होर्मुज स्ट्रेट से 62 भारत-बद्ध जहाज सुरक्षित निकले, 4,052 नाविक खाड़ी से वापस: सोनोवाल
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने 7 अगस्त को लोकसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से जानकारी दी कि 3 अगस्त 2026 तक भारत की ओर आने वाले 62 जहाज पश्चिम एशिया संकट के बावजूद होर्मुज स्ट्रेट से सफलतापूर्वक गुजर चुके हैं। इनमें 23 भारतीय ध्वज वाले और 39 विदेशी ध्वज वाले जहाज शामिल थे, और खाड़ी क्षेत्र से कुल 4,052 भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है।
मुख्य घटनाक्रम
मंत्री ने संसद को बताया कि व्यापारिक जहाजों पर बढ़ते हमलों के मद्देनजर नौवहन महानिदेशालय (डीजीएमए) ने पूर्ण अंतरराष्ट्रीय पोत और बंदरगाह सुविधा सुरक्षा (ISPS) कोड उपायों को अनिवार्य रूप से लागू करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही खाड़ी क्षेत्र से गुजरने वाली यात्राओं पर भारतीय नाविकों की तैनाती न करने की सलाह भी जारी की गई है।
यह ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में समुद्री सुरक्षा का संकट गहराता जा रहा है और वैश्विक शिपिंग मार्गों पर दबाव बढ़ रहा है। गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है।
एडवायजरी और सुरक्षा निर्देश
डीजीएमए ने काला सागर में कार्यरत भारतीय नाविकों को ले जाने वाले जहाजों के लिए भी एक अलग एडवायजरी जारी की है। इसमें अत्यधिक सावधानी बरतने, यात्रा-विशिष्ट सुरक्षा आकलन करने और किसी भी घटना की तत्काल रिपोर्टिंग करने का निर्देश दिया गया है।
इसके अतिरिक्त, बाब-अल-मंडेब स्ट्रेट, दक्षिणी लाल सागर और उससे सटे यमन के जलक्षेत्र में परिचालन करने वाले जहाजों के कप्तानों और मालिकों को सुरक्षा घटनाक्रमों की निरंतर निगरानी करने और अतिरिक्त जोखिम-न्यूनीकरण उपाय अपनाने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार के सुरक्षा उपाय
सोनोवाल ने बताया कि होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए सरकार ने कई ठोस कदम उठाए हैं। इनमें एक समर्पित 24×7 नियंत्रण कक्ष की स्थापना, जहाजों और चालक दल का लाइव डेटाबेस और हर 24 घंटे में स्थिति रिपोर्ट जारी करना शामिल है।
डीजीएमए ने एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म भी विकसित किया है, जिसमें 24×7 समुद्री दुर्घटना रिपोर्टिंग, संकट प्रबंधन और नाविक शिकायत निवारण मॉड्यूल शामिल हैं। यह प्लेटफॉर्म त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाया गया है।
नाविकों के परिवारों को सहायता
मंत्री ने कहा कि सरकार प्रभावित नाविकों के परिवारों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है और कल्याण सहायता प्रदान की जा रही है। मृत्यु के मामलों में नाविक कल्याण कोष सोसायटी के माध्यम से तत्काल सहायता के रूप में ₹10 लाख जारी किए जा रहे हैं।
यह घोषणा उस वृहद सरकारी प्रयास का हिस्सा है जिसके तहत भारत अपने समुद्री कर्मियों की सुरक्षा को लेकर कूटनीतिक और प्रशासनिक दोनों मोर्चों पर सक्रिय है। आने वाले दिनों में एडवायजरी की समीक्षा और क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति के अनुसार नए निर्देश जारी किए जाने की संभावना है।