कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: PCI ने ग्लासगो के 7 पदक विजेता पैरा एथलीटों को किया सम्मानित
सारांश
मुख्य बातें
पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया (PCI) ने 5 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में एक विशेष समारोह आयोजित कर कॉमनवेल्थ गेम्स 2026, ग्लासगो में पदक जीतने वाले भारतीय पैरा एथलीटों और उनके कोचों को सम्मानित किया। भारत ने इस संस्करण में पैरा इवेंट्स में 7 पदक — 3 स्वर्ण, 2 रजत और 2 कांस्य — जीतकर किसी एक कॉमनवेल्थ गेम्स में अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ पैरा प्रदर्शन दर्ज किया।
पदक विजेता एथलीट और उनकी उपलब्धियाँ
समारोह में सम्मानित एथलीटों की सूची में शर्मिला धनखड़ (महिला शॉट पुट F57, स्वर्ण), शिल्पा शायला (महिला शॉट पुट F57, कांस्य), झंडू कुमार (पैरा पावरलिफ्टिंग, कांस्य), सोमन राणा (पुरुष शॉट पुट F57, स्वर्ण), शुभम जुयाल (पुरुष शॉट पुट F57, रजत), दिलीप मनाडू गावित (100 मीटर T47, स्वर्ण) और मोहम्मद बासिल (पुरुष 100 मीटर T47, रजत) शामिल थे।
यह समारोह PCI और M3M फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया, जिसमें कोचों और सपोर्ट स्टाफ के योगदान को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया।
PCI अध्यक्ष देवेंद्र झाझरिया का संबोधन
PCI अध्यक्ष देवेंद्र झाझरिया ने इस अवसर पर कहा, 'हमारे एथलीटों ने एक बार फिर दुनिया को दिखा दिया है कि पक्का इरादा, हिम्मत और कड़ी मेहनत से क्या हासिल किया जा सकता है। यह ऐतिहासिक प्रदर्शन सिर्फ मेडल टैली नहीं है — यह हमारे एथलीटों, कोचों और पूरे सपोर्ट सिस्टम के वर्षों की प्रतिबद्धता का सबूत है।'
झाझरिया ने M3M फाउंडेशन को पैरालंपिक आंदोलन के साथ खड़े रहने के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि ऐसी साझेदारियाँ एथलीटों को बड़े सपने देखने और अधिक सफलता पाने में अहम भूमिका निभाती हैं।
डॉ. पायल कनोडिया का दृष्टिकोण
डॉ. पायल कनोडिया ने कहा कि ग्लासगो में मिली उपलब्धियाँ भारत के पैरा एथलीटों की हिम्मत और लगन को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा, 'ग्लासगो में जीता गया हर पदक एक खेल की उपलब्धि से कहीं ज़्यादा है — यह असाधारण हिम्मत, पक्के इरादे और इंसानी इच्छाशक्ति की कभी न हारने वाली भावना का सबूत है।'
कनोडिया ने एक समावेशी, एथलीट-केंद्रित स्पोर्टिंग इकोसिस्टम बनाने का लक्ष्य रेखांकित किया, जो हर पैरा एथलीट को विश्व-स्तरीय अवसर, इंफ्रास्ट्रक्चर और सपोर्ट प्रदान करे।
आम जनता और पैरा खेलों पर असर
गौरतलब है कि भारत के पैरा खेलों में यह उभार तब आया है जब 2024 पेरिस पैरालंपिक्स में भी देश ने रिकॉर्ड पदक जीते थे। ग्लासगो का प्रदर्शन इस निरंतरता को और पुख्ता करता है। कनोडिया ने स्पष्ट किया कि 'यह मंजिल नहीं, बल्कि भारत को पैरा खेलों में वैश्विक पावरहाउस बनाने की एक बड़ी मुहिम की शुरुआत है।'
आने वाले वर्षों में 2028 लॉस एंजेलेस पैरालंपिक्स को ध्यान में रखते हुए PCI की यह पहल भारतीय पैरा एथलीटों की तैयारी और मनोबल दोनों को नई ऊँचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।