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जामिया प्रशासन पर इमरान मसूद का हमला: 'छात्रों की बात सुनने की जगह एफआईआर दर्ज की जा रही है'

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जामिया प्रशासन पर इमरान मसूद का हमला: 'छात्रों की बात सुनने की जगह एफआईआर दर्ज की जा रही है'

सारांश

जामिया परिसर विवाद अब संसद की दहलीज़ तक पहुँच गया है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन पर छात्रों की आवाज़ दबाने का आरोप लगाया, प्रॉक्टर की नियुक्ति को कथित तौर पर गैरकानूनी बताया और कहा — एफआईआर से हम नहीं डरेंगे।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के खिलाफ जामिया मिलिया इस्लामिया कैंपस मामले में एफआईआर दर्ज की गई है।
मसूद ने प्रॉक्टर मेहताब रिजवी की नियुक्ति को कथित तौर पर 'गैरकानूनी' बताया और उन पर पूर्व में कई एफआईआर दर्ज होने का दावा किया।
आईटीबीपी की फर्जी वर्दी पहनकर परिसर में घुसे व्यक्ति को छात्रों ने पकड़ा; मसूद ने सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक न किए जाने पर सवाल उठाए।
मसूद ने कहा — रास्ते बंद थे, इसलिए दीवार फांदनी पड़ी; एफआईआर से डर नहीं।
लखनऊ में गठबंधन-विरोधी पोस्टरों को मसूद ने BJP का डर बताया; कहा — गठबंधन मज़बूत है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की PM मोदी पर विवादित टिप्पणी का मसूद ने बचाव किया।

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने 26 अक्टूबर 2026 को जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय प्रशासन पर तीखा हमला बोला और कहा कि परिसर में छात्र विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन उनकी समस्याओं पर ध्यान देने की बजाय उनके खिलाफ और उनका समर्थन करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा रहा है। मसूद स्वयं उन लोगों में शामिल हैं जिनके खिलाफ जामिया कैंपस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है।

प्रॉक्टर की नियुक्ति पर सवाल

मसूद ने विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर मेहताब रिजवी की नियुक्ति को कथित तौर पर 'गैरकानूनी' बताया और आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारी के खिलाफ पहले से कई एफआईआर दर्ज हैं। उन्होंने रजिस्ट्रार की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए।

उन्होंने यह भी कहा कि जब छात्र भूख हड़ताल पर बैठे थे, तब प्रशासन को संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए था — न कि चुप्पी साधनी चाहिए थी।

परिसर सुरक्षा और सीसीटीवी विवाद

मसूद ने परिसर में कश्मीर से संबंधित नारे लिखे जाने के मामले में भी प्रशासन पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि आईटीबीपी की फर्जी वर्दी पहनकर परिसर में घुसे एक व्यक्ति को छात्रों ने पकड़ा — न कि प्रशासन ने।

मसूद ने पूछा कि परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद उनकी फुटेज सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही। उनका कहना था कि इससे जवाबदेही पर सवाल खड़ा होता है।

दीवार फांदने के विवाद पर सफाई

जामिया परिसर की दीवार फांदने के सवाल पर मसूद ने कहा कि प्रशासन ने सभी रास्ते बंद कर दिए थे, जिससे अभिभावकों और समर्थकों के सामने कोई विकल्प नहीं बचा था। उन्होंने सवाल किया, 'चारों तरफ से रास्ते बंद करने की ज़रूरत क्यों पड़ी और लोगों को अपने बच्चों से मिलने से क्यों रोका गया?'

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एफआईआर दर्ज होने से वे डरने वाले नहीं हैं।

लखनऊ पोस्टर और गठबंधन पर रुख

लखनऊ में गठबंधन के विरोध में लगाए गए पोस्टरों पर मसूद ने कहा कि इनसे भारतीय जनता पार्टी (BJP) का डर ज़ाहिर होता है। उन्होंने सुझाया कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि ये पोस्टर किसने लगवाए और उनके लिए धन कहाँ से आया।

मसूद ने ज़ोर देकर कहा कि विपक्षी गठबंधन मज़बूत है और इस तरह के प्रयासों से उसमें कोई दरार नहीं पड़ेगी। उन्होंने यह भी कहा कि सीटों के बंटवारे पर जल्द ही फैसला हो जाएगा।

खड़गे की टिप्पणी पर समर्थन

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई विवादित टिप्पणी का बचाव करते हुए मसूद ने कहा कि 'खड़गे ने सही जवाब दिया है और आगे भी इसी तरह जवाब देते रहेंगे।' उन्होंने सरकार पर 'गुंडागर्दी' का आरोप लगाया और कहा कि एफआईआर के ज़रिए उन्हें चुप नहीं कराया जा सकता।

यह पूरा विवाद ऐसे समय में उभरा है जब देशभर के कई विश्वविद्यालयों में छात्र-प्रशासन टकराव की घटनाएँ सामने आ रही हैं। जामिया मामले में आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई पर नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

प्रशासनिक जवाबदेही और छात्र असंतोष एक साथ उलझे हैं। मसूद के आरोप गंभीर हैं, लेकिन उनकी विश्वसनीयता तब और बढ़ती जब वे ठोस दस्तावेज़ी साक्ष्य सामने रखते। दूसरी ओर, प्रशासन का सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक न करना — जो मसूद ने उठाया — पारदर्शिता के सवाल को वैध बनाता है। केंद्रीय विश्वविद्यालयों में छात्र-प्रशासन संघर्ष की यह प्रवृत्ति नई नहीं है, लेकिन इसमें सांसदों की सीधी भागीदारी और उनके खिलाफ एफआईआर एक नया और चिंताजनक आयाम जोड़ती है।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इमरान मसूद के खिलाफ जामिया में एफआईआर क्यों दर्ज हुई?
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद सहित कुछ लोगों पर जामिया मिलिया इस्लामिया परिसर की दीवार फांदकर अंदर प्रवेश करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। मसूद का कहना है कि प्रशासन ने सभी प्रवेश रास्ते बंद कर दिए थे, जिससे अन्य कोई विकल्प नहीं बचा था।
जामिया के प्रॉक्टर मेहताब रिजवी पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि प्रॉक्टर मेहताब रिजवी की नियुक्ति कथित तौर पर गैरकानूनी है और उनके खिलाफ पहले से कई एफआईआर दर्ज हैं। हालाँकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक सामने नहीं आई है।
जामिया परिसर में सुरक्षा को लेकर क्या विवाद है?
मसूद के अनुसार, आईटीबीपी की फर्जी वर्दी पहनकर परिसर में घुसे एक व्यक्ति को छात्रों ने पकड़ा, न कि प्रशासन ने। उन्होंने यह भी पूछा कि परिसर में सीसीटीवी कैमरे होने के बावजूद उनकी फुटेज सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही।
लखनऊ में गठबंधन-विरोधी पोस्टरों पर मसूद का क्या कहना है?
मसूद ने इन पोस्टरों को BJP की घबराहट का संकेत बताया और कहा कि इससे विपक्षी गठबंधन में कोई दरार नहीं पड़ेगी। उन्होंने माँग की कि यह पता लगाया जाए कि पोस्टर किसने लगवाए और उनके लिए पैसे कहाँ से आए।
खड़गे की मोदी पर विवादित टिप्पणी पर मसूद का रुख क्या है?
मसूद ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की PM मोदी पर की गई विवादित टिप्पणी का पूरा समर्थन किया और कहा कि 'खड़गे ने सही जवाब दिया है और आगे भी इसी तरह जवाब देते रहेंगे।' उन्होंने सरकार पर 'गुंडागर्दी' का आरोप भी लगाया।
राष्ट्र प्रेस
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