जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ की मांग पर आंदोलन जारी, कांग्रेस सांसदों के अनधिकृत प्रवेश पर FIR
सारांश
मुख्य बातें
जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI), नई दिल्ली में छात्र संघ के गठन और चुनाव कराने की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन 27 अक्टूबर 2026 को भी जारी रहा। विश्वविद्यालय के शिक्षकों और प्रशासन ने राजनीतिक हस्तक्षेप की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि बाहरी तत्वों ने विरोध-प्रदर्शन को भड़काने की कोशिश की है।
छात्रों की मांगें और भूख हड़ताल
छात्रों ने 26 अक्टूबर को कुलपति को अपनी माँगों का एक औपचारिक पत्र सौंपा और स्पष्ट किया कि जब तक उनकी माँगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक भूख हड़ताल और शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहेगा। मुख्य माँग जामिया मिलिया इस्लामिया छात्र संघ की बहाली और नियमित चुनाव कराने की है, जिसे 2006 में हिंसक झड़पों और शिक्षकों पर हमलों की घटनाओं के बाद भंग कर दिया गया था।
प्रशासन की स्थिति और बैठक
मंगलवार को विश्वविद्यालय के डीन, विभागाध्यक्षों, केंद्रों के निदेशकों और प्रमुख अधिकारियों की एक बैठक बुलाई गई। इस बैठक का उद्देश्य परिसर की मौजूदा स्थिति का जायज़ा लेना, ऑनलाइन कक्षाओं की अवधि की समीक्षा करना और आंदोलनरत छात्रों की माँगों पर विचार-विमर्श करना था। प्रशासन का कहना है कि 21 अक्टूबर 2026 को एक 'संविधान मसौदा समिति' का गठन किया गया है, जिसे अदालती आदेशों, लिंगदोह समिति की सिफारिशों और विश्वविद्यालय के नियमों की जाँच के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा।
प्रशासन ने यह भी रेखांकित किया कि पिछले 20 वर्षों में यह पहला प्रशासन है जिसने छात्र संघ बहाली के मुद्दे पर सक्रिय रूप से कदम उठाए हैं।
कांग्रेस सांसदों के अनधिकृत प्रवेश पर FIR
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी 21 अक्टूबर को गेट नंबर 4ए का ताला तोड़कर परिसर में अनधिकृत रूप से घुसे। वहीं सांसद इमरान मसूद 23 अक्टूबर को गफूर नगर के पास एक सीढ़ी की सहायता से बाउंड्री वॉल फाँदकर परिसर में दाखिल हुए। इन घटनाओं के बाद प्रशासन ने 25 अक्टूबर को एआईआर (AIR) दर्ज कराई। प्रशासन ने यह भी उल्लेख किया कि समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी को परिसर आते समय हिरासत में लिया गया, और अन्य राजनीतिक नेता भी बिना पूर्व सूचना के परिसर में आए।
विभाग की इमारत पर कब्जा, पढ़ाई ऑनलाइन
प्रशासन का आरोप है कि 24 अक्टूबर से 'विश्वविद्यालय के बाहर के लोगों' ने राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र विभागों की इमारत पर कब्जा जमा लिया है और ताला लगा दिया है। इस स्थिति के चलते विश्वविद्यालय को उस तारीख से दीपावली की छुट्टियों तक शिक्षण को ऑनलाइन मोड में स्थानांतरित करना पड़ा है। यह ऐसे समय में आया है जब शिक्षक पहले से ही शैक्षणिक गतिविधियों में बाधा को लेकर चिंतित हैं।
आगे क्या होगा
विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी बाहरी व्यक्तियों से अपील की है कि वे परिसर का माहौल खराब न करें और शैक्षणिक गतिविधियों को बाधित न करें। स्थिति की समीक्षा के बाद ही ऑनलाइन कक्षाओं को लेकर अगला निर्णय लिया जाएगा। संविधान मसौदा समिति की रिपोर्ट आने के बाद छात्र संघ बहाली पर ठोस कदम उठाए जाने की उम्मीद है।