फारस की खाड़ी में 163 भारतीय नाविक: 12 जहाजों पर विदेश मंत्रालय की पुष्टि, 4,500 नाविक और भी क्षेत्र में
सारांश
मुख्य बातें
भारत के विदेश मंत्रालय ने 29 सितंबर 2026 को पुष्टि की कि इस समय फारस की खाड़ी में होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम से गुजर रहे 12 वाणिज्यिक जहाजों पर कुल 163 भारतीय नाविक सवार हैं। इनमें से 6 जहाज भारतीय ध्वज वाले हैं और 6 विदेशी ध्वज वाले जहाज भारत के लिए माल ला रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में द्वि-साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा, 'इस समय, हमारे पास फारस की खाड़ी में होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में छह भारत-ध्वज वाले वाणिज्यिक जहाज हैं। हमारे पास छह विदेशी-ध्वज वाले जहाज भी हैं जो भारत के लिए माल ला रहे हैं। इन जहाजों पर हमारे लगभग 163 भारतीय नाविक सवार हैं।'
जायसवाल ने यह भी बताया कि इसके अतिरिक्त 4,500 से अधिक भारतीय नाविक विभिन्न वाणिज्यिक जहाजों पर सवार हैं जो इस क्षेत्र में परिचालनरत हैं। जहाजरानी मंत्रालय इन जहाजों की आवाजाही पर लगातार निगरानी रख रहा है और दूतावासों तथा अन्य हितधारकों के माध्यम से नाविकों की सुरक्षा एवं कल्याण सुनिश्चित कर रहा है।
जयशंकर की न्यूयॉर्क बैठक में चेतावनी
25 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में 'शिपिंग और नाविकों की सुरक्षा और संरक्षण पर मित्र समूह' (GoF on S4) की उद्घाटन बैठक में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बताया था कि भारत, नाविकों के एक प्रमुख स्रोत देश के रूप में, और लाइबेरिया, सबसे बड़े शिपिंग रजिस्ट्री के रूप में, शिपिंग एवं नाविकों की सुरक्षा को उजागर करने के लिए एक साथ आए हैं।
जयशंकर ने उसी बैठक में कहा था, 'सिर्फ दो दिन पहले, ओमान की खाड़ी में एंटीगुआ और बारबुडा के ध्वज वाले बल्क कैरियर एमवी सीएपीई डीएओ पर हमला किया गया था। एक भारतीय नाविक की जान चली गई। उससे दस दिन पहले, पनामा के ध्वज वाला तेल टैंकर ईएल जीएआईए होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते समय निशाना बना था और उस घटना के बाद एक भारतीय चालक दल का सदस्य लापता हो गया।'
काला सागर में भी भारतीय जानमाल का नुकसान
जयशंकर ने काला सागर में भी इसी तरह की खतरनाक घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने बताया था कि 18 जुलाई को एमवी ओएमओआरएफआई को रूसी क्षेत्रीय जल में निशाना बनाया गया और उसके चीफ ऑफिसर, एक भारतीय नागरिक, की मौत हो गई। अगले ही दिन एमवी गोल्डन लीयो पर ओडेसा से निकलने के बाद हमला हुआ और चार भारतीय नाविकों की जान चली गई।
गौरतलब है कि ये घटनाएँ अब अपवाद नहीं रहीं — जयशंकर के शब्दों में, 'पिछले कुछ महीनों में खाड़ी, लाल सागर और उसके आसपास के क्षेत्रों में वाणिज्यिक शिपिंग और नाविकों पर बार-बार हमले हुए हैं।'
भारत का रुख और अंतरराष्ट्रीय अपील
पश्चिम एशिया संघर्ष की शुरुआत से ही भारत ने नाविकों को निशाना बनाने वाले हमलों और होर्मुज स्ट्रेट जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में मुक्त व सुरक्षित नेविगेशन को बाधित करने की कड़ी निंदा की है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया है कि वह काला सागर से लेकर लाल सागर और खाड़ी तक वाणिज्यिक जहाजों पर बढ़ते हमलों के इस खतरनाक चलन को एकजुट होकर रोके।
जहाजरानी मंत्रालय की निरंतर निगरानी और राजनयिक सक्रियता के बावजूद, क्षेत्र में भारतीय नाविकों की बड़ी संख्या को देखते हुए आने वाले हफ्तों में स्थिति पर सरकार की पैनी नज़र बनी रहेगी।