21 अक्टूबर 2026
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एशियन पैरा गेम्स 2026: हिमांशु नंदन ने 400 मीटर फ्रीस्टाइल एस11 में जीता ब्रॉन्ज मेडल

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एशियन पैरा गेम्स 2026: हिमांशु नंदन ने 400 मीटर फ्रीस्टाइल एस11 में जीता ब्रॉन्ज मेडल

सारांश

हरियाणा के रोहतक के 22 वर्षीय दृष्टिहीन तैराक हिमांशु नंदन ने नागोया में एशियन पैरा गेम्स 2026 की 400 मीटर फ्रीस्टाइल एस11 स्पर्धा में 5:10.91 के समय से ब्रॉन्ज मेडल जीता — जूडो से तैराकी तक के सफर की एक और शानदार मंजिल।

मुख्य बातें

हिमांशु नंदन ने 20 अक्टूबर 2026 को नागोया में 400 मीटर फ्रीस्टाइल एस11 स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीता।
उन्होंने 5 मिनट 10.91 सेकंड का समय निकालकर पोडियम पर जगह बनाई; स्पर्धा में कुल चार तैराक थे।
नंदन 2024 में पेरिस पैरालंपिक का न्यूनतम योग्यता मानक हासिल करने वाले पहले भारतीय दृष्टिहीन तैराक बने थे।
रवि कार्तिक बुडिगिना 400 मीटर फ्रीस्टाइल एस13 में 5:41.70 के साथ पाँचवें स्थान पर रहे, एक दिन पहले उन्होंने सिल्वर मेडल जीता था।
नंदन ने 2021 में जूडो छोड़कर तैराकी अपनाई; उदयपुर 2022 में दो गोल्ड और राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाए।

भारतीय पैरा-तैराक हिमांशु नंदन ने 20 अक्टूबर 2026 को नागोया में जारी एशियन पैरा गेम्स 2026 में पुरुषों की 400 मीटर फ्रीस्टाइल एस11 स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। उन्होंने 5 मिनट 10.91 सेकंड का समय निकालकर पोडियम पर जगह बनाई। इस स्पर्धा में कुल चार तैराक शामिल थे।

मुख्य प्रदर्शन और स्पर्धा का विवरण

हरियाणा के रोहतक निवासी 22 वर्षीय नंदन ने पूल में अपनी बेहतरीन सहनशक्ति का प्रदर्शन करते हुए पदक सुनिश्चित किया। इससे ठीक एक दिन पहले, सोमवार 19 अक्टूबर को, वह पुरुषों की 100 मीटर बैकस्ट्रोक एस11 प्रतियोगिता में चौथे स्थान पर रहे थे और पदक से चूक गए थे। ऐसे में मंगलवार का यह पदक उनके और उनके प्रशंसकों के लिए विशेष रूप से संतोषजनक रहा।

हिमांशु नंदन: संघर्ष से सफलता तक

नंदन ऑप्टिक नर्व (दृष्टि तंत्रिका) की जन्मजात खराबी के कारण दृष्टिहीन हैं। एस11 क्लासिफिकेशन उन एथलीटों को दिया जाता है जिनकी दृष्टि लगभग पूर्णतः समाप्त हो चुकी हो। इस श्रेणी में प्रतिस्पर्धा करते हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना उनकी असाधारण दृढ़ता का प्रमाण है।

गौरतलब है कि नंदन ने अपना खेल करियर तैराकी से नहीं, बल्कि जूडो से शुरू किया था, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पदक भी जीते। 2021 में उन्होंने तैराकी की ओर रुख किया, और यह निर्णय उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।

राष्ट्रीय रिकॉर्ड और घरेलू उपलब्धियाँ

उदयपुर में आयोजित नेशनल चैंपियनशिप 2022 में नंदन ने दो गोल्ड मेडल जीते और 100 मीटर फ्रीस्टाइल एस11 में 1 मिनट 17 सेकंड का समय निकालकर राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित किया। उसी वर्ष गुवाहाटी में आयोजित चैंपियनशिप में उन्होंने तीन और गोल्ड मेडल जीते और नए राष्ट्रीय रिकॉर्ड दर्ज किए।

अंतरराष्ट्रीय करियर की ऊँचाइयाँ

2023 में एस11 श्रेणी का अंतरराष्ट्रीय क्लासिफिकेशन मिलने के बाद नंदन ने हांगझोऊ (चीन) में हुए एशियन पैरा गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया। 2024 में वह पेरिस पैरालंपिक के लिए न्यूनतम योग्यता मानक हासिल करने वाले पहले भारतीय दृष्टिहीन तैराक बने — यह उनके करियर का एक ऐतिहासिक पड़ाव था। इसके बाद सिंगापुर में आयोजित वर्ल्ड पैरा स्विमिंग चैंपियनशिप 2025 में वह दुनिया के शीर्ष तैराकों के बीच दो फाइनल तक पहुँचे।

अन्य भारतीय प्रदर्शन

इसी दिन भारत के रवि कार्तिक बुडिगिना पुरुषों की 400 मीटर फ्रीस्टाइल एस13 स्पर्धा में 5 मिनट 41.70 सेकंड के समय के साथ पाँचवें स्थान पर रहे। बुडिगिना ने इससे एक दिन पहले सोमवार को 100 मीटर फ्रीस्टाइल एस13 स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता था। एस13 क्लासिफिकेशन उन तैराकों के लिए होता है जिनकी दृष्टि बाधित तो है, परंतु एस11 की तुलना में दृष्टि दोष की गंभीरता अपेक्षाकृत कम होती है।

नागोया में भारतीय पैरा-तैराकों का यह प्रदर्शन आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में देश की उम्मीदों को और मजबूत करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिन्हें अब तक मुख्यधारा कवरेज में लगातार नजरअंदाज किया जाता रहा है। जूडो से तैराकी तक का उनका सफर और मात्र तीन वर्षों में राष्ट्रीय रिकॉर्ड से लेकर अंतरराष्ट्रीय फाइनल तक पहुँचना यह बताता है कि सही संसाधन और कोचिंग मिले तो प्रतिभा की कोई सीमा नहीं होती। सोमवार को चौथे स्थान पर रहने के बाद मंगलवार को पोडियम पर खड़े होना मानसिक दृढ़ता का प्रमाण है। सवाल यह है कि क्या भारत की खेल नीति इन एथलीटों को पर्याप्त दीर्घकालिक समर्थन देती है, या यह सफलताएँ अब भी व्यक्तिगत संघर्ष पर ही टिकी हैं।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिमांशु नंदन ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में कौन-सा पदक जीता?
हिमांशु नंदन ने 20 अक्टूबर 2026 को नागोया में पुरुषों की 400 मीटर फ्रीस्टाइल एस11 स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीता। उन्होंने 5 मिनट 10.91 सेकंड का समय निकालकर यह पदक हासिल किया।
एस11 क्लासिफिकेशन क्या होता है?
एस11 क्लासिफिकेशन उन पैरा-एथलीटों को दिया जाता है जिनकी दृष्टि लगभग पूरी तरह समाप्त हो चुकी होती है। हिमांशु नंदन जन्म से ही ऑप्टिक नर्व की खराबी के कारण दृष्टिहीन हैं और इसी वर्ग में प्रतिस्पर्धा करते हैं।
हिमांशु नंदन ने तैराकी कब शुरू की?
नंदन ने 2021 में तैराकी शुरू की, इससे पहले वे जूडो में राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत चुके थे। 2022 में उदयपुर और गुवाहाटी में हुई राष्ट्रीय चैंपियनशिप में उन्होंने पाँच गोल्ड मेडल और कई राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाए।
रवि कार्तिक बुडिगिना का एशियन पैरा गेम्स 2026 में प्रदर्शन कैसा रहा?
रवि कार्तिक बुडिगिना 400 मीटर फ्रीस्टाइल एस13 स्पर्धा में 5 मिनट 41.70 सेकंड के समय के साथ पाँचवें स्थान पर रहे। हालांकि एक दिन पहले 19 अक्टूबर को उन्होंने 100 मीटर फ्रीस्टाइल एस13 में सिल्वर मेडल जीता था।
हिमांशु नंदन की अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियाँ क्या-क्या हैं?
2023 में एस11 अंतरराष्ट्रीय क्लासिफिकेशन मिलने के बाद नंदन ने हांगझोऊ एशियन पैरा गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया। 2024 में वह पेरिस पैरालंपिक के लिए न्यूनतम योग्यता मानक हासिल करने वाले पहले भारतीय दृष्टिहीन तैराक बने और 2025 की वर्ल्ड पैरा स्विमिंग चैंपियनशिप में दो फाइनल तक पहुँचे।
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