होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय जहाजों की आवाजाही फिर शुरू, डीजीएस ने जारी किए सख्त सुरक्षा निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग (DGS) ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से भारतीय जहाजों के गुजरने पर लगी रोक 26 जून 2026 को औपचारिक रूप से हटा ली है। हालाँकि, DGS ने स्पष्ट किया है कि जहाजों के कप्तानों, चालक दल और संबंधित सभी पक्षों को फारस की खाड़ी क्षेत्र में अत्यधिक सतर्कता बरतनी होगी और निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करना होगा।
मुख्य घटनाक्रम
DGS द्वारा 26 जून को जारी सर्कुलर में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने तटीय देशों और समुद्री उद्योग के साथ मिलकर फंसे हुए नाविकों को सुरक्षित निकालने के लिए एक समन्वित व्यवस्था शुरू की है। सर्कुलर के अनुसार, IMO, UKMTO, MICA सेंटर और संबंधित तटीय देश इस प्रयास में मिलकर काम कर रहे हैं।
DGS ने यह भी स्पष्ट किया कि वह बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, भारतीय नौसेना, विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में है, ताकि भारतीय नाविकों की सुरक्षा और हितों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।
किन पर लागू होंगे नए निर्देश
DGS ने स्पष्ट किया है कि भारतीय जहाज मालिकों, जहाज प्रबंधन कंपनियों और RPSL एजेंसियों के लिए फारस की खाड़ी क्षेत्र में जहाजों का संचालन जारी रखने या भारतीय नाविकों की तैनाती पर अब कोई प्रतिबंध नहीं है। बस उन्हें तटीय देशों और सुरक्षा एजेंसियों की ओर से जारी सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन अनिवार्य रूप से करना होगा।
यह ऐसे समय में आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है — दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। भारत इस क्षेत्र में सक्रिय समुद्री व्यापार हितों वाला देश है।
कप्तानों को क्या करना होगा
DGS के सर्कुलर के अनुसार, फारस की खाड़ी, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज या आसपास के समुद्री क्षेत्रों में संचालित जहाजों के कप्तानों को निम्नलिखित निर्देशों का पालन करना होगा:
सुरक्षा एजेंसियों की ओर से जारी सभी चेतावनियों और निर्देशों पर लगातार नज़र रखनी होगी। जहाज की सुरक्षा से जुड़े सभी मानक नियमों का पालन अनिवार्य है। किसी भी भारतीय नाविक से संबंधित घटना की सूचना तुरंत DG कम्युनिकेशन सेंटर और क्रू ब्रांच को देनी होगी।
फर्जी खबरों से सावधानी की अपील
DGS ने सभी संबंधित पक्षों को यह भी सलाह दी है कि जहाजों से जुड़ी किसी भी सुरक्षा घटना की खबरें, वीडियो या अन्य सामग्री की सत्यता पहले सरकारी और आधिकारिक स्रोतों से सत्यापित करें। बिना पुष्टि वाली खबरें, सोशल मीडिया पोस्ट या संदिग्ध वीडियो आगे साझा न करें।
आगे क्या होगा
DGS ने कहा है कि समय-समय पर जारी होने वाली सलाह और निर्देशों पर सभी संबंधित पक्ष नज़र बनाए रखें। गौरतलब है कि यह कदम भारतीय नाविकों की सुरक्षा, हितों और कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उठाया गया है। आने वाले दिनों में क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति के अनुसार DGS अतिरिक्त दिशानिर्देश जारी कर सकता है।