12 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय जहाजों की आवाजाही फिर शुरू, डीजीएस ने जारी किए सख्त सुरक्षा निर्देश

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय जहाजों की आवाजाही फिर शुरू, डीजीएस ने जारी किए सख्त सुरक्षा निर्देश

सारांश

डीजीएस ने होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय जहाजों पर लगी रोक हटा दी है — लेकिन यह खुली छूट नहीं है। IMO, UKMTO और MICA सेंटर के साथ समन्वय में जारी सख्त सुरक्षा निर्देश बताते हैं कि क्षेत्र अभी भी संवेदनशील है और भारतीय नाविकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है।

मुख्य बातें

डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग (DGS) ने 26 जून 2026 को सर्कुलर जारी कर होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय जहाजों की आवाजाही पर लगी रोक हटाई।
भारतीय जहाज मालिकों, प्रबंधन कंपनियों और RPSL एजेंसियों पर फारस की खाड़ी में संचालन या नाविकों की तैनाती पर कोई प्रतिबंध नहीं।
IMO , UKMTO और MICA सेंटर मिलकर फंसे नाविकों की सुरक्षित निकासी के लिए समन्वित व्यवस्था चला रहे हैं।
जहाजों के कप्तानों को सुरक्षा एजेंसियों की चेतावनियों पर लगातार नज़र रखने और घटना की सूचना तुरंत DG कम्युनिकेशन सेंटर को देने के निर्देश।
बिना पुष्टि वाली खबरें और सोशल मीडिया पोस्ट साझा न करने की सलाह दी गई है।

डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग (DGS) ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से भारतीय जहाजों के गुजरने पर लगी रोक 26 जून 2026 को औपचारिक रूप से हटा ली है। हालाँकि, DGS ने स्पष्ट किया है कि जहाजों के कप्तानों, चालक दल और संबंधित सभी पक्षों को फारस की खाड़ी क्षेत्र में अत्यधिक सतर्कता बरतनी होगी और निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करना होगा।

मुख्य घटनाक्रम

DGS द्वारा 26 जून को जारी सर्कुलर में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने तटीय देशों और समुद्री उद्योग के साथ मिलकर फंसे हुए नाविकों को सुरक्षित निकालने के लिए एक समन्वित व्यवस्था शुरू की है। सर्कुलर के अनुसार, IMO, UKMTO, MICA सेंटर और संबंधित तटीय देश इस प्रयास में मिलकर काम कर रहे हैं।

DGS ने यह भी स्पष्ट किया कि वह बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, भारतीय नौसेना, विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में है, ताकि भारतीय नाविकों की सुरक्षा और हितों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।

किन पर लागू होंगे नए निर्देश

DGS ने स्पष्ट किया है कि भारतीय जहाज मालिकों, जहाज प्रबंधन कंपनियों और RPSL एजेंसियों के लिए फारस की खाड़ी क्षेत्र में जहाजों का संचालन जारी रखने या भारतीय नाविकों की तैनाती पर अब कोई प्रतिबंध नहीं है। बस उन्हें तटीय देशों और सुरक्षा एजेंसियों की ओर से जारी सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन अनिवार्य रूप से करना होगा।

यह ऐसे समय में आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है — दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। भारत इस क्षेत्र में सक्रिय समुद्री व्यापार हितों वाला देश है।

कप्तानों को क्या करना होगा

DGS के सर्कुलर के अनुसार, फारस की खाड़ी, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज या आसपास के समुद्री क्षेत्रों में संचालित जहाजों के कप्तानों को निम्नलिखित निर्देशों का पालन करना होगा:

सुरक्षा एजेंसियों की ओर से जारी सभी चेतावनियों और निर्देशों पर लगातार नज़र रखनी होगी। जहाज की सुरक्षा से जुड़े सभी मानक नियमों का पालन अनिवार्य है। किसी भी भारतीय नाविक से संबंधित घटना की सूचना तुरंत DG कम्युनिकेशन सेंटर और क्रू ब्रांच को देनी होगी।

फर्जी खबरों से सावधानी की अपील

DGS ने सभी संबंधित पक्षों को यह भी सलाह दी है कि जहाजों से जुड़ी किसी भी सुरक्षा घटना की खबरें, वीडियो या अन्य सामग्री की सत्यता पहले सरकारी और आधिकारिक स्रोतों से सत्यापित करें। बिना पुष्टि वाली खबरें, सोशल मीडिया पोस्ट या संदिग्ध वीडियो आगे साझा न करें।

आगे क्या होगा

DGS ने कहा है कि समय-समय पर जारी होने वाली सलाह और निर्देशों पर सभी संबंधित पक्ष नज़र बनाए रखें। गौरतलब है कि यह कदम भारतीय नाविकों की सुरक्षा, हितों और कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उठाया गया है। आने वाले दिनों में क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति के अनुसार DGS अतिरिक्त दिशानिर्देश जारी कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सर्कुलर की भाषा बताती है कि यह सामान्य स्थिति की वापसी नहीं, बल्कि एक सतर्क पुनरारंभ है। IMO और UKMTO जैसी बहुपक्षीय एजेंसियों को इसमें शामिल करना संकेत देता है कि क्षेत्र में जोखिम अभी पूरी तरह टला नहीं है। भारत के लिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि देश के ऊर्जा आयात का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होता है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या ये निर्देश ज़मीनी स्तर पर कप्तानों तक समय पर पहुँचते हैं और क्या संचार तंत्र किसी आपात स्थिति में तेज़ी से काम करता है।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीजीएस ने होर्मुज जलडमरूमध्य से रोक क्यों हटाई?
DGS ने 26 जून 2026 को जारी सर्कुलर में रोक हटाने की घोषणा की, क्योंकि IMO और संबंधित एजेंसियों ने फंसे नाविकों की सुरक्षित निकासी के लिए एक समन्वित व्यवस्था स्थापित कर ली है। हालाँकि, सभी पक्षों को सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य रूप से करना होगा।
भारतीय जहाजों के कप्तानों को क्या निर्देश दिए गए हैं?
कप्तानों को सुरक्षा एजेंसियों की चेतावनियों पर लगातार नज़र रखने, जहाज सुरक्षा के सभी मानक नियमों का पालन करने और किसी भी घटना की सूचना तुरंत DG कम्युनिकेशन सेंटर और क्रू ब्रांच को देने के निर्देश दिए गए हैं।
क्या भारतीय जहाज मालिक अब फारस की खाड़ी में बिना किसी रोक के काम कर सकते हैं?
हाँ, DGS ने स्पष्ट किया है कि भारतीय जहाज मालिकों, प्रबंधन कंपनियों और RPSL एजेंसियों पर फारस की खाड़ी में संचालन या नाविकों की तैनाती पर कोई प्रतिबंध नहीं है। बस उन्हें तटीय देशों और सुरक्षा एजेंसियों के दिशानिर्देशों का पालन करना होगा।
IMO, UKMTO और MICA सेंटर की इसमें क्या भूमिका है?
ये तीनों एजेंसियाँ तटीय देशों के साथ मिलकर होर्मुज क्षेत्र में फंसे नाविकों की सुरक्षित निकासी के लिए एक समन्वित व्यवस्था चला रही हैं। DGS इन एजेंसियों के साथ-साथ भारतीय नौसेना और विदेश मंत्रालय के साथ भी लगातार संपर्क में है।
सोशल मीडिया पर जहाजों से जुड़ी खबरों के बारे में क्या सलाह दी गई है?
DGS ने सभी संबंधित पक्षों को सलाह दी है कि जहाजों से जुड़ी किसी भी सुरक्षा घटना की खबरें, वीडियो या सामग्री को पहले सरकारी और आधिकारिक स्रोतों से सत्यापित करें। बिना पुष्टि वाली खबरें या संदिग्ध वीडियो साझा करने से बचें।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 4 महीने पहले