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चीन से जुड़े कॉपर डील पर अमेरिकी सीनेटर्स का बड़ा अलर्ट, राष्ट्रीय सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

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चीन से जुड़े कॉपर डील पर अमेरिकी सीनेटर्स का बड़ा अलर्ट, राष्ट्रीय सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

सारांश

एरिजोना में चीन से जुड़ी कॉपर खनन डील पर अमेरिकी सीनेटर्स ने CFIUS जांच की मांग की। BHP और रियो टिंटो स्वामित्व वाली कंपनी को संघीय जमीन देने पर सवाल, ल्यूक वायु सेना बेस के नजदीक विदेशी नियंत्रण को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया।

मुख्य बातें

सीनेटर मैक्सिन वाटर्स समेत चार डेमोक्रेट नेताओं ने वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट को पत्र लिखकर CFIUS जांच की मांग की।
एरिजोना की संघीय भूमि रिजॉल्यूशन कॉपर माइनिंग एलएलसी को दी जा रही है, जो BHP और रियो टिंटो के स्वामित्व में है।
रियो टिंटो का सबसे बड़ा शेयरधारक एक चीनी सरकारी कंपनी है, जो इस डील को सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील बनाती है।
खनन क्षेत्र ओक फ्लैट , ल्यूक वायु सेना बेस से केवल 100 मील दूर है और भविष्य में हाइपरसोनिक मिसाइल परीक्षण केंद्र बन सकता है।
मौजूदा अमेरिकी कानून में यह अनिवार्य नहीं कि खनन के बाद तांबा अमेरिका में ही प्रोसेस या बेचा जाए — यह सीधे चीन को निर्यात हो सकता है।
रिपब्लिकन सीनेटर्स ने भी अमेरिका-चीन विज्ञान-तकनीक समझौतों की निगरानी की कमी पर गंभीर चिंता जताई।

वाशिंगटन, 25 अप्रैल 2025 — अमेरिका में चीन से जुड़े कॉपर (तांबा) खनन सौदे ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। वरिष्ठ डेमोक्रेट सीनेटर्स ने इस डील को देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा करार देते हुए तत्काल जांच की मांग की है। यह विवाद एरिजोना की संघीय भूमि पर प्रस्तावित खनन परियोजना से जुड़ा है, जो एक संवेदनशील सैन्य ठिकाने के नजदीक स्थित है।

क्या है पूरा मामला?

सीनेटर मैक्सिन वाटर्स समेत चार वरिष्ठ डेमोक्रेट नेताओं ने अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट को पत्र लिखकर संयुक्त राज्य अमेरिका में विदेशी निवेश समिति (CFIUS) से इस सौदे की तत्काल समीक्षा कराने की अपील की है।

विवाद का केंद्र एरिजोना में संघीय भूमि का वह हस्तांतरण है, जो रिजॉल्यूशन कॉपर माइनिंग एलएलसी को दिया जा रहा है। इस भूमि में अमेरिका के सबसे बड़े अविकसित तांबा भंडारों में से एक मौजूद है।

चीन से कनेक्शन क्यों बना चिंता का विषय?

रिजॉल्यूशन कॉपर माइनिंग एलएलसी वैश्विक खनन दिग्गज कंपनियों बीएचपी (BHP) और रियो टिंटो (Rio Tinto) के स्वामित्व में है। सीनेटर्स ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि इन दोनों कंपनियों की आय का बड़ा हिस्सा चीन को खनिज निर्यात से आता है।

सबसे अहम तथ्य यह है कि रियो टिंटो का सबसे बड़ा शेयरधारक एक चीनी सरकारी कंपनी है। इससे यह आशंका बलवती होती है कि अमेरिकी खनिज संसाधनों पर परोक्ष रूप से बीजिंग का प्रभाव स्थापित हो सकता है।

सैन्य सुरक्षा पर मंडराता खतरा

यह खनन क्षेत्र ओक फ्लैट (Oak Flat) के नाम से जाना जाता है और यह ल्यूक वायु सेना बेस से मात्र लगभग 100 मील की दूरी पर स्थित है। सीनेटर्स का तर्क है कि किसी संवेदनशील सैन्य प्रतिष्ठान के इतने निकट विदेशी नियंत्रण वाली खनन गतिविधि सुरक्षा नियमों के तहत अस्वीकार्य जोखिम पैदा करती है।

सीनेटर्स ने यह भी चेतावनी दी कि प्रस्तावित परियोजना में सुरंगें, परिवहन मार्ग और बिजली अवसंरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) का निर्माण होगा। इससे रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस क्षेत्र की सुरक्षा कमजोर पड़ सकती है। इसके अलावा, इस इलाके में भविष्य में हाइपरसोनिक मिसाइल निर्माण और परीक्षण सुविधा विकसित होने की संभावना भी जताई गई है।

तांबे की रणनीतिक अहमियत

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने तांबे को 'क्रिटिकल मिनरल' घोषित किया है, क्योंकि यह बिजली उत्पादन और विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र की रीढ़ है। गौरतलब है कि मौजूदा अमेरिकी कानून में यह अनिवार्य नहीं है कि इस खदान से निकाला गया तांबा अमेरिका में ही प्रोसेस या बेचा जाए — यानी यह खनिज सीधे चीन को निर्यात हो सकता है।

यह विरोधाभास ही इस पूरे विवाद का सबसे नुकीला पहलू है: अमेरिकी जमीन, अमेरिकी खनिज, लेकिन संभावित रूप से चीन के फायदे के लिए।

रिपब्लिकन की भी चिंता — विज्ञान-तकनीक समझौतों पर सवाल

इसी बीच, रिपब्लिकन सीनेटर्स ने भी अमेरिका-चीन के बीच विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग समझौतों पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने अमेरिकी विदेश विभाग को लिखे पत्र में कहा कि इन समझौतों की निगरानी के लिए कोई केंद्रीकृत प्रणाली नहीं है।

सीनेटर्स का आरोप है कि चीन पहले भी ऐसे सहयोग का इस्तेमाल बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) और व्यापारिक रहस्य हासिल करने के लिए करता रहा है। इन समझौतों के जरिए साझा की गई रिसर्च और तकनीकी जानकारी का दुरुपयोग विरोधी देश कर सकते हैं।

ऐतिहासिक संदर्भ और व्यापक तस्वीर

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध (Trade War) अपने चरम पर है और ट्रम्प प्रशासन चीनी निवेश पर अंकुश लगाने की नीति अपना रहा है। इससे पहले भी CFIUS ने कई चीनी कंपनियों के अमेरिकी अधिग्रहण को राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर रोका है।

विशेषज्ञों का मानना है कि क्रिटिकल मिनरल्स अब भू-राजनीतिक शतरंज की नई बिसात बन चुके हैं। जो देश इन्हें नियंत्रित करेगा, वह 21वीं सदी की तकनीकी और सैन्य शक्ति की दौड़ में आगे रहेगा।

आने वाले हफ्तों में CFIUS की समीक्षा प्रक्रिया और अमेरिकी कांग्रेस में इस मुद्दे पर होने वाली बहस यह तय करेगी कि यह डील आगे बढ़ती है या रद्द होती है। यह घटनाक्रम वैश्विक खनिज आपूर्ति श्रृंखला और अमेरिका-चीन संबंधों पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसी के कार्यकाल में चीन से जुड़ी कंपनी को अमेरिकी सैन्य अड्डे के नजदीक महत्वपूर्ण खनिज भंडार सौंपे जाने की तैयारी है। मौजूदा कानून की खामी — कि खनन के बाद तांबा अमेरिका में बेचना जरूरी नहीं — यह दिखाती है कि नीति-निर्माण में रणनीतिक सोच अभी भी पीछे है। क्रिटिकल मिनरल्स की यह लड़ाई 21वीं सदी की असली भू-राजनीतिक जंग है, और इसमें जो देश सतर्क नहीं रहेगा, वह तकनीकी और सैन्य दौड़ में पिछड़ जाएगा।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिका में चीन से जुड़ी कॉपर डील क्या है?
यह डील एरिजोना में संघीय भूमि को रिजॉल्यूशन कॉपर माइनिंग एलएलसी को हस्तांतरित करने से जुड़ी है, जो BHP और रियो टिंटो के स्वामित्व में है। रियो टिंटो का सबसे बड़ा शेयरधारक एक चीनी सरकारी कंपनी है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंताएं उठी हैं।
CFIUS क्या है और इसकी जांच क्यों मांगी गई?
CFIUS यानी Committee on Foreign Investment in the United States एक अमेरिकी सरकारी समिति है जो विदेशी निवेश से जुड़े राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिमों की समीक्षा करती है। सीनेटर्स ने इसलिए जांच मांगी क्योंकि यह खनन क्षेत्र एक सैन्य बेस के नजदीक है और इसमें चीनी हित जुड़े हैं।
ओक फ्लैट खनन क्षेत्र सुरक्षा के लिए खतरा क्यों है?
ओक फ्लैट, ल्यूक वायु सेना बेस से लगभग 100 मील दूर है और यहां प्रस्तावित सुरंगें, परिवहन मार्ग और बिजली अवसंरचना संवेदनशील सैन्य क्षेत्र की सुरक्षा को कमजोर कर सकती हैं। भविष्य में इस क्षेत्र में हाइपरसोनिक मिसाइल परीक्षण सुविधा बनने की संभावना भी है।
तांबे को 'क्रिटिकल मिनरल' क्यों कहा जाता है?
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने तांबे को क्रिटिकल मिनरल घोषित किया है क्योंकि यह बिजली उत्पादन, इलेक्ट्रिक वाहन और विनिर्माण उद्योग के लिए अनिवार्य है। इसकी आपूर्ति में किसी विदेशी देश का नियंत्रण अमेरिकी अर्थव्यवस्था और रक्षा को प्रभावित कर सकता है।
रिपब्लिकन सीनेटर्स ने विज्ञान समझौतों पर क्या आपत्ति जताई?
रिपब्लिकन सीनेटर्स ने कहा कि अमेरिका-चीन विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग समझौतों की निगरानी के लिए कोई केंद्रीकृत प्रणाली नहीं है। उनका आरोप है कि चीन इन समझौतों का उपयोग बौद्धिक संपदा और व्यापारिक रहस्य चुराने के लिए करता रहा है।
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