7 अक्टूबर 2026
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भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता: अमेरिकी मसाला उद्योग ने माँगी भारतीय मसालों पर स्थायी टैरिफ छूट

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भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता: अमेरिकी मसाला उद्योग ने माँगी भारतीय मसालों पर स्थायी टैरिफ छूट

सारांश

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में एक नया और अहम आयाम जुड़ गया है — अमेरिकी मसाला उद्योग चाहता है कि भारतीय मसालों पर टैरिफ छूट सिर्फ बनी न रहे, बल्कि स्थायी हो। $70 करोड़ के सालाना आयात और 18 महीनों की सक्रिय लॉबिंग के साथ, यह माँग व्यापार समझौते में भारत के लिए एक मज़बूत सौदेबाज़ी का पत्ता बन सकती है।

मुख्य बातें

ASTA ने 7 अक्टूबर 2026 को भारतीय मसालों पर टैरिफ छूट को स्थायी बनाने की औपचारिक माँग की।
पिछले वर्ष अमेरिका ने भारत से लगभग ₹5,880 करोड़ (700 मिलियन डॉलर) मूल्य के मसालों का आयात किया।
भारत ISO -मान्यता प्राप्त 109 मसालों में से आधे से अधिक का उत्पादन करता है।
ASTA पिछले 18 महीनों से भारतीय दूतावास के साथ टैरिफ मुद्दों पर सक्रिय संवाद कर रहा है।
ASTA अमेरिका में मसाला आयात, प्रसंस्करण और विपणन करने वाली लगभग 100 कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है।
अमेरिका जीरा, सौंफ और मिर्च सहित अधिकांश मसालों के लिए भारत पर निर्भर है, क्योंकि इनका घरेलू उत्पादन संभव नहीं।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर जारी बातचीत के बीच अमेरिकन स्पाइस ट्रेड एसोसिएशन (ASTA) ने 7 अक्टूबर 2026 को माँग की है कि भारतीय मसालों पर दी जा रही मौजूदा टैरिफ छूट को न केवल बनाए रखा जाए, बल्कि उसे स्थायी स्वरूप दिया जाए। संगठन का तर्क है कि जीरा, सौंफ और मिर्च जैसे दर्जनों मसालों का व्यावसायिक उत्पादन अमेरिका में संभव नहीं है, इसलिए भारत पर निर्भरता अपरिहार्य है।

उद्योग की प्राथमिकता और माँग

ASTA के अध्यक्ष डोनाल्ड प्रैट ने बुधवार को कहा कि उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता उन कृषि उत्पादों के लिए टैरिफ छूट बनाए रखना है जो अमेरिका में उगाए नहीं जा सकते, परंतु अमेरिकी उपभोक्ताओं और व्यवसायों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय दूतावास और व्यापार वार्ता में शामिल अन्य पक्ष इस मुद्दे को सक्रियता से उठा रहे हैं।

प्रैट के अनुसार, पिछले लगभग 18 महीनों से ASTA भारतीय दूतावास के साथ टैरिफ संबंधी मुद्दों पर निरंतर संवाद कर रहा है और दोनों पक्षों के बीच बातचीत व्यावहारिक एवं सहयोगात्मक रही है। उन्होंने कहा, 'भारत एक ऐसा देश है जिसके साथ हम, हमारा उद्योग, कई वर्षों से व्यापार कर रहे हैं। वास्तव में, जिस कंपनी में मैं काम करता हूँ, वह भी कई वर्षों से भारत के साथ व्यापार कर रही है।'

भारत और अमेरिका के बीच मसाला व्यापार का आकार

प्रैट ने बताया कि अमेरिका भारतीय मसालों का सबसे बड़ा बाज़ार है और पिछले वर्ष अमेरिका ने भारत से लगभग ₹5,880 करोड़ (700 मिलियन डॉलर) मूल्य के मसालों का आयात किया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (ISO) द्वारा मान्यता प्राप्त 109 मसालों में से आधे से अधिक का उत्पादन करता है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिशें तेज़ हुई हैं। गौरतलब है कि अमेरिका अपनी आवश्यकता के मसालों का केवल एक छोटा हिस्सा ही स्वयं उत्पादित करता है; जीरा, सौंफ, मिर्च और दर्जनों अन्य मसालों की आपूर्ति के लिए वह मुख्यतः भारत पर निर्भर है।

ASTA का अभियान और टैरिफ छूट की पृष्ठभूमि

ASTA ने मसालों को नए टैरिफ प्रतिबंधों से बाहर रखने के लिए सक्रिय अभियान चलाया। इसका परिणाम यह रहा कि अधिकांश मसालों को अमेरिकी टैरिफ छूट सूची में शामिल किया गया, क्योंकि उन्हें ऐसे प्राकृतिक संसाधन माना गया जिनका पर्याप्त घरेलू उत्पादन अमेरिका में उपलब्ध नहीं है।

ASTA की विज्ञान एवं नियामक समिति के अध्यक्ष रॉबर्टो फानी ने स्पष्ट किया कि यदि मसालों पर टैरिफ लगाया भी जाए तो इससे किसी घरेलू अमेरिकी उद्योग को विशेष लाभ नहीं मिलेगा, क्योंकि वहाँ इनका पर्याप्त उत्पादन ही नहीं होता। फानी ने यह भी कहा कि भारतीय उत्पादक अब अमेरिकी खाद्य सुरक्षा और अनुपालन मानकों को बेहतर ढंग से समझ रहे हैं, जिससे व्यापार को और गति मिलने की संभावना है।

ASTA की कार्यकारी निदेशक का बयान

ASTA की कार्यकारी निदेशक लौरा शूमर ने भारत को अमेरिका का सबसे महत्वपूर्ण मसाला व्यापार साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि मात्रा, विविधता और मूल्य — तीनों मानकों पर भारतीय मसालों पर अमेरिकी उद्योग की निर्भरता सर्वाधिक है। ASTA लगभग 100 कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है जो अमेरिका में मसालों का आयात, प्रसंस्करण, विनिर्माण और विपणन करती हैं।

आगे क्या

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की वार्ता में मसाला क्षेत्र की यह माँग एक महत्वपूर्ण बिंदु बन गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि समझौते में टैरिफ छूट को स्थायी रूप से संरक्षित किया जाता है, तो भारतीय मसाला निर्यातकों को दीर्घकालिक बाज़ार स्थिरता मिलेगी और अमेरिकी खाद्य उद्योग की आपूर्ति श्रृंखला भी सुरक्षित रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो बात मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर छूट जाती है, वह यह है कि टैरिफ छूट की माँग के पीछे ASTA की अपनी व्यावसायिक लागत बचाने की मजबूरी भी है — यह केवल भारत के प्रति सद्भावना नहीं है। भारत को चाहिए कि वह इस आपसी निर्भरता को एकतरफा रियायत की बजाय स्थायी, सत्यापन-योग्य और पारस्परिक शर्तों पर समझौते में तब्दील करे।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ASTA ने भारतीय मसालों पर टैरिफ छूट की माँग क्यों की है?
अमेरिकन स्पाइस ट्रेड एसोसिएशन (ASTA) का तर्क है कि जीरा, सौंफ, मिर्च जैसे अधिकांश मसाले अमेरिका में व्यावसायिक स्तर पर उगाए नहीं जा सकते, इसलिए भारत से आयात अपरिहार्य है। इन पर टैरिफ लगाने से किसी घरेलू अमेरिकी उद्योग को लाभ नहीं होगा, बल्कि उपभोक्ताओं और खाद्य व्यवसायों की लागत बढ़ेगी।
अमेरिका भारत से कितने मूल्य के मसाले आयात करता है?
ASTA अध्यक्ष डोनाल्ड प्रैट के अनुसार, पिछले वर्ष अमेरिका ने भारत से लगभग 700 मिलियन डॉलर (करीब ₹5,880 करोड़) मूल्य के मसालों का आयात किया। अमेरिका भारतीय मसालों का सबसे बड़ा एकल बाज़ार है।
भारत मसाला उत्पादन में कितना महत्वपूर्ण है?
भारत ISO द्वारा मान्यता प्राप्त 109 मसालों में से आधे से अधिक का उत्पादन करता है। मात्रा, विविधता और मूल्य — तीनों मानकों पर अमेरिकी मसाला उद्योग की सर्वाधिक निर्भरता भारत पर है, यह ASTA की कार्यकारी निदेशक लौरा शूमर ने कहा।
ASTA और भारतीय दूतावास के बीच टैरिफ पर बातचीत कब से चल रही है?
ASTA पिछले लगभग 18 महीनों से भारतीय दूतावास के साथ टैरिफ संबंधी मुद्दों पर निरंतर संवाद कर रहा है। प्रैट के अनुसार यह बातचीत व्यावहारिक और सहयोगात्मक रही है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में मसाला टैरिफ छूट का क्या महत्व है?
यदि प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में मसालों की टैरिफ छूट को स्थायी रूप से संरक्षित किया जाता है, तो भारतीय मसाला निर्यातकों को दीर्घकालिक बाज़ार स्थिरता मिलेगी। साथ ही, अमेरिकी खाद्य उद्योग की आपूर्ति श्रृंखला भी सुरक्षित रहेगी, जो लगभग 100 ASTA-सदस्य कंपनियों के संचालन के लिए आवश्यक है।
राष्ट्र प्रेस
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