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एशियन पैरा गेम्स 2026: प्रणव देसाई ने 100 मीटर टी64 में जीता ब्रॉन्ज, भारत का जलवा

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एशियन पैरा गेम्स 2026: प्रणव देसाई ने 100 मीटर टी64 में जीता ब्रॉन्ज, भारत का जलवा

सारांश

ठाणे के प्रणव देसाई ने नागोया में 11.96 सेकंड के साथ ब्रॉन्ज जीतकर 2022 की चौथे स्थान की कमी को पूरा किया। उसी दिन दिलीप गावित और बासिल मोर्सिंगनाकाथी ने 100 मीटर टी47 में गोल्ड-सिल्वर की जोड़ी बनाई — कॉमनवेल्थ 2026 की सफलता को एशियन पैरा गेम्स में दोहराते हुए।

मुख्य बातें

प्रणव देसाई ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में 100 मीटर टी64 स्पर्धा में 11.96 सेकंड के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता।
2022 में 11.91 सेकंड के साथ चौथे स्थान पर रहे प्रणव ने इस बार 0.05 सेकंड के अंतर से रैंकिंग में सुधार किया।
दिलीप गावित महादु ने 100 मीटर टी47 में 10.69 सेकंड के साथ गोल्ड मेडल जीता।
मोहम्मद बासिल मोर्सिंगनाकाथी ने 10.72 सेकंड के साथ सिल्वर और नया 'गेम्स रिकॉर्ड' बनाया।
दिलीप गावित और बासिल ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की गोल्ड-सिल्वर जोड़ी को नागोया में भी दोहराया।

एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारत के प्रणव देसाई ने 21 अक्टूबर 2026 को नागोया में पुरुषों की 100 मीटर टी64 स्पर्धा में 11.96 सेकंड का समय निकालकर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि एशियन पैरा गेम्स 2022 में प्रणव 11.91 सेकंड के समय के बावजूद चौथे स्थान पर रहे थे — यानी इस बार उन्होंने केवल 0.05 सेकंड के अंतर से पदक तालिका में एक स्थान की छलाँग लगाई।

प्रणव देसाई: संघर्ष से पदक तक

महाराष्ट्र के ठाणे के रहने वाले प्रणव देसाई जन्म से ही दाहिने पैर के घुटने के नीचे से अंग-विहीन (एम्प्यूटी) हैं। वे साल 2017 से पैरा खेलों में सक्रिय हैं और 100 मीटर तथा 200 मीटर टी64 स्प्रिंट स्पर्धाओं में माहिर माने जाते हैं। कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर वे लगातार अपनी सीमाओं को पार करते हुए भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

गौरतलब है कि टी64 खेल वर्ग उन एथलीटों के लिए होता है जिनके निचले अंग प्रभावित होते हैं और जो कृत्रिम अंग (प्रोस्थेसिस) की सहायता से प्रतिस्पर्धा करते हैं — इसमें अंग की कमी या दोनों पैरों की लंबाई में असमानता वाले खिलाड़ी शामिल होते हैं।

भारत की दोहरी जीत: गोल्ड और सिल्वर भी भारत के नाम

उसी दिन पुरुषों की 100 मीटर टी47 स्पर्धा में भारत का दबदबा और भी स्पष्ट दिखा। दिलीप गावित महादु (टी46 श्रेणी) ने 10.69 सेकंड के शानदार समय के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि मोहम्मद बासिल मोर्सिंगनाकाथी (टी47 श्रेणी) ने 10.72 सेकंड के साथ सिल्वर मेडल हासिल किया। बासिल के इस प्रदर्शन ने स्पर्धा में एक नया 'गेम्स रिकॉर्ड' भी स्थापित किया।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की याद दिलाई

यह ऐसे समय में आया है जब इन दोनों खिलाड़ियों ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भी इसी स्पर्धा में क्रमशः गोल्ड और सिल्वर जीतकर भारत का परचम लहराया था — जहाँ दिलीप गावित ने गेम्स रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता था और बासिल मोर्सिंगनाकाथी ने रजत पदक हासिल किया था। एशियन पैरा गेम्स 2026 में उन्होंने अपनी उसी लय को बरकरार रखते हुए दोहरी जीत दर्ज की।

आगे की राह

भारतीय पैरा एथलेटिक्स टीम का यह प्रदर्शन दर्शाता है कि देश पैरा खेलों में एशिया स्तर पर एक मज़बूत शक्ति के रूप में उभर रहा है। प्रणव देसाई समेत इन खिलाड़ियों के आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में भाग लेने की संभावना है, जहाँ इनसे और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद लगाई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस सूक्ष्म अंतर में है — 2022 में 11.91 सेकंड पर चौथे स्थान से 2026 में 11.96 सेकंड पर तीसरे स्थान तक। यह दर्शाता है कि पैरा स्प्रिंट में प्रतिस्पर्धा का स्तर तेज़ी से बढ़ा है और थोड़े से समय का अंतर भी पदक और निराशा के बीच की रेखा तय करता है। दिलीप गावित और बासिल की कॉमनवेल्थ के बाद एशियन पैरा गेम्स में भी गोल्ड-सिल्वर जोड़ी यह संकेत देती है कि भारत टी47 श्रेणी में एशियाई वर्चस्व स्थापित कर रहा है — लेकिन इन एथलीटों को मिलने वाले इन्फ्रास्ट्रक्चर और प्रशिक्षण समर्थन पर मीडिया की नज़र उतनी गहरी नहीं होती जितनी होनी चाहिए।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रणव देसाई ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में कौन-सा पदक जीता?
प्रणव देसाई ने 21 अक्टूबर 2026 को नागोया में पुरुषों की 100 मीटर टी64 स्पर्धा में 11.96 सेकंड का समय निकालकर ब्रॉन्ज मेडल जीता। 2022 के एशियन पैरा गेम्स में वे 11.91 सेकंड के साथ चौथे स्थान पर रहे थे।
टी64 खेल वर्ग क्या होता है?
टी64 वर्ग उन पैरा एथलीटों के लिए है जिनके निचले अंग प्रभावित होते हैं और जो कृत्रिम अंग (प्रोस्थेसिस) की सहायता से प्रतिस्पर्धा करते हैं। इसमें अंग की कमी या दोनों पैरों की लंबाई में असमानता वाले खिलाड़ी शामिल होते हैं।
प्रणव देसाई कौन हैं और वे पैरा खेलों में कब से हैं?
प्रणव देसाई महाराष्ट्र के ठाणे के रहने वाले हैं और जन्म से ही दाहिने पैर के घुटने के नीचे से अंग-विहीन हैं। वे 2017 से पैरा खेलों में भाग ले रहे हैं और 100 मीटर व 200 मीटर टी64 स्प्रिंट स्पर्धाओं में विशेषज्ञता रखते हैं।
100 मीटर टी47 स्पर्धा में भारत ने क्या हासिल किया?
पुरुषों की 100 मीटर टी47 स्पर्धा में दिलीप गावित महादु ने 10.69 सेकंड के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि मोहम्मद बासिल मोर्सिंगनाकाथी ने 10.72 सेकंड के साथ सिल्वर मेडल हासिल किया और एक नया गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया।
क्या दिलीप गावित और बासिल ने पहले भी साथ मिलकर पदक जीते हैं?
हाँ, कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भी दिलीप गावित ने 100 मीटर टी47 में गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड और बासिल मोर्सिंगनाकाथी ने सिल्वर जीता था। एशियन पैरा गेम्स 2026 में उन्होंने इस उपलब्धि को दोहराया।
राष्ट्र प्रेस
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