27 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

एशियन पैरा गेम्स 2026: नवदीप, अजीत और दिलीप का स्वागत, दिलीप ने अधिकारियों की गैरहाज़िरी पर जताई पीड़ा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
एशियन पैरा गेम्स 2026: नवदीप, अजीत और दिलीप का स्वागत, दिलीप ने अधिकारियों की गैरहाज़िरी पर जताई पीड़ा

सारांश

जापान से पदक लेकर लौटे तीन पैरा-एथलीट्स — नवदीप, अजीत और दिलीप — का दिल्ली में ढोल-नगाड़ों से स्वागत हुआ। लेकिन डबल गोल्ड मेडलिस्ट दिलीप गावित का दर्द साफ था: 'सरकार या खेल प्राधिकरण का कोई प्रतिनिधि स्वागत के लिए नहीं आया।' यह एक बड़े सवाल की ओर इशारा है।

मुख्य बातें

नवदीप सिंह ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में पुरुषों की भाला फेंक F40/F41 श्रेणी में कांस्य पदक जीता।
अजीत यादव ने भाला फेंक F46 स्पर्धा में रजत पदक जीता; आखिरी थ्रो में मामूली अंतर से स्वर्ण चूका।
दिलीप गावित ने 100 मीटर और 400 मीटर (T47) में दो स्वर्ण पदक जीते।
दिलीप ने कहा कि स्वागत के लिए सरकार या खेल प्राधिकरण का कोई प्रतिनिधि नहीं आया — दिल्ली-हरियाणा की तुलना में उपेक्षा उजागर की।
नवदीप ने जापान में ट्रेनिंग स्थल तक रोज़ाना 40 मिनट की यात्रा और होटल में जिम की सुविधा न होने की बात कही।

जापान में आयोजित एशियन पैरा गेम्स 2026 से पदक जीतकर स्वदेश लौटे पैरा-एथलीट नवदीप सिंह, अजीत यादव और दिलीप गावित का नई दिल्ली में ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत किया गया। तीनों खिलाड़ियों ने अपने जापान के अनुभव और देश वापसी की भावनाएँ साझा कीं — लेकिन डबल गोल्ड मेडलिस्ट दिलीप गावित ने एक तीखी बात भी कही जो ध्यान खींचती है।

नवदीप सिंह: कांस्य पदक और जापान का अलग अनुभव

पुरुषों की भाला फेंक F40/F41 श्रेणी में कांस्य पदक जीतने वाले नवदीप सिंह ने भारत लौटकर खुशी ज़ाहिर की। उन्होंने बताया कि जापान में इस बार खेलों का आयोजन पारंपरिक ढाँचे से काफी अलग था।

नवदीप ने कहा, 'जापान में प्रबंधन थोड़ा अलग था। हमें एक अलग तरीके से खेलों में हिस्सा लेने की आदत है। आमतौर पर पूरा गेम्स विलेज होता है, लेकिन इस बार व्यवस्था काफी अलग थी। खिलाड़ियों के ठहरने और ट्रेनिंग के स्थान अलग-अलग थे। ट्रेनिंग के लिए रोज़ाना करीब 40 मिनट दूर जाना पड़ता था। होटल में जिम की सुविधा भी नहीं थी।' उन्होंने कहा कि अब वे दीपावली परिवार के साथ मनाएँगे और देशवासियों को त्योहार की शुभकामनाएँ भी दीं।

अजीत यादव: रजत पदक और रोमांचक मुकाबले की दास्तान

पुरुषों की भाला फेंक F46 स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाले अजीत यादव ने अपने प्रदर्शन पर संतोष जताया। उन्होंने कहा, 'जीतने के बाद बहुत मज़ा आया। जिस तरह से स्वागत हुआ, ढोल-नगाड़े बजे और सम्मान समारोह हुआ, उससे खुशी दोगुनी हो गई।'

अजीत ने बताया कि यह जापान में उनका तीसरा टूर्नामेंट था — इससे पहले वे दो बार टोक्यो पैरालंपिक और एक बार विश्व चैंपियनशिप में वहाँ खेल चुके हैं। भाला फेंक का फाइनल मुकाबला काफी कड़ा रहा — आखिरी थ्रो में उनके प्रतिद्वंद्वी ने मामूली अंतर से स्वर्ण पदक अपने नाम किया। अजीत ने कहा कि बड़े मुकाबलों में मानसिक और मनोवैज्ञानिक चुनौतियाँ खेल का अभिन्न हिस्सा हैं और यही चुनौतियाँ खिलाड़ियों को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए प्रेरित करती हैं।

दिलीप गावित: डबल गोल्ड के बाद भी मन में पीड़ा

पुरुषों की 100 मीटर और 400 मीटर (T47 स्पर्धा) में देश के लिए दो स्वर्ण पदक जीतने वाले दिलीप गावित ने खुशी और पीड़ा दोनों एक साथ व्यक्त कीं।

दिलीप ने कहा, 'मुझे बहुत खुशी भी हो रही है और दुख भी। खुशी इसलिए क्योंकि हमने कुछ हासिल किया है, लेकिन दुख इसलिए क्योंकि जब भी एथलीट दिल्ली या हरियाणा जैसी जगहों पर जाते हैं तो वहाँ ढोल-नगाड़ों और जश्न के साथ उनका स्वागत किया जाता है। लेकिन यहाँ, हमारा स्वागत करने के लिए सरकार या खेल प्राधिकरण का कोई प्रतिनिधि नहीं आया। कोई भी नहीं आया।'

यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पहली बार नहीं है जब पैरा-एथलीट्स ने आधिकारिक उपेक्षा का मुद्दा उठाया हो। गौरतलब है कि पैरा-खेलों को अभी भी मुख्यधारा के खेल आयोजनों जितनी संस्थागत सहायता नहीं मिल पाती।

पैरा-खेलों में भारत की यात्रा और आगे की राह

भारत ने हाल के वर्षों में पैरा-खेलों में उल्लेखनीय प्रगति की है। नवदीप सिंह, अजीत यादव और दिलीप गावित जैसे एथलीट देश को अंतरराष्ट्रीय मंच पर गौरव दिला रहे हैं। लेकिन दिलीप के बयान ने एक ज़रूरी सवाल खड़ा किया है — क्या सरकारी तंत्र इन एथलीट्स की उपलब्धियों को वह सम्मान दे रहा है जिसके वे हकदार हैं? आने वाले समय में यह देखना होगा कि खेल मंत्रालय और संबंधित प्राधिकरण इस मुद्दे पर क्या कदम उठाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह खेल प्राधिकरणों की प्राथमिकताओं पर सवाल है। ओलंपिक और पैरालंपिक विजेताओं के स्वागत में जो असमानता दिखती है, वह सिर्फ भावनात्मक नहीं — यह नीतिगत उदासीनता का प्रतिबिंब है। भारत पैरा-खेलों में पदक तालिका बेहतर करना चाहता है, तो एथलीटों के मनोबल को सरकारी उपस्थिति और सम्मान से जोड़ना अनिवार्य है।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारत के किन एथलीट्स ने पदक जीते?
नवदीप सिंह ने भाला फेंक F40/F41 में कांस्य, अजीत यादव ने भाला फेंक F46 में रजत, और दिलीप गावित ने 100 मीटर व 400 मीटर T47 स्पर्धाओं में दो स्वर्ण पदक जीते।
दिलीप गावित ने सरकारी उपेक्षा को लेकर क्या कहा?
दिलीप गावित ने कहा कि उनके स्वागत के लिए सरकार या खेल प्राधिकरण का कोई प्रतिनिधि नहीं आया। उन्होंने दिल्ली और हरियाणा में एथलीट्स को मिलने वाले जश्न भरे स्वागत से तुलना करते हुए निराशा जताई।
अजीत यादव स्वर्ण पदक से क्यों चूक गए?
अजीत यादव के अनुसार, भाला फेंक F46 का फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक रहा और आखिरी थ्रो में उनके प्रतिद्वंद्वी ने मामूली अंतर से स्वर्ण पदक हासिल किया। अजीत ने रजत पदक जीता।
नवदीप सिंह ने जापान में खेलों की व्यवस्था के बारे में क्या बताया?
नवदीप सिंह ने बताया कि इस बार जापान में कोई केंद्रीय गेम्स विलेज नहीं था — खिलाड़ियों के ठहरने और ट्रेनिंग के स्थान अलग-अलग थे। ट्रेनिंग के लिए रोज़ाना करीब 40 मिनट दूर जाना पड़ता था और होटल में जिम की सुविधा भी नहीं थी।
एशियन पैरा गेम्स 2026 कहाँ आयोजित हुए?
एशियन पैरा गेम्स 2026 का आयोजन जापान में हुआ। भारतीय पैरा-एथलीट्स पदक जीतकर 26 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली लौटे।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 4 दिन पहले
  3. 5 दिन पहले
  4. 5 दिन पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 1 साल पहले