अमेरिकी संसद में 'इंडियन अमेरिकन हेरिटेज मंथ' प्रस्ताव को 256 सांसदों का समर्थन
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में भारतीय मूल के सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को एक द्विदलीय प्रस्ताव पेश किया, जिसमें जुलाई महीने को आधिकारिक रूप से 'इंडियन अमेरिकन हेरिटेज मंथ' (भारतीय-अमेरिकी विरासत माह) घोषित करने की माँग की गई है। 435 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में अब तक 256 सांसदों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है — यानी सदन के आधे से अधिक सदस्य इसके पक्ष में हैं।
प्रस्ताव में क्या है
इस प्रस्ताव का केंद्रीय उद्देश्य भारतीय-अमेरिकी समुदाय के ऐतिहासिक और समकालीन योगदान को संस्थागत मान्यता देना है। प्रस्ताव में अमेरिकी जनगणना ब्यूरो के 2023 के आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि अमेरिका में 52 लाख से अधिक लोग खुद को भारतीय-अमेरिकी बताते हैं। दस्तावेज़ में यह भी उल्लेख है कि इस समुदाय की जड़ें 5,000 वर्ष से अधिक पुरानी सभ्यता से जुड़ी हैं और यह अमेरिका के सबसे धार्मिक रूप से विविध समुदायों में से एक है।
प्रस्ताव में भारतीय-अमेरिकियों के योगदान को विज्ञान, चिकित्सा, जैव-चिकित्सा अनुसंधान, अंतरिक्ष अनुसंधान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कंप्यूटिंग और दूरसंचार जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण बताया गया है। साथ ही अमेरिकी सशस्त्र बलों की सभी शाखाओं और सरकारी स्तरों पर उनकी सेवा को भी स्वीकार किया गया है।
जुलाई चुनने का ऐतिहासिक कारण
जुलाई महीने के चयन के पीछे एक ठोस ऐतिहासिक आधार है। 2 जुलाई 1946 को तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी एस. ट्रूमैन ने 'ल्यूस-सेलर एक्ट' पर हस्ताक्षर किए थे, जिसने पहली बार भारतीय मूल के लोगों को अमेरिकी नागरिकता प्राप्त करने का अधिकार दिया। इससे पहले कई दशकों तक भारतीय प्रवासी नागरिकता से वंचित रहे थे।
गौरतलब है कि यह तिथि भारतीय-अमेरिकी इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ मानी जाती है और इसीलिए जुलाई को विरासत माह के रूप में नामित करना प्रतीकात्मक दृष्टि से भी अर्थपूर्ण माना जा रहा है।
कृष्णमूर्ति का वक्तव्य
सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने कहा, 'भारतीय-अमेरिकियों ने कई पीढ़ियों से अमेरिका को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने ऐसे वैज्ञानिक और तकनीकी नवाचार किए हैं जिनसे लोगों की जान बची है, रोज़गार पैदा हुए हैं और देश की अर्थव्यवस्था मज़बूत हुई है। साथ ही उन्होंने सेना और सार्वजनिक जीवन में भी महत्वपूर्ण सेवा दी है।'
उन्होंने आगे कहा, 'मुझे गर्व है कि मेरे साथ 256 सांसद इस प्रस्ताव का समर्थन कर रहे हैं। यह भारतीय-अमेरिकियों की विरासत को सम्मान देने और अमेरिका को समृद्ध बनाने में उनके योगदान का जश्न मनाने का एक अवसर है।'
प्रस्ताव की सीमाएँ और राजनीतिक संदर्भ
यह एक साधारण हाउस रेज़ोल्यूशन है, इसलिए इसके पारित होने पर न तो कोई संघीय अवकाश घोषित होगा और न ही राष्ट्रपति की मंज़ूरी की आवश्यकता होगी। यह प्रस्ताव 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से ठीक एक सप्ताह पहले आया है — एक ऐसे समय में जब कई भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवार भी मैदान में हैं। आलोचकों का कहना है कि इस समय का चुनाव महज़ संयोग नहीं हो सकता, हालाँकि समर्थकों का तर्क है कि मान्यता की माँग वर्षों पुरानी है।
यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी समुदाय की राजनीतिक सक्रियता लगातार बढ़ रही है और कई राज्यों में वे एक निर्णायक मतदाता वर्ग के रूप में उभरे हैं।