वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम: अरुणाचल के 455 सीमावर्ती गांवों में ₹2,800 करोड़ की परियोजनाएं, CM पेमा खांडू का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने 15 अगस्त 2026 को ईटानगर के इंदिरा गांधी पार्क में 80वें स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराने के बाद घोषणा की कि राज्य के सीमावर्ती गांव अब पर्यटन, आजीविका और स्थानीय उद्यम के नए केंद्र बनकर उभर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के 'वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम' ने सुदूर सीमावर्ती समुदायों के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोले हैं।
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम: दो चरणों में विस्तार
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस कार्यक्रम के पहले चरण के अंतर्गत भारत-तिब्बत (चीन) सीमा से लगे 455 गांवों में ₹2,800 करोड़ की परियोजनाएं लागू की जा रही हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य बुनियादी ढांचे में सुधार, स्थानीय आजीविका को सुदृढ़ करना और क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता व सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन के माध्यम से आगे बढ़ाना है।
दूसरे चरण में भारत-म्यांमार और भारत-भूटान सीमा से लगे 122 अतिरिक्त गांवों को भी इस कार्यक्रम में सम्मिलित किया गया है। खांडू ने कहा कि इन पहलों का मूल उद्देश्य दूरदराज के क्षेत्रों में टिकाऊ आजीविका के अवसर सृजित करना और कनेक्टिविटी को मजबूत करना है।
जलविद्युत का दशक: ₹1.9 लाख करोड़ का निवेश लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने अरुणाचल प्रदेश की विशाल जलविद्युत क्षमता का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य ने 2025-2035 को 'जलविद्युत का दशक' घोषित किया है। उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य करीब 19 गीगावाट जलविद्युत क्षमता स्थापित करना है, जिसके लिए लगभग ₹1.9 लाख करोड़ के निवेश का अनुमान है।"
उन्होंने बताया कि सुबनसिरी लोअर हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट — जिसे भारत की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना बताया गया है — की आठ में से चार इकाइयां पहले ही चालू हो चुकी हैं और उनसे 1,000 मेगावाट स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है। शेष चार इकाइयों के भी इसी वर्ष चालू होने की उम्मीद जताई गई है।
खांडू ने बताया कि केंद्र सरकार ने 1,720 मेगावाट की कमला हाइड्रो इलेक्ट्रिक परियोजना और 1,200 मेगावाट की कलई-II हाइड्रो इलेक्ट्रिक परियोजना के लिए ₹40,175 करोड़ के निवेश को मंजूरी दी है। इसके अतिरिक्त टाटो-I, टाटो-II और हेओ जलविद्युत परियोजनाओं पर कार्य जारी है।
महिला सशक्तिकरण और शिक्षा में निवेश
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में 1.5 लाख से अधिक महिलाएं 16,000 से ज़्यादा स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी हैं, जिनमें से हज़ारों महिलाएं उद्यमी, सामुदायिक नेता और सामाजिक बदलाव की वाहक बन रही हैं।
शिक्षा के मोर्चे पर उन्होंने बताया कि 'मिशन शिक्षित अरुणाचल' के पहले चरण में ₹3,112.50 करोड़ का निवेश किया गया है, जिसमें बुनियादी ढांचे, शिक्षण गुणवत्ता, डिजिटल शिक्षा और संस्थागत क्षमता में सुधार शामिल है। इसके अलावा 50 सरकारी स्कूलों को 'गोल्डन जुबली स्कूल' के रूप में विकसित करने के लिए ₹500 करोड़ का निवेश किया गया है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप सरकारी स्कूलों में नामांकन में 13.33 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
बाढ़ राहत और केंद्र का सहयोग
खांडू ने अरुणाचल प्रदेश के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों असम और नागालैंड में हाल में आई बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित परिवारों के प्रति एकजुटता जताई। उन्होंने कहा, "प्रकृति ने एक बार फिर हमारी परीक्षा ली है। इससे हमारे समुदायों के सामने बड़ी चुनौतियां आई हैं और लोगों का जीवन, आजीविका तथा महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा प्रभावित हुआ है।"
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आभार जताया कि राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) के तहत ₹44.55 करोड़ की अग्रिम राशि मंजूर की गई। एक अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम ने भी राज्य का दौरा कर नुकसान का आकलन किया।
PM मोदी की ईटानगर यात्रा और आगे की राह
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी की 22 सितंबर 2025 की ईटानगर यात्रा का स्मरण किया, जिसमें ₹5,100 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास हुआ था। इस दौरान 186 मेगावाट की टाटो-I और 240 मेगावाट की हेओ जलविद्युत परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई थी, जिनमें ₹3,700 करोड़ से अधिक का निवेश शामिल है।
खांडू ने पर्यावरण के अनुकूल और जलवायु-अनुकूल विकास की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि केंद्रीय बजट में पूर्वोत्तर में बौद्ध सर्किट विकसित करने की घोषणा से राज्य की समृद्ध बौद्ध विरासत को नई पहचान मिलेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास का लाभ राज्य के अंतिम व्यक्ति और अंतिम गांव तक पहुंचाना उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी।