसभा सभापति सी.पी.
राधाकृष्णन ने सदन को संबोधित कर कारगिल युद्ध में सैनिकों के अदम्य साहस और बलिदान को याद किया।
सभी सांसदों ने अपने स्थान पर खड़े होकर कुछ क्षणों का मौन रखा और शहीदों को नमन किया।
हर वर्ष 26 जुलाई को देशभर में कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है, जो 1999 की सैन्य विजय का स्मरण कराता है।

नई दिल्ली, 24 जुलाई को संसद के राज्यसभा और लोकसभा — दोनों सदनों ने वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। सांसदों ने अपने-अपने स्थान पर खड़े होकर कुछ क्षणों का मौन रखा और राष्ट्र की संप्रभुता व अखंडता के लिए प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों को नमन किया। 26 जुलाई को रविवार होने के कारण सदन की बैठक नहीं होगी, इसलिए यह श्रद्धांजलि एक दिन पूर्व शुक्रवार को अदा की गई।

राज्यसभा में सभापति का संबोधन

राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने सदन को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि 26 जुलाई को पूरा देश कारगिल विजय दिवस मनाएगा — यह दिन वर्ष 1999 की ऐतिहासिक सैन्य विजय का स्मरण कराता है और उन वीर अधिकारियों व सैनिकों के अदम्य साहस को सम्मान देने का अवसर है, जिन्होंने विषम परिस्थितियों में भी देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।

राधाकृष्णन ने आगे कहा कि कारगिल युद्ध केवल सैन्य विजय का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह भारतीय सशस्त्र बलों की अदम्य इच्छाशक्ति, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति सर्वोच्च समर्पण का भी प्रतीक है। उन्होंने स्मरण कराया कि देश के वीर जवानों ने दुर्गम पहाड़ियों, प्रतिकूल मौसम और कठिन हालात के बीच असाधारण पराक्रम दिखाते हुए दुश्मन के कब्जे से भारतीय चौकियाँ मुक्त कराई थीं।

दोनों सदनों में मौन, सामूहिक नमन

सभापति और सदन में उपस्थित सभी सांसदों ने राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले अमर शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। सदन ने उन सभी वीर सैनिकों के प्रति गहरी कृतज्ञता भी व्यक्त की जिनके अटूट साहस और निस्वार्थ सेवा ने देश की सुरक्षा सुनिश्चित की। लोकसभा में भी इसी भावना के साथ शहीदों को याद किया गया और उनकी स्मृति में मौन रखा गया।

राधाकृष्णन ने कहा कि सशस्त्र बलों का समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा आज भी पूरे देश को प्रेरित करती है तथा राष्ट्रीय एकता व संप्रभुता की रक्षा के सामूहिक संकल्प को और मजबूत बनाती है।

कारगिल विजय दिवस का महत्व

हर वर्ष 26 जुलाई को देशभर में कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है। वर्ष 1999 में भारतीय सेना ने कठिन सैन्य अभियान चलाकर कारगिल क्षेत्र में घुसपैठ कर कब्जा जमाने वाले पाकिस्तानी सैनिकों और घुसपैठियों को खदेड़ा और सभी रणनीतिक चोटियों पर दोबारा तिरंगा फहराया था। इस विजय ने भारतीय सेना के रणकौशल और बलिदान की गौरवशाली गाथा को इतिहास में अमर कर दिया।

आगे क्या

26 जुलाई 2025 को देशभर में शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाएगी और राष्ट्र उनकी वीरता को कृतज्ञतापूर्वक स्मरण करेगा। संसद का यह सामूहिक नमन इस राष्ट्रीय भावना की संसदीय अभिव्यक्ति है — एक परंपरा जो हर वर्ष देश के सर्वोच्च विधायी मंच से शहीदों के प्रति कृतज्ञता दोहराती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन संसद के भीतर यह श्रद्धांजलि दलगत सीमाओं से परे होती है। असली सवाल यह है कि क्या यह भावनात्मक नमन, शहीदों के परिवारों के लिए ठोस नीतिगत समर्थन में भी उतनी ही निरंतरता से परिलक्षित होता है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संसद में कारगिल शहीदों को श्रद्धांजलि कब और क्यों दी गई?
24 जुलाई को राज्यसभा और लोकसभा दोनों सदनों में 1999 के कारगिल युद्ध के शहीदों को मौन श्रद्धांजलि दी गई। 26 जुलाई को रविवार होने के कारण सदन बंद रहेगा, इसलिए यह श्रद्धांजलि एक दिन पहले शुक्रवार को अदा की गई।
कारगिल विजय दिवस क्या है और यह कब मनाया जाता है?
कारगिल विजय दिवस हर वर्ष 26 जुलाई को मनाया जाता है। यह 1999 के कारगिल युद्ध में भारतीय सेना की उस ऐतिहासिक जीत का स्मरण दिवस है, जब सेना ने पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़कर सभी रणनीतिक चोटियों पर तिरंगा फहराया था।
राज्यसभा सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने सदन में क्या कहा?
सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि कारगिल युद्ध केवल सैन्य विजय का प्रतीक नहीं, बल्कि भारतीय सशस्त्र बलों की अदम्य इच्छाशक्ति, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति सर्वोच्च समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने सैनिकों के दुर्गम परिस्थितियों में असाधारण पराक्रम को याद किया।
1999 के कारगिल युद्ध में भारतीय सेना ने क्या हासिल किया था?
1999 में भारतीय सेना ने कठिन सैन्य अभियान चलाकर कारगिल क्षेत्र में घुसपैठ कर कब्जा जमाने वाले पाकिस्तानी सैनिकों और घुसपैठियों को खदेड़ा। सभी रणनीतिक पहाड़ी चोटियों पर दोबारा तिरंगा फहराया गया और भारत की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा की गई।
कारगिल विजय दिवस 2025 पर देश में क्या होगा?
26 जुलाई 2025 को देशभर में कारगिल विजय दिवस मनाया जाएगा। शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाएगी और राष्ट्र उनकी वीरता व सर्वोच्च बलिदान को कृतज्ञतापूर्वक स्मरण करेगा। संसद ने इस उपलक्ष्य में एक दिन पहले ही अपना सामूहिक नमन अदा कर दिया।
राष्ट्र प्रेस
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