ओलावृष्टि से ढाई-तीन हजार बीघा फसल बर्बाद, SP सांसद नदवी ने माँगा मुआवजा; 2027 में अखिलेश सरकार का दावा
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (SP) के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने 26 अक्टूबर 2026 को रामपुर में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बिलासपुर चीनी मिल के निकट फूलसुंसा गाँव में ओलावृष्टि से ढाई से तीन हजार बीघा कृषि भूमि पर धान और गन्ने की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है। उन्होंने सरकार और जिलाधिकारी को पत्र लिखकर तत्काल जाँच और पूर्ण मुआवजे की माँग की है। नदवी ने साथ ही दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी की सरकार बनेगी।
ओलावृष्टि से फसलों का नुकसान
नदवी ने बताया कि वे एक मेले में शिरकत के बाद फूलसुंसा गाँव पहुँचे, जहाँ ओलावृष्टि के कारण धान की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है और गन्ने की खेती को भी गंभीर क्षति पहुँची है। उनके अनुसार प्रभावित क्षेत्र ढाई से तीन हजार बीघा से अधिक है। उन्होंने कहा कि किसानों की मेहनत और पसीने की एक-एक बूँद का हिसाब होना चाहिए, क्योंकि देश को अनाज उपलब्ध कराने में किसान की केंद्रीय भूमिका है।
नदवी ने मीडिया के माध्यम से भी किसानों के नुकसान की भरपाई की अपील की और कहा कि यदि समय पर मुआवजा नहीं मिला तो वे इस मुद्दे को और आगे ले जाएंगे।
जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्रसंघ बहाली की माँग
सांसद नदवी ने जामिया मिलिया इस्लामिया में जारी धरने का समर्थन करते हुए कहा कि आंदोलन का प्रमुख उद्देश्य छात्रसंघ की बहाली है। उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति से अपील की कि विद्यार्थियों को विश्वास में लेकर छात्रसंघ जल्द बहाल किया जाए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब दिल्ली विश्वविद्यालय और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में छात्रसंघ चुनाव होते हैं, तो जामिया के साथ अलग व्यवहार क्यों है।
नदवी ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे का वे कानूनी प्रक्रिया के तहत सामना करेंगे और छात्रों के अधिकारों के लिए देश के किसी भी विश्वविद्यालय में आवाज उठाने से नहीं हिचकेंगे।
आजम खान के विश्वविद्यालय पर ईडी कार्रवाई
वरिष्ठ सपा नेता आजम खान के विश्वविद्यालय पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई के बारे में नदवी ने आरोप लगाया कि उन पर दर्ज मामले राजनीतिक प्रकृति के हैं। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी विपक्षी नेताओं के खिलाफ ईडी, सीबीआई और अन्य केंद्रीय एजेंसियों का उपयोग करती है। गौरतलब है कि नदवी ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर का हवाला देते हुए कहा कि अधिकारों की आवाज उठाने पर भी मुकदमे दर्ज हो सकते हैं। उन्होंने अदालत में विचाराधीन मामलों पर सीधी टिप्पणी करने से परहेज किया।
कानून-व्यवस्था और राजनीतिक बदलाव का दावा
नदवी ने उत्तर प्रदेश और देश की कानून-व्यवस्था पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार का प्रशासनिक तंत्र विफल हो चुका है। उन्होंने मॉब लिंचिंग की घटनाओं, गरीबों को स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित रखे जाने और शिक्षा व्यवस्था की खामियों का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि जनता इन मुद्दों को याद रख रही है और 2027 में अखिलेश यादव के नेतृत्व में सरकार बनाने का मन बना चुकी है।
असदुद्दीन ओवैसी के उत्तर प्रदेश की राजनीति पर प्रभाव के सवाल पर नदवी ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि यहाँ आलम और टांडे की बिरयानी अधिक पसंद की जाती है और ओवैसी की हैदराबादी बिरयानी उत्तर प्रदेश में नहीं चलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान और कानून धर्म बदलने की अनुमति देते हैं तथा भाजपा सरकार के दौर में अल्पसंख्यकों, दलितों और अन्य समुदायों के अधिकार कमजोर किए जा रहे हैं — हालाँकि ये उनके अपने आरोप हैं। नदवी ने अंत में कहा कि गांधी के देश में सत्य और अधिकारों की जीत अवश्य होगी।