7 अक्टूबर 2026
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भारतीय मसाले अमेरिकी घरों में 'भारतीयता का हिस्सा': राजदूत विनय मोहन क्वात्रा

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भारतीय मसाले अमेरिकी घरों में 'भारतीयता का हिस्सा': राजदूत विनय मोहन क्वात्रा

सारांश

वॉशिंगटन के इंडिया हाउस में हुए एक खास कार्यक्रम में राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने भारतीय मसालों को सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि 'भारतीयता का सेतु' बताया — और हल्दी लट्टे को बदलते अमेरिकी फूड कल्चर की मिसाल के रूप में पेश किया।

मुख्य बातें

राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने 7 अक्टूबर 2026 को वॉशिंगटन के इंडिया हाउस में भारतीय मसालों पर विशेष कार्यक्रम में शिरकत की।
क्वात्रा ने कहा कि मसाले केवल व्यापार नहीं, बल्कि अमेरिकी घरों तक 'भारतीयता का एक अहम हिस्सा' पहुँचाने का माध्यम हैं।
हल्दी लट्टे को उन्होंने सांस्कृतिक बदलाव की मिसाल बताया — 2010 2013 की अपनी वॉशिंगटन पोस्टिंग में यह अमेरिकी कैफे के मेन्यू में नहीं था।
भारतीय मसालों की अमेरिकी स्वीकार्यता अब स्वाद से आगे — सेहत, वेलनेस और ऑर्गेनिक फूड ट्रेंड से जुड़ गई है।
कार्यक्रम में अमेरिकन स्पाइस ट्रेड एसोसिएशन के सदस्य और फूड इंडस्ट्री के प्रतिनिधि शामिल हुए।

अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने 7 अक्टूबर 2026 को वॉशिंगटन स्थित इंडिया हाउस में कहा कि भारतीय मसाले अब अमेरिकी घरों में 'भारतीयता का एक अहम हिस्सा' पहुँचा रहे हैं — और यह पहुँच केवल रसोई के स्वाद तक सीमित नहीं, बल्कि सेहत, वेलनेस और रोज़मर्रा की खान पान की आदतों तक विस्तृत हो चुकी है। अमेरिकन स्पाइस ट्रेड एसोसिएशन के सदस्यों और फूड इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम में क्वात्रा ने मसालों को भारतीय सभ्यता की एक अटूट सांस्कृतिक कड़ी बताया।

मसाले व्यापार से बढ़कर, सांस्कृतिक सेतु हैं

क्वात्रा ने कार्यक्रम में स्पष्ट किया कि मसालों का महत्व उनके व्यावसायिक मूल्य से कहीं ऊपर है। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि मसाले सिर्फ व्यापार से कहीं ज्यादा हैं। इन मसालों के जरिए हम अमेरिकी घरों तक भारतीयता का एक बहुत अहम हिस्सा पहुँचाते हैं।" राजदूत ने इस सांस्कृतिक जुड़ाव को मसालों की बढ़ती व्यावसायिक उपस्थिति से भी बड़ा करार दिया।

क्वात्रा ने मसालों को पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही एक अटूट परंपरा से जोड़ा। उनके शब्दों में, "अगर कोई एक चीज है जो हज़ारों साल पुरानी पीढ़ियों से भारतीय समाज में नहीं बदली है, तो वह हैं मसाले। मैं वही मसाला इस्तेमाल करता हूँ जिसकी आदत मेरी माँ ने मुझे डाली थी, उन्होंने वही मसाला इस्तेमाल किया जिसकी आदत उनकी माँ ने उन्हें डाली थी।"

हल्दी लट्टे: बदलाव की मिसाल

राजदूत ने हल्दी का उदाहरण देते हुए अमेरिकी फूड कल्चर में आए बदलाव को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि 2010 से 2013 के बीच वॉशिंगटन में अपनी पिछली पोस्टिंग के दौरान उन्हें किसी अमेरिकी कैफे के मेन्यू में हल्दी लट्टे देखने को नहीं मिला था। आज वही हल्दी अमेरिका के बड़े वेलनेस और फूड मार्केट में प्रमुखता से शामिल है।

क्वात्रा ने इस बदलाव की तुलना भारतीय आयुर्वेदिक परंपरा से की, जिसमें हल्दी सदियों से "बहुत ही अहम और महत्वपूर्ण भूमिका" निभाती रही है। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में ऑर्गेनिक और नेचुरल खान पान की माँग तेज़ी से बढ़ रही है।

स्वाद नहीं, 'जिंदगी का स्वाद'

अलग बातचीत में क्वात्रा ने कहा कि भारतीय मसालों का प्रसार अमेरिकी समाज में अब केवल खाने के ज़ायके तक महदूद नहीं है। उनके शब्दों में, "असल में, यह जिंदगी का स्वाद है क्योंकि यह आपके शरीर और आपकी समग्र सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है।" राजदूत ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में न केवल मसाले अमेरिकी घरों तक पहुँचे हैं, बल्कि उनके स्वास्थ्य संबंधी फायदों के बारे में जागरूकता भी बढ़ी है।

क्वात्रा ने ऑर्गेनिक फूड के मौजूदा चलन को भी भारतीय मसालों की परंपरा से जोड़ा। उन्होंने कहा, "असल में ऑर्गेनिक फूड तो पुराना खाना है और पुराना सेहतमंद खाना है। एक तरह से आधुनिक ट्रेंड अपनी जड़ों की ओर लौटना है।"

भारतीय मसालों का वैश्विक विस्तार

हल्दी, जीरा, मिर्च, सौंफ और काली मिर्च जैसे मसाले सदियों से भारत के वैश्विक व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों की रीढ़ रहे हैं। गौरतलब है कि हल्दी से बने उत्पाद और पेय अब केवल भारतीय विशेष दुकानों तक सीमित नहीं रहे — अमेरिका के बड़े सुपरमार्केट और वेलनेस चेन में इनकी उपस्थिति तेज़ी से बढ़ी है।

क्वात्रा ने यह भी स्पष्ट किया कि दीर्घकालिक संबंध बनाने के लिए केवल मसालों की मार्केटिंग पर्याप्त नहीं है — उनके इतिहास और जीवनशैली से उनके गहरे संबंध को समझना भी ज़रूरी है। उन्होंने कहा, "यह मेरी परवरिश का हिस्सा है।" इस दिशा में भारतीय दूतावास का प्रयास व्यापार और संस्कृति, दोनों मोर्चों पर जारी रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह सवाल भी उठता है कि क्या इस 'सांस्कृतिक पहुँच' को ठोस निर्यात नीति और गुणवत्ता मानकों से जोड़ा जा रहा है — खासकर तब जब अमेरिका और यूरोप में भारतीय मसालों पर कीटनाशक अवशेष को लेकर नियामकीय जाँच की खबरें आती रही हैं। सांस्कृतिक गर्व और वाणिज्यिक विश्वसनीयता — दोनों एक साथ साधने होंगे।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने भारतीय मसालों के बारे में क्या कहा?
क्वात्रा ने कहा कि भारतीय मसाले अमेरिकी घरों तक 'भारतीयता का एक अहम हिस्सा' पहुँचा रहे हैं और इनकी लोकप्रियता केवल स्वाद तक नहीं, बल्कि सेहत और वेलनेस तक फैल गई है। यह बयान 7 अक्टूबर 2026 को वॉशिंगटन के इंडिया हाउस में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में दिया गया।
अमेरिका में हल्दी लट्टे की लोकप्रियता का भारत से क्या संबंध है?
राजदूत क्वात्रा ने बताया कि 2010 2013 की अपनी पिछली वॉशिंगटन पोस्टिंग के दौरान उन्हें किसी अमेरिकी कैफे में हल्दी लट्टे नहीं मिला था, जबकि आज यह अमेरिकी फूड और वेलनेस मार्केट में आम हो गया है। उन्होंने इसे भारतीय आयुर्वेदिक परंपरा की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रतीक बताया।
भारतीय मसाले अमेरिका में किस हद तक लोकप्रिय हो रहे हैं?
हल्दी, जीरा, मिर्च, सौंफ और काली मिर्च जैसे मसाले अब केवल भारतीय विशेष दुकानों तक सीमित नहीं रहे — अमेरिका के बड़े सुपरमार्केट और वेलनेस चेन में इनकी उपस्थिति तेज़ी से बढ़ी है। क्वात्रा के अनुसार, भारतीय मसाले अब अमेरिकी खान पान की आदतों का हिस्सा बन रहे हैं।
इंडिया हाउस में आयोजित मसाला कार्यक्रम में कौन शामिल हुए?
इस कार्यक्रम में अमेरिकन स्पाइस ट्रेड एसोसिएशन के सदस्य, फूड इंडस्ट्री के प्रतिनिधि और आमंत्रित अतिथि शामिल हुए। यह कार्यक्रम वॉशिंगटन स्थित भारतीय राजदूत के आवास 'इंडिया हाउस' में आयोजित किया गया था।
क्वात्रा ने ऑर्गेनिक फूड ट्रेंड को भारतीय मसालों से कैसे जोड़ा?
राजदूत ने कहा कि जिसे आज 'ऑर्गेनिक फूड' कहा जाता है, वह असल में पुराना और सेहतमंद खाना है — यानी आधुनिक ट्रेंड दरअसल अपनी जड़ों की ओर लौटना है। उनके अनुसार भारतीय मसाले इस ट्रेंड के सबसे प्रामाणिक उदाहरण हैं।
राष्ट्र प्रेस
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