28 जुलाई 2026
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होर्मुज जलडमरूमध्य के पास 6 भारतीय जहाज, 166 नाविकों की सुरक्षा पर MEA की नज़र

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होर्मुज जलडमरूमध्य के पास 6 भारतीय जहाज, 166 नाविकों की सुरक्षा पर MEA की नज़र

सारांश

होर्मुज जलडमरूमध्य के पास 166 भारतीय नाविक — यह सिर्फ एक आँकड़ा नहीं, बल्कि बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच भारत की समुद्री भेद्यता की तस्वीर है। 'दिशा' टैंकर पर हमले के बाद MEA और DGMA दोनों सक्रिय हो गए हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या सतर्कता पर्याप्त है।

मुख्य बातें

MEA ने 28 जुलाई को पुष्टि की कि होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में 6 भारतीय जहाज और 125 भारतीय नाविक सक्रिय हैं।
विदेशी जहाजों पर तैनात 41 अतिरिक्त भारतीय नाविकों को मिलाकर कुल 166 नाविक इस संवेदनशील क्षेत्र में हैं।
24 जुलाई को एलपीजी टैंकर 'दिशा' पर ईरानी जलक्षेत्र में हमला हुआ; सभी 28 भारतीय चालक दल सदस्य सुरक्षित हैं।
DGMA ने अगली सूचना तक होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की तैनाती रोकने का निर्देश दिया है।
पोत परिवहन मंत्रालय और भारतीय दूतावास स्थिति पर निरंतर नज़र बनाए हुए हैं।

विदेश मंत्रालय (MEA) ने 28 जुलाई 2026 को पुष्टि की कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पश्चिम में फ़िलहाल 6 भारतीय जहाज सक्रिय हैं, जिन पर 125 भारतीय नाविक सवार हैं। इसके अतिरिक्त, उसी क्षेत्र में संचालित विदेशी जहाजों पर 41 और भारतीय नाविक कार्यरत हैं — यानी कुल 166 भारतीय नाविक इस संवेदनशील समुद्री गलियारे के निकट तैनात हैं।

मुख्य घटनाक्रम

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, 'फारस की खाड़ी में होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में छह भारतीय जहाज मौजूद हैं, जिन पर 125 भारतीय नाविक सवार हैं। इसके अतिरिक्त, इस क्षेत्र में संचालित विदेशी जहाजों पर भी 41 भारतीय नाविक कार्यरत हैं।' उन्होंने स्पष्ट किया कि पोत परिवहन मंत्रालय सभी भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा एवं कल्याण पर निरंतर नज़र बनाए हुए है।

पृष्ठभूमि: 'दिशा' टैंकर पर हमला

यह बयान ऐसे समय आया है जब 24 जुलाई को मोजाम्बिक के ध्वजवाहक एलपीजी टैंकर 'दिशा' पर ईरान के क्षेत्रीय जलक्षेत्र में हमला हुआ था। उस जहाज पर सवार 28 भारतीय चालक दल के सदस्य थे। ईरान स्थित भारतीय दूतावास ने पुष्टि की थी कि सभी 28 नाविक सुरक्षित हैं और दूतावास संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है।

सरकार की प्रतिक्रिया

इससे पहले महानिदेशालय समुद्री प्रशासन (DGMA) ने जहाज मालिकों, जहाज प्रबंधन कंपनियों और भर्ती एवं नियुक्ति सेवा लाइसेंस (RPSL) कंपनियों को निर्देश दिया था कि वे अगली सूचना तक होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की तैनाती से बचें। DGMA ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा था कि संघर्ष-प्रभावित क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों को देखते हुए यह कदम भारतीय नाविकों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। गौरतलब है कि क्षेत्र में स्थित भारतीय दूतावास भी संबंधित मंत्रालयों के साथ समन्वय बनाए हुए हैं ताकि ज़रूरत पड़ने पर नाविकों को हरसंभव सहायता मिल सके।

होर्मुज का रणनीतिक महत्व

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक दृष्टि से सर्वाधिक संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक है — वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी गलियारे से होकर गुजरता है। इस जलडमरूमध्य पर किसी भी व्यवधान का असर वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों पर तत्काल पड़ सकता है, जो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए विशेष रूप से चिंताजनक है।

आगे क्या

भारत सरकार स्थिति पर सतत निगरानी रख रही है। क्षेत्र में सुरक्षा जोखिम कम होने तक DGMA का प्रतिबंधात्मक निर्देश लागू रहने की संभावना है। भारतीय दूतावास और पोत परिवहन मंत्रालय के बीच समन्वय जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक बड़े सवाल को टालता है — जब DGMA ने तैनाती रोकने का निर्देश दे दिया है, तो पहले से तैनात 166 नाविकों की वापसी या सुरक्षित निकासी की योजना क्या है? भारत का समुद्री कार्यबल खाड़ी क्षेत्र में दशकों से रीढ़ की भूमिका निभाता रहा है, और यह पहली बार नहीं है कि क्षेत्रीय संघर्ष ने उन्हें जोखिम में डाला हो। निगरानी और समन्वय ज़रूरी है, लेकिन सक्रिय निकासी प्रोटोकॉल की अनुपस्थिति में यह 'नज़र बनाए रखना' पर्याप्त नहीं लगता।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

होर्मुज जलडमरूमध्य के पास कितने भारतीय नाविक हैं?
MEA के अनुसार, 28 जुलाई तक होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में 6 भारतीय जहाजों पर 125 और विदेशी जहाजों पर 41 — कुल 166 भारतीय नाविक तैनात हैं।
'दिशा' टैंकर पर हमला कब और कहाँ हुआ?
24 जुलाई को मोजाम्बिक के ध्वजवाहक एलपीजी टैंकर 'दिशा' पर ईरान के क्षेत्रीय जलक्षेत्र में हमला हुआ। जहाज पर सवार सभी 28 भारतीय चालक दल के सदस्य सुरक्षित बताए गए हैं।
DGMA ने भारतीय नाविकों के बारे में क्या निर्देश दिया है?
महानिदेशालय समुद्री प्रशासन (DGMA) ने जहाज मालिकों और प्रबंधन कंपनियों को अगली सूचना तक होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की नई तैनाती से बचने का निर्देश दिया है। यह कदम क्षेत्र में बढ़ते हमलों को देखते हुए उठाया गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए इस गलियारे में कोई भी व्यवधान ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था दोनों को प्रभावित कर सकता है।
भारत सरकार इस स्थिति में क्या कदम उठा रही है?
पोत परिवहन मंत्रालय और क्षेत्र में स्थित भारतीय दूतावास संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं। DGMA ने नई तैनाती पर रोक लगाई है और MEA स्थिति की निरंतर निगरानी कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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