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अरुणाचल के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने महिला आरक्षण बिल को 'बदलावकारी' बताया

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अरुणाचल के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने महिला आरक्षण बिल को 'बदलावकारी' बताया

सारांश

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने महिला आरक्षण बिल को एक ऐतिहासिक कदम बताया, जो राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देगा। उन्होंने 33 प्रतिशत आरक्षण का महत्व और महिलाओं की नेतृत्व भूमिकाओं में भागीदारी पर जोर दिया।

मुख्य बातें

महिला आरक्षण बिल में 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है।
बिल का उद्देश्य महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाना है।
मुख्यमंत्री ने दुलारी कन्या योजना का जिक्र किया।
आरक्षण की मांग 1996 से चली आ रही है।
महिलाओं को नेतृत्व की भूमिकाओं में भाग लेने के लिए प्रेरित किया गया।

ईटानगर, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने बुधवार को इस बात पर जोर दिया कि नीति-निर्माण में महिलाओं की भागीदारी विकास का एक महत्वपूर्ण संकेत है। उन्होंने कहा कि विकसित देशों में अक्सर शासन में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 40-50 प्रतिशत होता है।

'शक्ति, समानता और नेतृत्व का उत्सव' थीम पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बताया कि भारत में वर्तमान में लोकसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व लगभग 13.6 प्रतिशत है और राज्य विधानसभाओं में यह आंकड़ा लगभग 9 प्रतिशत है।

उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश की 60-सदस्यीय विधानसभा में केवल चार महिला विधायक हैं, जो राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता को दर्शाता है। महिला नेताओं, सफल हस्तियों, छात्रों और गणमान्य व्यक्तियों के सामने बोलते हुए खांडू ने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को एक ऐतिहासिक सुधार बताया, जो भारत के राजनीतिक और शासन परिदृश्य को बदलने के लिए तैयार है।

उन्होंने बताया कि 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पास हुए इस कानून में संसद और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि महिलाओं के लिए आरक्षण की मांग 1996 से चली आ रही है; पिछले कई सालों में इसके लिए कई कोशिशें की गईं, और अंततः 2023 में व्यापक राजनीतिक सहमति के साथ यह बिल पास हो गया।

खांडू ने बताया कि 16 से 18 अप्रैल तक संसद का एक विशेष सत्र होगा, जिसमें नियमों को अंतिम रूप देने और इसे लागू करने के तरीकों पर चर्चा की जाएगी, ताकि 2029 के चुनावों तक इस आरक्षण को लागू किया जा सके। उन्होंने महिलाओं से 33 प्रतिशत के कोटे से आगे सोचने का आग्रह करते हुए, नेतृत्व की भूमिकाओं और फैसले लेने की प्रक्रियाओं में सक्रिय रूप से भाग लेने का आह्वान किया।

महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए चलाई जा रही विभिन्न पहलों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने 'दुलारी कन्या योजना' जैसी योजनाओं का जिक्र किया। इस योजना के तहत छात्राओं की उच्च शिक्षा के लिए 50,000 रुपए की आर्थिक सहायता दी जाती है, जिससे अब तक 13,800 से अधिक लोगों को लाभ मिल चुका है। उन्होंने 'एचपीवी टीकाकरण अभियान' का भी उल्लेख किया, जिसके तहत 14 वर्ष की आयु वाली लड़कियों को मुफ्त टीके लगाए जाते हैं; इस अभियान के पहले चरण में 19,000 लाभार्थियों की पहचान की गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने का एक अवसर भी है। यह विधेयक नारी शक्ति को मान्यता देने और शासन में उनके योगदान को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महिला आरक्षण बिल का मुख्य उद्देश्य क्या है?
महिला आरक्षण बिल का मुख्य उद्देश्य संसद और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करना है।
इस बिल के लागू होने से क्या बदलाव आएगा?
इस बिल के लागू होने से महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ेगी, जिससे उनके नेतृत्व कौशल और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में सक्रियता बढ़ेगी।
क्या यह बिल पहले से प्रस्तावित था?
हाँ, महिलाओं के लिए आरक्षण की मांग 1996 से चली आ रही है, और इस पर कई प्रयास हुए हैं।
कब से यह आरक्षण लागू होने की उम्मीद है?
इस आरक्षण को 2029 के चुनावों तक लागू करने की योजना है।
महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए और कौन सी योजनाएं हैं?
मुख्यमंत्री ने 'दुलारी कन्या योजना' और 'एचपीवी टीकाकरण अभियान' जैसी योजनाओं का भी उल्लेख किया, जो महिलाओं के सशक्तिकरण में मदद करती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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