8 अगस्त 2026
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मणिपुर के CM खेमचंद सिंह ने सराहा: राज्य के 95% हथकरघा उत्पादक महिलाएं, 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर बोले

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मणिपुर के CM खेमचंद सिंह ने सराहा: राज्य के 95% हथकरघा उत्पादक महिलाएं, 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर बोले

सारांश

मणिपुर में हथकरघा सिर्फ शिल्प नहीं, महिलाओं की आर्थिक ताकत है। 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर CM खेमचंद सिंह ने बताया कि राज्य के 95% बुनकर महिलाएं हैं, जो परिवार की आधी आय इसी से जुटाती हैं — एक परंपरा जो अब बाहरी बाज़ारों तक पहुंच रही है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने 7 अगस्त 2026 को इंफाल में 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में भाग लिया।
मणिपुर के हथकरघा क्षेत्र में 95% उत्पादक महिलाएं हैं; परिवार के खर्च का आधा हिस्सा वे इसी से उठाती हैं।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की शुरुआत 7 अगस्त 2015 को PM नरेंद्र मोदी ने चेन्नई से की थी।
समारोह में 'थ्रेड्स ऑफ हेरिटेज' डॉक्यूमेंट्री, डेटा बुक और कॉफी टेबल बुक का विमोचन हुआ।
वर्ष 2025-26 के उत्कृष्ट बुनकरों और नेशनल हैंडलूम डिजाइनर्स कॉन्क्लेव 2026 के विजेताओं को राज्य पुरस्कार दिए गए।

मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने 7 अगस्त 2026 को इंफाल के सिटी कन्वेंशन सेंटर में आयोजित 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में कहा कि राज्य के हथकरघा क्षेत्र की रीढ़ महिलाएं हैं — लगभग 95 प्रतिशत हथकरघा उत्पादक महिलाएं हैं, जबकि शेष 5 प्रतिशत पुरुष हैं। इस अवसर पर राज्यपाल अजय कुमार भल्ला भी उपस्थित रहे।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का ऐतिहासिक संदर्भ

मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने समारोह में बताया कि राष्ट्रीय हथकरघा दिवस देश के ऐतिहासिक स्वदेशी आंदोलन की स्मृति में मनाया जाता है, जो 1905 में कलकत्ता में आरंभ हुआ था। यह आंदोलन औपनिवेशिक काल में अंग्रेजों द्वारा बंगाल के विभाजन के विरोध में उठा था और इसने हाथ से बुने कपड़ों तथा स्थानीय उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा दिया। उन्होंने बताया कि 7 अगस्त 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चेन्नई, तमिलनाडु में इस दिवस की आधिकारिक शुरुआत की थी, जिसके बाद से यह प्रतिवर्ष देशभर में मनाया जाता है।

मणिपुर में हथकरघा: परंपरा और आजीविका का संगम

खेमचंद सिंह ने अपने बचपन का स्मरण करते हुए कहा कि मणिपुर में हथकरघा केवल एक शिल्प नहीं, बल्कि घर-घर की परंपरा है। उनके अनुसार, राज्य में परिवार के खर्च का आधा हिस्सा महिलाएं हथकरघा गतिविधियों से होने वाली आय के ज़रिए उठाती हैं। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब ग्रामीण आजीविका के विकल्प सीमित हैं और महिला सशक्तिकरण राष्ट्रीय प्राथमिकता बनी हुई है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि मणिपुर के हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पाद अब केवल राज्य की सीमाओं तक नहीं, बल्कि बाहरी बाज़ारों में भी अपनी पहचान बना रहे हैं। उन्होंने पुरुषों को भी हथकरघा उत्पादों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया।

समारोह की मुख्य गतिविधियाँ

यह कार्यक्रम मणिपुर सरकार के कपड़ा, वाणिज्य और उद्योग विभाग द्वारा 'परंपरा के धागे: हथकरघा के ज़रिए संस्कृति की बुनाई' थीम के अंतर्गत आयोजित किया गया। समारोह में 'थ्रेड्स ऑफ हेरिटेज' नामक एक लघु वीडियो डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शित की गई। इसके साथ ही हथकरघा पर एक डेटा बुक और 'थ्रेड्स ऑफ हेरिटेज: ट्रेडिशनल एंड जीआई-टैग्ड हैंडवोवन स्टोल्स ऑफ मणिपुर' नामक एक कॉफी टेबल बुक का आधिकारिक विमोचन हुआ।

पुरस्कार और सम्मान

कार्यक्रम के दौरान वर्ष 2025-26 के लिए उत्कृष्ट हथकरघा बुनकरों और हस्तशिल्प कारीगरों को राज्य पुरस्कार प्रदान किए गए। नेशनल हैंडलूम डिजाइनर्स कॉन्क्लेव 2026 में होम फर्निशिंग श्रेणी में 'बेस्ट क्लस्टर डिजाइनर अवॉर्ड' विजेताओं को भी इस मंच पर सम्मानित किया गया। गौरतलब है कि यह पुरस्कार समारोह हथकरघा क्षेत्र में नवाचार और डिज़ाइन उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।

मणिपुर के हथकरघा क्षेत्र में महिलाओं की यह अग्रणी भूमिका आने वाले समय में राज्य की सांस्कृतिक पहचान और आर्थिक सशक्तिकरण दोनों के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह भागीदारी उचित आय और बाज़ार पहुंच में भी तब्दील हो रही है। राज्य में दीर्घकालिक संघर्ष और आर्थिक अनिश्चितता के बीच हथकरघा क्षेत्र महिलाओं की जीवन-रेखा बना हुआ है — यह सराहनीय है, पर इसे केवल सांस्कृतिक गौरव तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। जीआई टैगिंग और डिज़ाइन कॉन्क्लेव जैसे कदम सही दिशा में हैं, लेकिन बुनकरों को सीधे ई-कॉमर्स और निर्यात बाज़ार से जोड़ने की ठोस नीति अभी भी अपेक्षित है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मणिपुर के हथकरघा क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका कितनी बड़ी है?
मणिपुर में लगभग 95% हथकरघा उत्पादक महिलाएं हैं और वे परिवार के खर्च का आधा हिस्सा इसी आय से उठाती हैं। मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह के अनुसार, यह क्षेत्र राज्य में महिला सशक्तिकरण का सबसे बड़ा व्यावहारिक उदाहरण है।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस प्रत्येक वर्ष 7 अगस्त को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 1905 के स्वदेशी आंदोलन की याद में हुई और आधिकारिक रूप से PM नरेंद्र मोदी ने 7 अगस्त 2015 को चेन्नई से इसे आरंभ किया था।
इंफाल में 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में क्या हुआ?
7 अगस्त 2026 को इंफाल के सिटी कन्वेंशन सेंटर में आयोजित इस समारोह में 'थ्रेड्स ऑफ हेरिटेज' डॉक्यूमेंट्री, हथकरघा डेटा बुक और एक कॉफी टेबल बुक का विमोचन हुआ। साथ ही वर्ष 2025-26 के उत्कृष्ट बुनकरों और नेशनल हैंडलूम डिजाइनर्स कॉन्क्लेव 2026 के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।
मणिपुर के हथकरघा उत्पाद किन बाज़ारों में पहुंच रहे हैं?
मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने बताया कि मणिपुर के हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पाद अब राज्य के भीतर ही नहीं, बल्कि बाहरी बाज़ारों में भी पहचान और लोकप्रियता हासिल कर रहे हैं। जीआई-टैग्ड हैंडवोवन स्टोल्स इस विस्तार में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
स्वदेशी आंदोलन और हथकरघा दिवस का क्या संबंध है?
1905 में कलकत्ता में शुरू हुए स्वदेशी आंदोलन ने औपनिवेशिक काल में बंगाल के विभाजन के विरोध में हाथ से बुने कपड़ों और स्थानीय उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा दिया था। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस इसी आंदोलन की ऐतिहासिक विरासत को सम्मान देने के लिए 7 अगस्त को मनाया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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