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महिलाओं की ताकत अब एक नारा नहीं, बल्कि देश की असली शक्ति: डिप्टी सीएम पवन कल्याण

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महिलाओं की ताकत अब एक नारा नहीं, बल्कि देश की असली शक्ति: डिप्टी सीएम पवन कल्याण

सारांश

आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने महिलाओं के सशक्तीकरण और उनके राजनीतिक अधिकारों पर जोर देते हुए कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम का संशोधन एक महत्वपूर्ण कदम है। यह विधेयक महिलाओं को विधायी संस्थाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देगा।

मुख्य बातें

महिलाओं का सशक्तीकरण राजनीति में महत्वपूर्ण है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2026 महिलाओं को 33% आरक्षण देगा।
जन सेना महिलाओं के अधिकारों के लिए प्रतिबद्ध है।
महिलाएं समाज की नींव हैं, उनकी भूमिका अपरिहार्य है।
समान अवसर देना आवश्यक है।

अमरावती, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने गुरुवार को महिलाओं के सशक्तीकरण और राजनीति में उनकी भूमिका पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशोधन विधेयक 2026 का प्रस्तुत होना एक ऐतिहासिक कदम है। इस विधेयक के माध्यम से विधायी संस्थाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा।

पवन कल्याण ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी जन सेना हमेशा से महिलाओं के अधिकारों और उनके सशक्तीकरण के लिए प्रतिबद्ध रही है। उन्होंने याद दिलाया कि 2019 के चुनावों में भी उनकी पार्टी ने महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का वादा किया था। उनके अनुसार, यह सिर्फ एक राजनीतिक वादा नहीं, बल्कि समान अवसर और सही प्रतिनिधित्व प्रदान करने का दृष्टिकोण है।

उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "आज भारत हर क्षेत्र में नारी शक्ति की बढ़ती ताकत का जश्न मना रहा है। इस राष्ट्रीय बदलाव को दर्शाते हुए आर वैशाली ने साइप्रस में महिला कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीतकर इतिहास रच दिया है। वह महिला विश्व शतरंज चैंपियनशिप में भाग लेने का अधिकार हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं।"

उन्होंने कहा, "शतरंज के बोर्ड से लेकर ओलंपिक पोडियम तक, भारतीय महिलाएं देश को प्रेरित करती आ रही हैं चाहे वह भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा शासन और लोक सेवा को दी गई मजबूती हो या भारत के अंतरिक्ष अभियानों में रितु करिधल द्वारा प्रदर्शित वैज्ञानिक उत्कृष्टता हो, या खेल के क्षेत्र में पीवी सिंधु द्वारा ओलंपिक में देश का गौरव बढ़ाना हो, मीराबाई चानू द्वारा ऐतिहासिक उपलब्धियों से देश का मान बढ़ाना हो या निखत जरीन द्वारा विश्व बॉक्सिंग मंच पर अपना दबदबा कायम करना हो।"

उन्होंने कहा, "सशक्तीकरण की यह यात्रा भारत की संवैधानिक नींव में गहराई से निहित है। इसे भारतीय संविधान की उन 'संस्थापक माताओं' ने आकार दिया है, जिनमें दक्षायणी वेलायुधन, हंसा मेहता, दुर्गाबाई देशमुख, विजया लक्ष्मी पंडित और राजकुमारी अमृत कौर शामिल हैं। भारतीय संविधान के निर्माण में उनके योगदान ने भारतीय महिलाओं की आने वाली पीढ़ियों के लिए गरिमा, समानता और न्याय सुनिश्चित किया है। ये सभी जीतें एक शक्तिशाली सत्य का प्रतीक हैं। जब प्रतिभा को अवसर मिलता है, तो महिलाएं नेतृत्व करती हैं, उत्कृष्टता हासिल करती हैं और पूरे राष्ट्र को प्रेरित करती हैं।"

पवन कल्याण ने कहा कि महिलाएं हमारे समाज की नींव हैं। परिवार के पालन-पोषण से लेकर राष्ट्र के निर्माण तक, उनकी भूमिका अद्वितीय और अपरिहार्य है। जब एक महिला आगे बढ़ती है, तो पूरा राष्ट्र आगे बढ़ता है। यह किसी नए अधिकार को प्रदान करने का विषय नहीं है। यह उस चीज को वापस दिलाने के बारे में है, जिस पर महिलाओं का हक है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो नारी शक्ति को मान्यता और सम्मान देने का प्रयास करता है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नारी शक्ति वंदन अधिनियम क्या है?
यह एक कानून है जो महिलाओं को विधायी संस्थाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करता है।
पवन कल्याण ने इस पर क्या कहा?
उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक कदम बताया और कहा कि यह महिलाओं के अधिकारों का समर्थन करता है।
महिलाओं की राजनीति में भागीदारी का महत्व क्या है?
महिलाओं की भागीदारी से समाज में संतुलन और समानता सुनिश्चित होती है।
क्या यह विधेयक केवल एक राजनीतिक वादा है?
नहीं, यह महिलाओं के लिए समान अवसर और सही प्रतिनिधित्व प्रदान करने का एक दृष्टिकोण है।
क्या यह केवल आंध्र प्रदेश में लागू होगा?
यह विधेयक पूरे देश में लागू होगा, यदि इसे पारित किया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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