एशियन पैरा गेम्स 2026: नवदीप, अजीत और दिलीप का स्वागत, दिलीप ने अधिकारियों की गैरहाज़िरी पर जताई पीड़ा
सारांश
मुख्य बातें
जापान में आयोजित एशियन पैरा गेम्स 2026 से पदक जीतकर स्वदेश लौटे पैरा-एथलीट नवदीप सिंह, अजीत यादव और दिलीप गावित का नई दिल्ली में ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत किया गया। तीनों खिलाड़ियों ने अपने जापान के अनुभव और देश वापसी की भावनाएँ साझा कीं — लेकिन डबल गोल्ड मेडलिस्ट दिलीप गावित ने एक तीखी बात भी कही जो ध्यान खींचती है।
नवदीप सिंह: कांस्य पदक और जापान का अलग अनुभव
पुरुषों की भाला फेंक F40/F41 श्रेणी में कांस्य पदक जीतने वाले नवदीप सिंह ने भारत लौटकर खुशी ज़ाहिर की। उन्होंने बताया कि जापान में इस बार खेलों का आयोजन पारंपरिक ढाँचे से काफी अलग था।
नवदीप ने कहा, 'जापान में प्रबंधन थोड़ा अलग था। हमें एक अलग तरीके से खेलों में हिस्सा लेने की आदत है। आमतौर पर पूरा गेम्स विलेज होता है, लेकिन इस बार व्यवस्था काफी अलग थी। खिलाड़ियों के ठहरने और ट्रेनिंग के स्थान अलग-अलग थे। ट्रेनिंग के लिए रोज़ाना करीब 40 मिनट दूर जाना पड़ता था। होटल में जिम की सुविधा भी नहीं थी।' उन्होंने कहा कि अब वे दीपावली परिवार के साथ मनाएँगे और देशवासियों को त्योहार की शुभकामनाएँ भी दीं।
अजीत यादव: रजत पदक और रोमांचक मुकाबले की दास्तान
पुरुषों की भाला फेंक F46 स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाले अजीत यादव ने अपने प्रदर्शन पर संतोष जताया। उन्होंने कहा, 'जीतने के बाद बहुत मज़ा आया। जिस तरह से स्वागत हुआ, ढोल-नगाड़े बजे और सम्मान समारोह हुआ, उससे खुशी दोगुनी हो गई।'
अजीत ने बताया कि यह जापान में उनका तीसरा टूर्नामेंट था — इससे पहले वे दो बार टोक्यो पैरालंपिक और एक बार विश्व चैंपियनशिप में वहाँ खेल चुके हैं। भाला फेंक का फाइनल मुकाबला काफी कड़ा रहा — आखिरी थ्रो में उनके प्रतिद्वंद्वी ने मामूली अंतर से स्वर्ण पदक अपने नाम किया। अजीत ने कहा कि बड़े मुकाबलों में मानसिक और मनोवैज्ञानिक चुनौतियाँ खेल का अभिन्न हिस्सा हैं और यही चुनौतियाँ खिलाड़ियों को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए प्रेरित करती हैं।
दिलीप गावित: डबल गोल्ड के बाद भी मन में पीड़ा
पुरुषों की 100 मीटर और 400 मीटर (T47 स्पर्धा) में देश के लिए दो स्वर्ण पदक जीतने वाले दिलीप गावित ने खुशी और पीड़ा दोनों एक साथ व्यक्त कीं।
दिलीप ने कहा, 'मुझे बहुत खुशी भी हो रही है और दुख भी। खुशी इसलिए क्योंकि हमने कुछ हासिल किया है, लेकिन दुख इसलिए क्योंकि जब भी एथलीट दिल्ली या हरियाणा जैसी जगहों पर जाते हैं तो वहाँ ढोल-नगाड़ों और जश्न के साथ उनका स्वागत किया जाता है। लेकिन यहाँ, हमारा स्वागत करने के लिए सरकार या खेल प्राधिकरण का कोई प्रतिनिधि नहीं आया। कोई भी नहीं आया।'
यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पहली बार नहीं है जब पैरा-एथलीट्स ने आधिकारिक उपेक्षा का मुद्दा उठाया हो। गौरतलब है कि पैरा-खेलों को अभी भी मुख्यधारा के खेल आयोजनों जितनी संस्थागत सहायता नहीं मिल पाती।
पैरा-खेलों में भारत की यात्रा और आगे की राह
भारत ने हाल के वर्षों में पैरा-खेलों में उल्लेखनीय प्रगति की है। नवदीप सिंह, अजीत यादव और दिलीप गावित जैसे एथलीट देश को अंतरराष्ट्रीय मंच पर गौरव दिला रहे हैं। लेकिन दिलीप के बयान ने एक ज़रूरी सवाल खड़ा किया है — क्या सरकारी तंत्र इन एथलीट्स की उपलब्धियों को वह सम्मान दे रहा है जिसके वे हकदार हैं? आने वाले समय में यह देखना होगा कि खेल मंत्रालय और संबंधित प्राधिकरण इस मुद्दे पर क्या कदम उठाते हैं।