फारस की खाड़ी में भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा पर मंत्रालय की पैनी नजर
सारांश
Key Takeaways
- फारस की खाड़ी में भारतीय जहाजों की संख्या 28 है।
- नाविकों की सुरक्षा के लिए निरंतर निगरानी की जा रही है।
- सरकार ने कई समन्वित कदम उठाए हैं।
- बंदरगाहों पर कामकाज सामान्य है।
- एलपीजी जहाजों को प्राथमिकता दी जा रही है।
नई दिल्ली, 12 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय ने गुरुवार को घोषणा की कि फारस की खाड़ी में भारतीय ध्वज के अंतर्गत संचालित जहाजों की संख्या 28 बनी हुई है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि सभी भारतीय जहाजों और उनके चालक दल की सुरक्षा पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है।
इन भारतीय जहाजों में से 24 जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में स्थित हैं, जिन पर 677 भारतीय नाविक हैं। वहीं चार जहाज जलडमरूमध्य के पूर्व में हैं, जिन पर 101 भारतीय नाविक मौजूद हैं।
मंत्रालय के अनुसार, भारतीय दूतावासों और स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर संबंधित प्राधिकरण, जहाज प्रबंधक और भर्ती एजेंसियां लगातार समन्वय कर रही हैं। इसका उद्देश्य नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है।
डीजी शिपिंग द्वारा 28 फरवरी को जारी की गई सलाह, जिसमें भारतीय नाविकों और जहाजों की सुरक्षा के लिए एहतियाती उपाय बताए गए थे, अब भी लागू हैं।
देश के सभी बंदरगाहों पर सामान्य रूप से कार्य जारी है। सभी प्रमुख बंदरगाहों और राज्य समुद्री बोर्डों के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की गई है, जिससे शिपिंग कंपनियों और निर्यातकों को सहारा मिल सके और उनकी समस्याओं का समयबद्ध समाधान हो सके।
प्रमुख बंदरगाहों को एलपीजी जहाजों को प्राथमिकता के आधार पर बर्थिंग (लंगर डालने की सुविधा) देने के निर्देश भी दिए गए हैं।
इसके अतिरिक्त, बंदरगाहों ने कई सहूलियतें लागू की हैं, जैसे मध्य-पूर्व जाने वाले प्रभावित कार्गो को ट्रांसशिपमेंट कार्गो के रूप में स्टोर करने की अनुमति देना, अतिरिक्त भंडारण स्थान उपलब्ध कराना, जरूरत पड़ने पर जहाजों को अस्थायी बर्थिंग की अनुमति देना, कस्टम विभाग के साथ समन्वय कर 'बैक टू टाउन' प्रक्रिया को तेज करना और जहां संभव हो वहां ईंधन आपूर्ति (बंकरिंग) बढ़ाना।
प्रमुख बंदरगाहों को कस्टम और डीजीएफटी जैसी एजेंसियों के साथ समन्वय करने, बंदरगाह शुल्क में राहत पर विचार करने और मंत्रालय को रोजाना कार्रवाई की रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि संकट के दौरान लॉजिस्टिक्स व्यवस्था सुचारू बनी रहे।
सरकार ने बुनियादी ढांचे, वित्तीय सहायता, ऊर्जा सुरक्षा की निगरानी और जहाजों की सुरक्षा से संबंधित कई समन्वित कदम उठाए हैं।