बड़ा खुलासा: 'लॉरेंस ऑफ पंजाब' वेब सीरीज बैन के बाद गैंग ने डीजीपी और कांग्रेस नेताओं को दी जान से मारने की धमकी
सारांश
Key Takeaways
- केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 25 अप्रैल 2025 को Zee5 को 'लॉरेंस ऑफ पंजाब' वेब सीरीज रिलीज न करने का आधिकारिक आदेश दिया।
- लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने बैन के जवाब में सोशल मीडिया पर चार प्रमुख हस्तियों को जान से मारने की धमकी दी।
- धमकी पाने वालों में पंजाब डीजीपी गौरव यादव, कांग्रेस अध्यक्ष राजा वडिंग, सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा और बलकौर सिंह (सिद्धू मूसेवाला के पिता) शामिल हैं।
- कांग्रेस सांसद रंधावा ने व्यक्तिगत रूप से धमकी भरे संदेशों और फोन कॉल्स मिलने की पुष्टि की।
- मंत्रालय ने 27 अक्टूबर 2025 के ओटीटी दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि गैंगस्टर-आधारित कंटेंट युवाओं को भटका सकता है।
- पंजाब पुलिस सहित सभी सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं और मामले की जांच जारी है।
चंडीगढ़, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के जीवन पर केंद्रित वेब सीरीज 'लॉरेंस ऑफ पंजाब' पर भारत सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के तुरंत बाद बिश्नोई गैंग ने सोशल मीडिया के माध्यम से कई प्रमुख हस्तियों को जान से मारने की खुली धमकी दे डाली। इस घटना ने पंजाब में सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर ला दिया है और पूरे प्रदेश में तनाव का माहौल पैदा हो गया है।
किन-किन हस्तियों को मिली जानलेवा धमकी
लॉरेंस बिश्नोई गैंग की ओर से जिन प्रमुख लोगों को सोशल मीडिया पर धमकी दी गई है, उनमें पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, गुरदासपुर से कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव और दिवंगत पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह शामिल हैं। इन सभी को एक साथ निशाना बनाया जाना इस धमकी की गंभीरता को और बढ़ा देता है।
कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने स्वयं इन धमकी भरे संदेशों और फोन कॉल्स की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से धमकी भरे संदेश प्राप्त हुए हैं, जो सीधे बिश्नोई गैंग से जुड़े होने का दावा करते हैं।
केंद्र सरकार ने क्यों लगाया वेब सीरीज पर प्रतिबंध
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने शुक्रवार, 25 अप्रैल को ओटीटी प्लेटफॉर्म Zee5 को आधिकारिक पत्र लिखकर 'लॉरेंस ऑफ पंजाब' वेब सीरीज को रिलीज न करने का स्पष्ट निर्देश दिया। इस पत्र को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने अपने आधिकारिक X (ट्विटर) अकाउंट पर भी साझा किया।
मंत्रालय ने अपने पत्र में 27 अक्टूबर 2025 को जारी किए गए ओटीटी दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि गैंगस्टरों और अपराधियों के जीवन पर आधारित कंटेंट को प्रसारित करने से पहले पूरी विवेकशीलता बरती जानी चाहिए। पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया कि इस प्रकार की वेब सीरीज युवाओं को भटकाने और समाज में अपराध की प्रवृत्ति को बढ़ावा देने में सक्षम हैं।
पंजाब पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया
पंजाब पुलिस ने भी इस पूरे मामले में अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा था कि यदि इस प्रकार की वेब सीरीज को रिलीज की अनुमति दी जाती है, तो इससे सामाजिक व्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। पुलिस का मानना है कि अपराधियों को महिमामंडित करने वाला कंटेंट किसी भी स्वस्थ समाज के लिए खतरनाक है।
धमकियां सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं। डीजीपी गौरव यादव सहित सभी धमकी प्राप्त हस्तियों की सुरक्षा की समीक्षा की जा रही है और पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।
गहरा संदर्भ: बिश्नोई गैंग की रणनीति और व्यापक खतरा
यह पहली बार नहीं है जब लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने किसी सरकारी निर्णय के विरोध में खुली धमकी देने का रास्ता अपनाया हो। गौरतलब है कि इससे पहले इस गैंग ने बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान को भी जान से मारने की धमकी दी थी, जिसके बाद मुंबई पुलिस ने उनकी सुरक्षा कड़ी की थी। इस पैटर्न को देखें तो स्पष्ट होता है कि गैंग अपनी ताकत और प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए हाई-प्रोफाइल धमकियों का इस्तेमाल एक रणनीतिक हथियार के रूप में करता है।
विडंबना यह है कि 'लॉरेंस ऑफ पंजाब' वेब सीरीज पर प्रतिबंध लगाने का उद्देश्य गैंग की छवि को कमजोर करना था, लेकिन इस प्रतिबंध ने उलटा असर करते हुए गैंग को एक नया मंच दे दिया जहां से वह और अधिक आक्रामकता के साथ सामने आया। यह सरकार की रणनीति पर सवाल खड़े करता है।
इसके अलावा, सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह को धमकी दिया जाना विशेष रूप से संवेदनशील है, क्योंकि मई 2022 में मूसेवाला की हत्या में भी बिश्नोई गैंग का नाम सामने आया था। एक पिता जो पहले ही अपने बेटे को खो चुका है, उसे दोबारा इसी गैंग से धमकी मिलना न केवल क्रूरता की पराकाष्ठा है, बल्कि यह दर्शाता है कि गैंग की पहुंच और दुस्साहस में कोई कमी नहीं आई है।
आगे क्या होगा
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में केंद्रीय जांच एजेंसियों की भूमिका और बढ़ सकती है। Zee5 अब इस वेब सीरीज को लेकर कोई कानूनी रास्ता अपना सकता है या सरकार के निर्देश का पालन करते हुए इसे अनिश्चितकाल के लिए रोक सकता है। वहीं, पंजाब विधानसभा में भी इस मुद्दे पर चर्चा की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार संगठित अपराध और मीडिया सेंसरशिप के बीच इस नाजुक संतुलन को किस प्रकार साधती है।