27 अक्टूबर 2026
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जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ की मांग पर आंदोलन जारी, कांग्रेस सांसदों के अनधिकृत प्रवेश पर FIR

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जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ की मांग पर आंदोलन जारी, कांग्रेस सांसदों के अनधिकृत प्रवेश पर FIR

सारांश

जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ बहाली की माँग पर भूख हड़ताल और प्रदर्शन जारी है। दो कांग्रेस सांसदों के अनधिकृत प्रवेश पर AIR दर्ज हुई, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र विभाग की इमारत पर 'बाहरी लोगों' का कब्जा बताया जा रहा है — और पढ़ाई ऑनलाइन हो गई है।

मुख्य बातें

जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र छात्र संघ के गठन और चुनाव की माँग को लेकर 27 अक्टूबर 2026 को भी आंदोलनरत हैं।
छात्रों ने 26 अक्टूबर को कुलपति को औपचारिक पत्र सौंपा; माँगें पूरी न होने तक भूख हड़ताल जारी रखने की घोषणा।
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी और इमरान मसूद के अनधिकृत प्रवेश के बाद 25 अक्टूबर को AIR दर्ज।
24 अक्टूबर से राजनीति विज्ञान व अर्थशास्त्र विभाग की इमारत पर 'बाहरी लोगों' का कब्जा; पढ़ाई ऑनलाइन मोड में स्थानांतरित।
प्रशासन ने 21 अक्टूबर को 'संविधान मसौदा समिति' गठित की; लिंगदोह समिति की सिफारिशों की समीक्षा जारी।
छात्र संघ 2006 में हिंसक झड़पों के बाद भंग किया गया था; वर्तमान प्रशासन ने इसे पिछले 20 वर्षों में पहली सक्रिय कोशिश बताया।

जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI), नई दिल्ली में छात्र संघ के गठन और चुनाव कराने की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन 27 अक्टूबर 2026 को भी जारी रहा। विश्वविद्यालय के शिक्षकों और प्रशासन ने राजनीतिक हस्तक्षेप की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि बाहरी तत्वों ने विरोध-प्रदर्शन को भड़काने की कोशिश की है।

छात्रों की मांगें और भूख हड़ताल

छात्रों ने 26 अक्टूबर को कुलपति को अपनी माँगों का एक औपचारिक पत्र सौंपा और स्पष्ट किया कि जब तक उनकी माँगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक भूख हड़ताल और शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहेगा। मुख्य माँग जामिया मिलिया इस्लामिया छात्र संघ की बहाली और नियमित चुनाव कराने की है, जिसे 2006 में हिंसक झड़पों और शिक्षकों पर हमलों की घटनाओं के बाद भंग कर दिया गया था।

प्रशासन की स्थिति और बैठक

मंगलवार को विश्वविद्यालय के डीन, विभागाध्यक्षों, केंद्रों के निदेशकों और प्रमुख अधिकारियों की एक बैठक बुलाई गई। इस बैठक का उद्देश्य परिसर की मौजूदा स्थिति का जायज़ा लेना, ऑनलाइन कक्षाओं की अवधि की समीक्षा करना और आंदोलनरत छात्रों की माँगों पर विचार-विमर्श करना था। प्रशासन का कहना है कि 21 अक्टूबर 2026 को एक 'संविधान मसौदा समिति' का गठन किया गया है, जिसे अदालती आदेशों, लिंगदोह समिति की सिफारिशों और विश्वविद्यालय के नियमों की जाँच के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा।

प्रशासन ने यह भी रेखांकित किया कि पिछले 20 वर्षों में यह पहला प्रशासन है जिसने छात्र संघ बहाली के मुद्दे पर सक्रिय रूप से कदम उठाए हैं।

कांग्रेस सांसदों के अनधिकृत प्रवेश पर FIR

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी 21 अक्टूबर को गेट नंबर 4ए का ताला तोड़कर परिसर में अनधिकृत रूप से घुसे। वहीं सांसद इमरान मसूद 23 अक्टूबर को गफूर नगर के पास एक सीढ़ी की सहायता से बाउंड्री वॉल फाँदकर परिसर में दाखिल हुए। इन घटनाओं के बाद प्रशासन ने 25 अक्टूबर को एआईआर (AIR) दर्ज कराई। प्रशासन ने यह भी उल्लेख किया कि समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी को परिसर आते समय हिरासत में लिया गया, और अन्य राजनीतिक नेता भी बिना पूर्व सूचना के परिसर में आए।

विभाग की इमारत पर कब्जा, पढ़ाई ऑनलाइन

प्रशासन का आरोप है कि 24 अक्टूबर से 'विश्वविद्यालय के बाहर के लोगों' ने राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र विभागों की इमारत पर कब्जा जमा लिया है और ताला लगा दिया है। इस स्थिति के चलते विश्वविद्यालय को उस तारीख से दीपावली की छुट्टियों तक शिक्षण को ऑनलाइन मोड में स्थानांतरित करना पड़ा है। यह ऐसे समय में आया है जब शिक्षक पहले से ही शैक्षणिक गतिविधियों में बाधा को लेकर चिंतित हैं।

आगे क्या होगा

विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी बाहरी व्यक्तियों से अपील की है कि वे परिसर का माहौल खराब न करें और शैक्षणिक गतिविधियों को बाधित न करें। स्थिति की समीक्षा के बाद ही ऑनलाइन कक्षाओं को लेकर अगला निर्णय लिया जाएगा। संविधान मसौदा समिति की रिपोर्ट आने के बाद छात्र संघ बहाली पर ठोस कदम उठाए जाने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

चाहे इरादा जो भी हो, छात्र आंदोलन को वैध संस्थागत चैनलों से दूर ले जाता है और प्रशासन को विरोध को 'बाहरी षड्यंत्र' के रूप में चित्रित करने का अवसर देता है। गौरतलब है कि 20 वर्षों की निष्क्रियता के बाद अचानक 'संविधान मसौदा समिति' का गठन दबाव में आई प्रतिक्रिया भी लग सकती है — और इसकी विश्वसनीयता इसी बात पर निर्भर करेगी कि समिति की समयसीमा और सिफारिशें कितनी पारदर्शी होती हैं।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र किस मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं?
जामिया के छात्र छात्र संघ के गठन और लोकतांत्रिक चुनाव कराने की माँग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। यह संघ 2006 में हिंसक झड़पों और शिक्षकों पर हमलों के बाद भंग कर दिया गया था। छात्रों ने 26 अक्टूबर को कुलपति को औपचारिक पत्र सौंपकर माँगें पूरी न होने तक भूख हड़ताल जारी रखने की चेतावनी दी है।
जामिया में कांग्रेस सांसदों पर क्या कार्रवाई हुई?
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने 21 अक्टूबर को गेट नंबर 4ए का ताला तोड़कर और इमरान मसूद ने 23 अक्टूबर को बाउंड्री वॉल फाँदकर परिसर में प्रवेश किया। इन घटनाओं के बाद प्रशासन ने 25 अक्टूबर को AIR दर्ज कराई।
जामिया में ऑनलाइन कक्षाएँ क्यों शुरू हुईं?
प्रशासन के अनुसार, 24 अक्टूबर से 'बाहरी लोगों' ने राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र विभागों की इमारत पर कब्जा कर उसमें ताला लगा दिया। इस कारण विश्वविद्यालय को दीपावली की छुट्टियों तक शिक्षण ऑनलाइन मोड में स्थानांतरित करना पड़ा।
'संविधान मसौदा समिति' क्या है और इसका क्या काम है?
यह समिति 21 अक्टूबर 2026 को जामिया प्रशासन ने गठित की है। इसका काम अदालती आदेशों, लिंगदोह समिति की सिफारिशों और विश्वविद्यालय के लागू नियमों की जाँच कर छात्र संघ के संविधान का मसौदा तैयार करना है।
जामिया छात्र संघ को पहले क्यों भंग किया गया था?
जामिया मिलिया इस्लामिया छात्र संघ को 2006 में उस समय भंग किया गया था जब परिसर में हिंसक झड़पों और शिक्षकों पर हमलों की लगातार घटनाएँ हुई थीं। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि तब से 20 वर्षों में यह पहली बार है कि बहाली की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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