सीएम योगी का बड़ा हमला: ममता दीदी को चिंता, हिंदू बढ़े तो सड़क पर इफ्तारी कैसे होगी?
सारांश
Key Takeaways
- सीएम योगी आदित्यनाथ ने 25 अप्रैल 2026 को नबद्वीप, नदिया में जनसभा में ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला।
- योगी ने कहा — सीएए विरोध के पीछे ममता की चिंता है कि हिंदू बढ़े तो सड़कों पर इफ्तारी कैसे होगी।
- यूपी में सड़क पर नमाज और इफ्तार पार्टी पर पाबंदी का उदाहरण देकर बंगाल से तुलना की।
- भाजपा कार्यकर्ता संजय भौमिक की हत्या और टीएमसी के माफियाराज पर सीधा आरोप लगाया।
- 4 मई को परिणाम आने पर टीएमसी के सफाए और भाजपा की डबल इंजन सरकार बनने का दावा किया।
- चैतन्य महाप्रभु और इस्कॉन के माध्यम से बंगाल की सनातन विरासत को राजनीतिक विमर्श से जोड़ा।
नदिया, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को पश्चिम बंगाल के नबद्वीप विधानसभा क्षेत्र में जनसभा को संबोधित करते हुए तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि ममता दीदी ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) का विरोध इसलिए किया क्योंकि उन्हें डर है कि यदि हिंदू अधिक हो गए तो सड़कों पर इफ्तारी कैसे होगी। यह बयान बंगाल चुनाव प्रचार के दौरान सबसे चर्चित राजनीतिक कथन बन गया है।
नबद्वीप में योगी की जनसभा — हजारों की भीड़, 'योगी-योगी' के नारे
सीएम योगी आदित्यनाथ शनिवार को नबद्वीप विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार श्रुति शेखर गोस्वामी के समर्थन में आयोजित जनसभा में बोल रहे थे। भीषण गर्मी के बावजूद हजारों की संख्या में उपस्थित जनसमूह लगातार 'योगी-योगी' के नारे लगाता रहा। सीएम ने नबद्वीप की आध्यात्मिक पहचान और चैतन्य महाप्रभु को नमन करते हुए अपना संबोधन शुरू किया।
उन्होंने 23 अप्रैल को हुए पहले चरण के मतदान में 152 सीटों पर रिकॉर्ड मतदान के लिए बंगाल के मतदाताओं का अभिनंदन किया और कहा कि 4 मई को परिणाम आने पर नबद्वीप का केसरिया झंडा पूरे बंगाल में लहराएगा।
सीएए विरोध पर ममता को घेरा — इफ्तारी वाला बयान
सीएम योगी ने कहा कि सीएए यह सुनिश्चित करता है कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से प्रताड़ित होकर आए हिंदू, बौद्ध, जैन व सिख शरणार्थियों को — जो पांच वर्ष से अधिक समय से भारत में रह रहे हैं — भारतीय नागरिकता मिलेगी। इस कानून के तहत बंगाल में बड़ी संख्या में नागरिकता प्रदान की गई, फिर भी ममता बनर्जी ने इसका विरोध किया।
योगी ने तंज कसते हुए कहा, "ममता दीदी को चिंता है कि हिंदू ज्यादा हो गए तो सड़कों पर इफ्तारी कैसे होगी?" उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में न कोई सड़क पर नमाज पढ़ सकता है, न इफ्तार पार्टी कर सकता है — और मस्जिद से भी बाहर आवाज नहीं आती।
टीएमसी पर अराजकता और माफियाराज का आरोप
सीएम योगी ने टीएमसी को बंगाल की अराजकता के लिए सीधे जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि पहले चरण के मतदान में भाजपा नेताओं और प्रत्याशियों पर हमले हुए, भाजपा कार्यकर्ता संजय भौमिक की निर्मम हत्या कर दी गई, जबकि टीएमसी के गुंडे खुलेआम घूम रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बंगाल में लैंड माफिया, सैंड माफिया और कैटल माफिया हावी हैं। दिल्ली से भेजे गए पैसे टीएमसी के गुंडे हड़प जाते हैं। कांग्रेस, कम्युनिस्ट और टीएमसी ने मिलकर बंगाल के माथे पर लूटपाट का जो कलंक लगाया है, अब उससे मुक्ति का समय आ गया है।
दुर्गापूजा और हिंदू संस्कृति पर हमलों का मुद्दा
सीएम योगी ने आरोप लगाया कि ममता सरकार दुर्गापूजा, मूर्ति विसर्जन और जय श्री राम के उद्घोष पर अघोषित प्रतिबंध लगाती है। कोलकाता हाईकोर्ट को आदेश देना पड़ा था कि दुर्गापूजा की शोभायात्रा पर हमला करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, लेकिन टीएमसी सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया।
उन्होंने चेतावनी दी कि बंगाल की धरती पर मां काली और मां दुर्गा की पूजा रोकने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सड़कों पर आंदोलन होगा। उन्होंने कहा, "बंगाल की धरती पर गोमाता को कटने और हिंदुओं को बंटने नहीं देंगे।"
चैतन्य महाप्रभु और सनातन विरासत का संदर्भ
सीएम योगी ने कहा कि 500 वर्ष पूर्व चैतन्य महाप्रभु ने हरे कृष्णा, हरे रामा की भक्ति धुन के माध्यम से भारत के सनातन ध्वज को वैश्विक पटल पर स्थापित किया था। आज यही कार्य इस्कॉन के संन्यासी वृंदावन से पूरी दुनिया में कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बंगाल ने भारत को राममोहन राय, स्वामी विवेकानंद, रवींद्रनाथ टैगोर, नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसी महान विभूतियां दीं, लेकिन आज उसी बंगाल के सामने स्वयं की पहचान का संकट खड़ा है — और इस संकट की जड़ में टीएमसी का टेरर, माफियाराज और भ्रष्टाचार है।
डबल इंजन सरकार का वादा
सीएम योगी ने बंगाल के मतदाताओं से अपील की कि वे भाजपा की डबल इंजन सरकार को मौका दें, जो डबल स्पीड से विकास करेगी। उन्होंने कहा कि घुसपैठियों के हाथों बंगाल के नागरिकों के हक की डकैती करवाने वाली टीएमसी सरकार से मुक्ति का समय आ गया है। 4 मई के परिणाम यह तय करेंगे कि बंगाल अराजकता की राह चुनता है या विकास की।