30 जुलाई 2026
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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: दिलीप गावित का गोल्ड, कोच सत्यनारायण बोले — पैरा खेलों की सफलता सामान्य एथलीट्स को भी दे रही प्रेरणा

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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: दिलीप गावित का गोल्ड, कोच सत्यनारायण बोले — पैरा खेलों की सफलता सामान्य एथलीट्स को भी दे रही प्रेरणा

सारांश

ग्लासगो में भारत ने 100 मीटर टी47 में गोल्ड और सिल्वर दोनों जीते — दिलीप गावित ने गेम्स रिकॉर्ड तोड़ा, बासिल ने दूसरा स्थान पाया। कोच सत्यनारायण की रणनीतिक सोच और एक गाँव के लड़के के अदम्य हौसले ने भारतीय पैरा-एथलेटिक्स को नई पहचान दी।

मुख्य बातें

दिलीप महादू गावित ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुषों की 100 मीटर टी47 स्पर्धा में गेम्स रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता।
मोहम्मद बासिल मोरसिंगनाकाथी ने रजत पदक जीतकर भारत की 1-2 फिनिश सुनिश्चित की।
कोच सत्यनारायण शिमोगा ने दिलीप को 400 मीटर से 100 मीटर इवेंट में स्थानांतरित किया, जो निर्णायक साबित हुआ।
दिलीप ने 2022 एशियन पैरा गेम्स में भारत का 100वाँ ऐतिहासिक पदक जीता था और पेरिस 2024 पैरालंपिक के फाइनल तक पहुँचे थे।
दिलीप महाराष्ट्र के नासिक के पास तोरण डोंगरी के रहने वाले हैं; बचपन में दुर्घटना के कारण दाहिना हाथ काटना पड़ा था।

पैरा-एथलेटिक्स कोच सत्यनारायण शिमोगा ने 30 जुलाई 2026 को ग्लासगो में कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पैरा-एथलेटिक्स की ऐतिहासिक सफलता ने सामान्य एथलीट्स के मनोबल को भी ऊँचा किया है और उन्हें विश्व स्तर पर पदक जीतने का विश्वास दिलाया है। भारत ने पुरुषों की 100 मीटर टी47 स्पर्धा में गोल्ड और सिल्वर दोनों अपने नाम करते हुए शानदार 1-2 फिनिश दर्ज की।

मुख्य घटनाक्रम

दिलीप महादू गावित ने पुरुषों की 100 मीटर टी47 स्पर्धा में गेम्स रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि उनके हमवतन मोहम्मद बासिल मोरसिंगनाकाथी ने रजत पदक हासिल कर भारत का दबदबा सुनिश्चित किया। यह प्रदर्शन भारतीय पैरा-एथलेटिक्स की बढ़ती ताकत का प्रमाण है।

कोच की रणनीति और दूरदृष्टि

कोच सत्यनारायण ने बताया कि उन्होंने दिलीप को 400 मीटर से 100 मीटर इवेंट में स्थानांतरित किया, जो एक सोची-समझी रणनीतिक चाल साबित हुई। उन्होंने कहा, "मुझे उम्मीद थी कि दिलीप और बासिल पहले और दूसरे नंबर पर आएंगे, और ठीक वैसा ही हुआ। दिलीप पहले 400 मीटर रेस में दौड़ते थे, लेकिन मैंने उसे 100 मीटर में शिफ्ट कर दिया। मैंने उन्हें दुबई भेजा, जहां उन्होंने सीडब्ल्यूजी के लिए क्वालीफाई किया।"

सत्यनारायण ने यह भी कहा, "पैरा खेलों की सफलता से सामान्य एथलीट भी यह मानने लगे हैं कि वे मेडल जीत सकते हैं। हम हमेशा अपने एथलीट से कहते हैं कि कड़ी मेहनत करें, और अच्छे नतीजे मिलेंगे। आज, भारत पैरा खेलों में बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।"

दिलीप गावित का संघर्ष और हौसला

महाराष्ट्र के नासिक के निकट तोरण डोंगरी के एक छोटे से गाँव में जन्मे दिलीप की जिंदगी में पाँच-छह वर्ष की उम्र में एक पेड़ से गिरने के कारण दाहिने हाथ में गंभीर चोट आई। समय पर चिकित्सा सहायता न मिलने के कारण चोट अंगक्षय में बदल गई और कोहनी के नीचे से हाथ काटना पड़ा।

इस त्रासदी के बावजूद दिलीप ने हार नहीं मानी। अपने गाँव की धूल भरी सड़कों पर अभ्यास करते हुए उनकी प्रतिभा को कोच वैजनाथ काले ने पहचाना, जिन्होंने उन्हें पेशेवर पैरा-एथलेटिक्स की राह दिखाई। सत्यनारायण ने कहा, "अपनी जिंदगी में इतने बड़े झटके के बावजूद, भगवान ने उन्हें जिंदगी में कुछ बड़ा करने का रास्ता दिखाया और हम सभी ने उनका साथ दिया।"

दिलीप की उपलब्धियाँ

दिलीप ने 2022 एशियन पैरा गेम्स में पुरुषों के 400 मीटर टी47 इवेंट में स्वर्ण पदक जीता था, जो उस प्रतियोगिता में भारत का ऐतिहासिक 100वाँ पदक था। इसके बाद उन्होंने पेरिस 2024 पैरालंपिक में पुरुषों के 400 मीटर टी47 इवेंट के फाइनल तक पहुँचकर देश का मान बढ़ाया। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय पैरा-एथलेटिक्स अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार नई ऊँचाइयाँ छू रहा है।

आगे की राह

कोच सत्यनारायण की यह सफलता भारतीय पैरा-खेल प्रशिक्षण की दिशा और दशा दोनों को रेखांकित करती है। आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में दिलीप और बासिल जैसे एथलीट्स से भारत की उम्मीदें और भी बड़ी होंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि किसी संरचित ग्रासरूट स्काउटिंग तंत्र से। पैरा-एथलेटिक्स की बढ़ती सफलता सामान्य खेलों के लिए प्रेरणा बन रही है — यह स्वागतयोग्य है, पर इसके साथ ज़रूरी है कि पैरा-एथलीट्स के लिए बुनियादी ढाँचा, चिकित्सा सहायता और स्काउटिंग नेटवर्क भी उसी गति से मज़बूत हो।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने 100 मीटर टी47 में कौन-से पदक जीते?
भारत ने पुरुषों की 100 मीटर टी47 स्पर्धा में गोल्ड और सिल्वर दोनों जीते। दिलीप महादू गावित ने गेम्स रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण और मोहम्मद बासिल मोरसिंगनाकाथी ने रजत पदक हासिल किया।
दिलीप महादू गावित कौन हैं और उनकी पृष्ठभूमि क्या है?
दिलीप महाराष्ट्र के नासिक के पास तोरण डोंगरी गाँव के रहने वाले हैं। पाँच-छह साल की उम्र में पेड़ से गिरने के कारण दाहिने हाथ में गंभीर चोट आई और समय पर इलाज न मिलने से कोहनी के नीचे से हाथ काटना पड़ा, फिर भी उन्होंने पैरा-एथलेटिक्स में शानदार करियर बनाया।
कोच सत्यनारायण ने दिलीप को किस इवेंट में बदलाव करने की सलाह दी?
कोच सत्यनारायण शिमोगा ने दिलीप को 400 मीटर से 100 मीटर इवेंट में स्थानांतरित किया। उन्होंने दिलीप को दुबई भेजा जहाँ उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए क्वालीफाई किया।
दिलीप गावित की पिछली प्रमुख उपलब्धियाँ क्या हैं?
दिलीप ने 2022 एशियन पैरा गेम्स में 400 मीटर टी47 में स्वर्ण पदक जीता था, जो उस प्रतियोगिता में भारत का ऐतिहासिक 100वाँ पदक था। इसके अलावा वे पेरिस 2024 पैरालंपिक में 400 मीटर टी47 इवेंट के फाइनल तक पहुँचे थे।
पैरा खेलों की सफलता सामान्य एथलीट्स को कैसे प्रेरित कर रही है?
कोच सत्यनारायण के अनुसार, पैरा खेलों में भारत के बेहतर प्रदर्शन ने सामान्य एथलीट्स में यह विश्वास जगाया है कि कड़ी मेहनत से वे भी विश्व स्तर पर पदक जीत सकते हैं। पैरा-एथलीट्स की लगन और जज्बा सामान्य खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बन रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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