जामिया 'फ्री कश्मीर' पोस्टर विवाद: पूर्व डीजीपी एसपी वैद बोले — पहले विश्वविद्यालय करे कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर पुलिस के पूर्व पुलिस महानिदेशक एसपी वैद ने 24 अक्टूबर 2026 को जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में लगाए गए विवादित 'फ्री कश्मीर' पोस्टरों को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन से तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की माँग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस से पहले विश्वविद्यालय को अपनी ज़िम्मेदारी निभानी होगी — और यदि वह विफल रहता है, तभी पुलिस को आगे आना चाहिए।
पोस्टर विवाद पर वैद का रुख
पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने कहा कि 'फ्री कश्मीर' का कोई सवाल ही नहीं उठता — कश्मीर भारत का अटूट अंग है और रहेगा। उन्होंने 'फ्री सर्जिल' के पोस्टर का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस व्यक्ति का पोस्टर लगाया गया है, उस पर देशद्रोह से जुड़े आरोप हैं और उसकी हिरासत का निर्धारण केवल न्यायालय करेगा।
वैद ने कहा कि वाइस-चांसलर सहित विश्वविद्यालय प्रशासन को पोस्टर लगाने वालों की पहचान कर उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक व कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। उनके अनुसार, ऐसे छात्रों को विश्वविद्यालय से बाहर किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया, 'पहले यूनिवर्सिटी कार्रवाई करे, उसके बाद पुलिस को आगे आना चाहिए।'
भारत-चीन तनाव और आईटीबीपी डीजी के बयान पर राय
आईटीबीपी के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह के उस बयान पर, जिसमें जुलाई 2026 से अरुणाचल प्रदेश में चीन के साथ कई बार आमना-सामना होने की बात कही गई, वैद ने कहा कि चीन एक 'दादागिरी करने वाला देश' है और उसे उसी की भाषा में जवाब देना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि भारत तरक्की कर रहा है, लेकिन कुछ ताकतें — चाहे वह अमेरिका हो या चीन — नहीं चाहतीं कि भारत उनके बराबर खड़ा हो। वैद ने यह भी कहा कि चीन का अपने 21 पड़ोसी देशों के साथ सीमा विवाद जारी है और वह दूसरे देशों की जमीन हड़पने की नीति पर चलता है।
1962 युद्ध और अक्साई चिन का संदर्भ
पूर्व डीजीपी ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान चीन ने अक्साई चिन के लगभग 38,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर अवैध रूप से कब्ज़ा कर लिया था, जिस पर आज भी उसका नियंत्रण है। उन्होंने कहा कि दुनिया को चीन से यह माँग करनी चाहिए कि वह ग़लत तरीके से कब्ज़ाई गई ज़मीन छोड़े।
वैद ने यह भी कहा कि चीन जब तिब्बत और अरुणाचल प्रदेश को अपना बताता है, तो उसे पहले इसका ऐतिहासिक आधार प्रस्तुत करना चाहिए। उनके अनुसार, भारत के पास भी यह कहने का अधिकार है कि तिब्बत के राजा ने ऐतिहासिक रूप से उसे भारत को सौंपा था।
हिमांशु भाऊ की गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया
अमेरिका में गिरफ्तार हुए हिमांशु भाऊ के मामले पर वैद ने कहा कि भारतीय एजेंसियाँ वहाँ जाएँगी और उसे हिरासत में लेकर देश वापस लाएँगी। इसके बाद उसे न्यायालय में पेश कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञ की राय का महत्व
यह ऐसे समय में आया है जब जामिया मिलिया इस्लामिया परिसर पहले से ही राजनीतिक संवेदनशीलता के केंद्र में रहा है। गौरतलब है कि विश्वविद्यालय परिसरों में इस तरह के पोस्टर लगाने के मामले पहले भी विवाद का कारण बन चुके हैं। वैद जैसे वरिष्ठ पूर्व अधिकारी का यह बयान सुरक्षा और शिक्षण संस्थान की स्वायत्तता के बीच की रेखा को लेकर बहस को एक बार फिर केंद्र में ला देता है।