2,729 से अधिक भारतीय नाविक सुरक्षित स्वदेश लौटे, मध्य पूर्व तनाव के बीच बंदरगाह और उड़ानें सामान्य
सारांश
Key Takeaways
- 2,729 से अधिक भारतीय नाविक मध्य पूर्व तनाव के बीच सुरक्षित स्वदेश लौटे; 49 नाविक पिछले 24 घंटों में वापस आए।
- डीजी शिपिंग कंट्रोल रूम ने अब तक 7,553 कॉल और 16,000+ ईमेल का जवाब दिया है।
- 28 फरवरी से अब तक 12.38 लाख यात्री खाड़ी क्षेत्र से भारत लौट चुके हैं; यूएई से रोज 110 उड़ानें संचालित।
- 2,432 भारतीयों को आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते ईरान से निकाला गया, जिनमें 1,096 छात्र और 657 मछुआरे शामिल।
- देशभर के सभी बंदरगाह सामान्य रूप से कार्यरत; सप्लाई चेन पर कोई बड़ा असर नहीं।
- कुवैत का एयरस्पेस पूरी तरह खुला; इजरायल से भी सीमित उड़ानें पुनः शुरू।
नई दिल्ली, 24 अप्रैल: मध्य पूर्व और खाड़ी क्षेत्र में चल रहे तनाव के बीच केंद्र सरकार ने शुक्रवार को पुष्टि की कि अब तक 2,729 से अधिक भारतीय नाविक सुरक्षित रूप से स्वदेश लौट चुके हैं, जिनमें 49 नाविक केवल पिछले 24 घंटों में वापस आए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया कि देश के सभी बंदरगाह सामान्य रूप से कार्यरत हैं और किसी भी भारतीय जहाज से जुड़ी कोई अप्रिय घटना सामने नहीं आई है।
समुद्री सुरक्षा की स्थिति
पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने जानकारी दी कि पर्शियन गल्फ क्षेत्र में हालात पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है। मंत्रालय विदेश मंत्रालय, भारतीय मिशनों और अन्य समुद्री एजेंसियों के साथ समन्वय करते हुए काम कर रहा है, ताकि नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो और समुद्री परिचालन बाधारहित चलता रहे।
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग (डीजी शिपिंग) का 24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम अब तक 7,553 कॉल और 16,000 से अधिक ईमेल का जवाब दे चुका है। केवल पिछले 24 घंटों में 150 कॉल और 394 ईमेल प्राप्त हुए हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि प्रवासी भारतीयों और उनके परिजनों में सुरक्षा को लेकर कितनी चिंता है।
बंदरगाहों और आपूर्ति श्रृंखला पर असर
सरकारी बयान के अनुसार, देशभर के सभी प्रमुख बंदरगाह बिना किसी रुकावट के सामान्य रूप से संचालित हो रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि सप्लाई चेन पर फिलहाल कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है और आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही सुचारु बनी हुई है।
यह राहत की बात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। किसी भी समुद्री व्यवधान का सीधा असर कच्चे तेल और एलपीजी की आपूर्ति पर पड़ सकता था, जो घरेलू महंगाई को भी प्रभावित करता।
उड़ानों की स्थिति और क्षेत्रवार अपडेट
28 फरवरी से अब तक 12.38 लाख से अधिक यात्री इस क्षेत्र से भारत लौट चुके हैं। यूएई से प्रतिदिन करीब 110 उड़ानें भारत के लिए संचालित हो रही हैं। सऊदी अरब और ओमान से भी नियमित उड़ानें जारी हैं।
कतर का एयरस्पेस आंशिक रूप से खुला है और वहां से उड़ानें संचालित हो रही हैं। कुवैत का एयरस्पेस अब पूरी तरह खुल चुका है और शीघ्र ही नियमित उड़ानें शुरू होने की संभावना है। बहरीन और इराक से भी सीमित उड़ानें जारी हैं।
ईरान का एयरस्पेस आंशिक रूप से खुला है, लेकिन भारतीय दूतावास ने नागरिकों को वहां यात्रा न करने की सलाह दी है। वहां मौजूद लोगों को जमीनी मार्गों से निकलने के निर्देश दिए गए हैं। अब तक 2,432 भारतीयों को आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते सुरक्षित निकाला जा चुका है, जिनमें 1,096 छात्र और 657 मछुआरे शामिल हैं।
इजरायल में भी एयरस्पेस खुल गया है और सीमित उड़ानें पुनः शुरू हो गई हैं, जिनसे भारत लौटने का विकल्प उपलब्ध है।
विदेश मंत्रालय की सक्रियता और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा
विदेश मंत्रालय खाड़ी और पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है। वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, सहायता और कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। विशेष कंट्रोल रूम चौबीसों घंटे कार्यरत है और भारतीय दूतावासों में हेल्पलाइन भी निरंतर उपलब्ध हैं।
भारतीय मिशन स्थानीय सरकारों के संपर्क में हैं और समय-समय पर यात्रा एडवाइजरी जारी कर रहे हैं। गौरतलब है कि खाड़ी देशों में लगभग 90 लाख भारतीय प्रवासी रहते हैं, जो प्रतिवर्ष अरबों डॉलर की रेमिटेंस भेजते हैं। इस क्षेत्र में अस्थिरता का असर न केवल उनकी जीविका पर, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
आगे क्या होगा
सरकार की ओर से स्थिति पर निरंतर नजर रखी जा रही है और जैसे-जैसे हालात बदलेंगे, नई एडवाइजरी जारी की जाएगी। कुवैत और इजरायल से नियमित उड़ानें शीघ्र बहाल होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव और बढ़ा तो भारत को और अधिक निकासी अभियान चलाने पड़ सकते हैं, जैसा 2006 के लेबनान युद्ध और 2015 के यमन संकट में किया गया था।