एशियन पैरा गेम्स 2026: दिलीप गावित ने 100 मीटर टी47 में जीता गोल्ड, बेसिल को सिल्वर — भारत की ऐतिहासिक 1-2 जीत
सारांश
मुख्य बातें
नागोया में जारी एशियन पैरा गेम्स 2026 की पैरा एथलेटिक्स स्पर्धा में भारत ने 21 अक्टूबर को शानदार दोहरी कामयाबी दर्ज की। दिलीप गावित ने पुरुषों की 100 मीटर टी47 स्पर्धा में 10.69 सेकंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया, जबकि मोहम्मद बेसिल मोर्सिंगनाकाथी ने 10.72 सेकंड के साथ रजत पदक जीता और इस दौड़ में नया गेम्स रिकॉर्ड भी स्थापित किया।
मुख्य घटनाक्रम
दिलीप गावित (टी46 कैटेगरी) और बेसिल मोर्सिंगनाकाथी (टी47 कैटेगरी) ने मिलकर इस स्पर्धा में भारत की 1-2 की यादगार जीत सुनिश्चित की। बेसिल का 10.72 सेकंड का समय इस इवेंट में नया गेम्स रिकॉर्ड रहा, जो उनके शानदार फॉर्म की गवाही देता है।
गौरतलब है कि यह जोड़ी पहले भी इसी अंदाज़ में मैदान फतह कर चुकी है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भी दिलीप गावित ने मेंस 100 मीटर टी47 इवेंट में गेम्स रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता था, जबकि बेसिल ने रजत पदक हासिल कर भारत के लिए उसी तरह की 1-2 की जीत पक्की की थी।
दिलीप गावित का सफर और पृष्ठभूमि
महाराष्ट्र के नासिक के निकट तोरण डोंगारी गाँव में एक साधारण किसान परिवार में जन्मे दिलीप गावित की कहानी असाधारण साहस की मिसाल है। 5-6 साल की उम्र में एक पेड़ से गिरने से उनके दाहिने हाथ में गंभीर चोट लगी। समय पर इलाज न मिल पाने के कारण घाव में गैंग्रीन हो गया, जिसके चलते कोहनी के नीचे से हाथ काटना पड़ा।
इस बड़े झटके को गावित ने अपनी राह में रोड़ा नहीं बनने दिया। गाँव की धूल भरी सड़कों पर अभ्यास करते हुए उनकी प्रतिभा को कोच वैजनाथ काले ने पहचाना और उन्हें पेशेवर पैरा-एथलेटिक्स की दिशा दिखाई।
पिछले प्रदर्शन और उपलब्धियाँ
एशियन पैरा गेम्स 2022 में गावित ने मेंस 400 मीटर टी47 इवेंट में स्वर्ण पदक जीता था, जो उन खेलों में भारत का ऐतिहासिक 100वाँ पदक था। इसके अलावा, उन्होंने पेरिस 2024 पैरालंपिक्स में पुरुषों की 400 मीटर टी47 स्पर्धा के फाइनल में जगह बनाकर भी देश का मान बढ़ाया।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अंतरराष्ट्रीय पैरा-एथलेटिक्स में अपनी उपस्थिति लगातार मज़बूत कर रहा है। गावित जैसे एथलीट न केवल पदक जीत रहे हैं, बल्कि गेम्स रिकॉर्ड जैसे मानक भी स्थापित कर रहे हैं।
आम जनता पर असर
पैरा-एथलेटिक्स में इस तरह की सफलताएँ देशभर के दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनती हैं। किसान परिवार की पृष्ठभूमि से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गेम्स रिकॉर्ड बनाना यह दर्शाता है कि सही कोचिंग और समर्थन मिले तो प्रतिभा किसी भी परिस्थिति में निखर सकती है।
क्या होगा आगे
नागोया में एशियन पैरा गेम्स के शेष दिनों में भारतीय पैरा-एथलेटिक्स दल से और पदकों की उम्मीद है। गावित और बेसिल की यह जोड़ी अगली स्पर्धाओं में भी भारत की पदक तालिका को समृद्ध करने की क्षमता रखती है।