क्लाइड क्रैस्टो का भाजपा पर पलटवार: खड़गे से माफी माँगने से पहले खुद का आचरण देखे भाजपा
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के राष्ट्रीय प्रवक्ता क्लाइड क्रैस्टो ने 26 अक्टूबर 2026 को मुंबई में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई टिप्पणी पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा माफी की माँग को सिरे से खारिज करते हुए पलटवार किया। क्रैस्टो ने कहा कि भाजपा को दूसरों से माफी माँगने की अपेक्षा करने से पहले अपने स्वयं के बयानों पर आत्मचिंतन करना चाहिए। इस बयान के साथ ही उन्होंने सुल्तानपुर कोर्ट से राहुल गांधी को मिली राहत, मंत्री नितेश राणे के विवादित बयानों और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के कानून-व्यवस्था संबंधी दावों पर भी अपनी तीखी प्रतिक्रिया दर्ज कराई।
खड़गे-विवाद और भाजपा पर पलटवार
क्रैस्टो ने स्वीकार किया कि किसी भी व्यक्ति के बारे में बोलते समय भाषा और व्यवहार की मर्यादा का पालन होना आवश्यक है। उन्होंने कहा, 'राजनीतिक विरोध के बावजूद सीमाओं का ध्यान रखना ज़रूरी है।' साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा ने अतीत में राहुल गांधी और सोनिया गांधी के विरुद्ध कई ऐसी टिप्पणियाँ कीं जो उचित नहीं थीं। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों की तैयारी के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप अपने चरम पर हैं।
राहुल गांधी को अदालत से राहत पर प्रतिक्रिया
सुल्तानपुर कोर्ट से राहुल गांधी को मिली राहत पर क्रैस्टो ने न्यायपालिका में अपना दृढ़ विश्वास जताया। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था सर्वोच्च है और देश के प्रत्येक नागरिक को न्याय पाने का समान अधिकार है। भाजपा पर 'फर्जी नैरेटिव' बनाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि अदालतें सही और गलत के बीच अंतर करने में सक्षम हैं।
नितेश राणे के बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया
मंत्री नितेश राणे के हालिया बयानों को क्रैस्टो ने 'सुर्खियाँ बटोरने की कोशिश' बताते हुए कहा कि इन्हें गंभीरता से लेने की आवश्यकता नहीं है। उनके अनुसार, राणे राजनीतिक लाभ के लिए किसी विशेष समुदाय या समाज के वर्ग को निशाना बनाने की कोशिश करते हैं। क्रैस्टो ने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि देश के हर नागरिक को जीने और अपना व्यवसाय करने का अधिकार है, जिसका मानवीय आधार पर सम्मान होना चाहिए।
फडणवीस के कानून-व्यवस्था दावों पर सवाल
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के महाराष्ट्र और मुंबई को 'सुरक्षित' बताने वाले दावों को क्रैस्टो ने 'फर्जी नैरेटिव' करार दिया। उन्होंने सार्वजनिक स्थानों पर हथियारबंद व्यक्तियों के घूमने, टाइगर श्रॉफ पर हमले, कल्याण में डांडिया कार्यक्रम के दौरान तलवार लेकर घूमने वाले युवकों और पुणे में कोयता गैंग की सक्रियता जैसी घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने सवाल किया कि यदि राज्य सचमुच सुरक्षित है, तो ये घटनाएँ किस बात का संकेत देती हैं? गौरतलब है कि यह आलोचना ऐसे समय में आई है जब राज्य सरकार कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर विपक्ष के निशाने पर है।
आगे का राजनीतिक परिदृश्य
क्रैस्टो के इन बयानों ने महाराष्ट्र की राजनीति में महायुति और महाविकास आघाड़ी के बीच बढ़ती खाई को एक बार फिर उजागर किया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की ओर से यह आक्रामक रुख आने वाले राजनीतिक संघर्षों की दिशा तय करने वाला संकेत माना जा रहा है।