जामिया मिल्लिया में छात्र संघ चुनाव की माँग: सपा नेता आशुतोष वर्मा और कांग्रेस के उदित राज ने उठाई आवाज़
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता आशुतोष वर्मा ने 24 अक्टूबर 2026 को जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में चल रहे विरोध प्रदर्शन के संदर्भ में स्पष्ट माँग रखी कि वहाँ छात्र संघ चुनाव तत्काल कराए जाने चाहिए। उनके साथ कांग्रेस नेता उदित राज ने भी विश्वविद्यालय प्रशासन की जवाबदेही तय करने की अपील की।
जामिया में छात्र संघ चुनाव पर क्या बोले आशुतोष वर्मा
सपा नेता आशुतोष वर्मा ने कहा, 'जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव पर लगातार रोक लगी हुई है। वहाँ का छात्र संघ चाहता है कि छात्रों की आवाज दबाई न जाए। मेरा मानना है कि वहाँ छात्र संघ चुनाव होना चाहिए।' उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब विश्वविद्यालय परिसर में विरोध प्रदर्शन तेज हो रहे हैं। कश्मीर से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा, 'कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, था और रहेगा।'
केरल राज्यपाल और एसआईआर पर वर्मा का रुख
केरल के राज्यपाल के नॉन-वेज से जुड़े आदेश पर वर्मा ने कहा, 'यह कोई बड़ा मुद्दा नहीं है। अगर केरल के गवर्नर को नॉन-वेज नहीं पसंद है तो वे नहीं खाएंगे। इसको मुद्दा बनाकर बड़े मुद्दे को खत्म क्यों किया जा रहा है?' विशेष सारांश पंजी (SIR — Special Summary Revision) को लेकर उन्होंने आरोप लगाया, 'जहाँ एसआईआर किया जा रहा है, वहाँ लगातार भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पक्ष में चुनाव आयोग का झुकाव खुद में संदिग्धता होती है। उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग खुद अपनी गलती मानकर ईआरओ को निलंबित कर रहा है।' उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विभाग ने खुद स्वीकार किया है कि हर जगह गड़बड़ियाँ हो रही हैं।
नेहा बोरा याचिका मामले पर सपा नेता की राय
दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा नेहा बोरा की याचिका खारिज किए जाने पर आशुतोष वर्मा ने कहा, 'किसी भी व्यक्ति का अपना अधिकार है कि वो हाईकोर्ट के नोटिस के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जा सकता है। अगर नेहा बोरा को लगता है कि उनकी आज़ादी में किसी भी प्रकार का खलल आ रहा है तो उन्हें सर्वोच्च न्यायालय में जाना चाहिए।'
कांग्रेस नेता उदित राज की माँग
कांग्रेस नेता उदित राज ने जामिया मामले पर कहा, 'सरकार को इसकी जाँच करनी चाहिए कि किसने लिखा है। इसमें वाइस चांसलर की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। आईबी और एनआईए से जाँच कराई जानी चाहिए।' शरजील इमाम की जमानत के सवाल पर राज ने कहा, 'शरजील इमाम को बेल मिलनी चाहिए — कन्विक्शन होता है तो अलग बात है, लेकिन बेल डिनाई करना गलत बात है।' गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल विश्वविद्यालय परिसरों में छात्र अधिकारों के सवाल पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं।
आगे क्या हो सकता है
विशेषज्ञों के अनुसार, जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव का मुद्दा लंबे समय से विवादित रहा है और विपक्षी दलों के इस तरह के बयान राजनीतिक दबाव बढ़ाने की दिशा में एक कदम माने जा रहे हैं। एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोप आने वाले दिनों में संसद और अदालतों में और गर्माने के संकेत हैं।