अरुणाचल बनेगा भारत का हाइड्रोपावर हब: ₹52,000 करोड़ की 5 नई परियोजनाओं को मंजूरी, 4,000 MW बिजली का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
अरुणाचल प्रदेश भारत के प्रमुख जलविद्युत केंद्र के रूप में तेज़ी से उभर रहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, राज्य में पाँच अतिरिक्त जलविद्युत परियोजनाओं के लिए ₹52,000 करोड़ से अधिक के निवेश को मंजूरी दी गई है, जिनसे लगभग 4,000 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पन्न होने की उम्मीद है। इसके साथ ही, ₹30,071 करोड़ की लागत से विकसित 2,000 मेगावाट की सुबनसिरी लोअर हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजना की चार इकाइयाँ चालू हो चुकी हैं और शेष इकाइयों के भी शीघ्र शुरू होने की संभावना है।
सुबनसिरी परियोजना: मील का पत्थर
सुबनसिरी लोअर हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजना वर्षों की देरी और विवादों के बाद अब परिचालन चरण में प्रवेश कर चुकी है। अधिकारियों ने 11 अक्टूबर को बताया कि इसकी चार उत्पादन इकाइयाँ सफलतापूर्वक चालू कर दी गई हैं। यह परियोजना असम और अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित है और पूर्वोत्तर की सबसे बड़ी पनबिजली योजनाओं में से एक मानी जाती है। गौरतलब है कि इस परियोजना को पर्यावरण और स्थानीय विरोध की वजह से लंबे समय तक अवरोध का सामना करना पड़ा था।
नई परियोजनाओं की मंजूरी और ऊर्जा लक्ष्य
मुख्यमंत्री पेमा खांडू की अध्यक्षता में हुई अरुणाचल प्रदेश कैबिनेट की बैठक में पाँच नई जलविद्युत परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई। इन परियोजनाओं से उत्पन्न होने वाली 4,000 मेगावाट की अतिरिक्त क्षमता भारत की स्वच्छ ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं को बल देगी और देश के नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य की दिशा में अहम योगदान देगी। यह ऐसे समय में आया है जब भारत 2070 तक कार्बन तटस्थता हासिल करने की अपनी प्रतिबद्धता को व्यावहारिक रूप देने में जुटा है।
बुनियादी ढाँचे और सीमावर्ती विकास की उपलब्धियाँ
कैबिनेट बैठक में राज्य की अन्य बुनियादी ढाँचागत उपलब्धियों पर भी संतोष व्यक्त किया गया। सेला और नेचीफू सुरंगों ने हर मौसम में बेहतर संपर्क सुविधा प्रदान की है और रणनीतिक आवाजाही को मज़बूत किया है। राज्य का पहला ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा डोनी पोलो एयरपोर्ट सालाना 10 लाख यात्रियों को संभालने में सक्षम है, जबकि तेजू हवाई अड्डे को नए टर्मिनल भवन के साथ उन्नत किया गया है।
वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम के पहले चरण में 11 जिलों के 455 गाँवों का चयन किया गया है और 126 सीमावर्ती गाँवों को जोड़ने के लिए ₹2,205 करोड़ की लागत से 1,022 किलोमीटर लंबी सड़कों को मंजूरी मिली है। दूसरे चरण में म्यांमार और भूटान सीमा से लगे 122 और गाँवों को शामिल किया गया है।
जनकल्याण योजनाओं में शत-प्रतिशत संतृप्ति
राज्य ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 100 प्रतिशत संतृप्ति हासिल की है, जिससे 8.57 लाख से अधिक लाभार्थियों को लाभ मिला है। लगभग 55,000 परिवारों को महिलाओं के नाम पर पक्के मकान दिए गए हैं और 2.28 लाख घरों को नल के ज़रिए पेयजल कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है। अरुणाचल प्रदेश जल जीवन मिशन के तहत 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने वाला पूर्वोत्तर का पहला राज्य बन गया है।
2.26 लाख से अधिक परिवार आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) और मुख्यमंत्री आरोग्य अरुणाचल योजना (CMAAY) के दायरे में हैं, जिनके तहत प्रति परिवार सालाना ₹5 लाख तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध है। राज्य के 1.14 लाख से अधिक किसानों को PM-किसान योजना के तहत बैंक खातों में ₹150 करोड़ से अधिक की राशि सीधे भेजी गई है।
सांस्कृतिक संरक्षण और आगे की राह
राज्य के 20 स्वदेशी उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग मिल चुके हैं। केंद्रीय बजट 2026-27 में अरुणाचल प्रदेश समेत पूर्वोत्तर के छह राज्यों में बौद्ध पर्यटन सर्किट विकसित करने की योजना घोषित की गई है। राज्यों को पूँजी निवेश के लिए विशेष सहायता योजना के तहत अरुणाचल प्रदेश को 'प्राइड ऑफ हिल्स' घटक के अंतर्गत ₹4,900 करोड़ आवंटित किए गए हैं।
राज्य कैबिनेट ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए संकल्प लिया कि ऊर्जा, बुनियादी ढाँचे और जन-कल्याण के क्षेत्र में यह प्रगति जारी रहेगी।