भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता में टैरिफ समस्या प्रमुख, सेब आयात पर चल रही चर्चा: ग्रीर

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भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता में टैरिफ समस्या प्रमुख, सेब आयात पर चल रही चर्चा: ग्रीर

सारांश

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता में टैरिफ बाधाओं को एक महत्वपूर्ण मुद्दा बताया गया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने कहा कि भारत सेब पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा रहा है, जिससे अमेरिकी सेबों की हिस्सेदारी में कमी आई है।

Key Takeaways

  • टैरिफ व्यापार वार्ता का एक मुख्य मुद्दा है।
  • भारत ने सेब पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है।
  • अमेरिकी सेबों की बाजार हिस्सेदारी में कमी आई है।
  • वार्ता में संतुलित समझौता आवश्यक है।
  • बातचीत अभी जारी है और कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

वाशिंगटन, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका ने भारत में मौजूद टैरिफ बाधाओं को व्यापार वार्ताओं में एक मुख्य मुद्दा बताते हुए इसे महत्वपूर्ण करार दिया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने सांसदों को बताया कि वॉशिंगटन अमेरिकी निर्यात के लिए बेहतर बाजार पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दे रहा है।

वित्तीय वर्ष 2027 के लिए अपने कार्यालय के बजट पर एक कांग्रेस की सुनवाई के दौरान ग्रीर ने कहा कि अमेरिका पिछले एक वर्ष से भारत के साथ बातचीत कर रहा है, जिससे एक पारस्परिक व्यापार ढांचा तैयार किया जा सके। इसमें कृषि क्षेत्र सबसे बड़ा विवाद का मुद्दा बनकर उभरा है।

उन्होंने बताया, “हम पिछले एक साल से भारतीयों के साथ सहयोग कर रहे हैं। मैंने इस सप्ताह उनके राजदूत से मुलाकात की ताकि इस समझौते को आगे बढ़ाया जा सके।”

उन्होंने यह भी बताया कि एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल अगले सप्ताह अमेरिका का दौरा करने जा रहा है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि टैरिफ की बाधाएं अभी भी एक बड़ी समस्या बनी हुई हैं, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां अमेरिकी निर्यातकों की स्थिति कमजोर है। “हमने सेब के बारे में कई बार चर्चा की है। मैंने स्वयं यह मुद्दा अपने समकक्ष के सामने उठाया है,” उन्होंने कहा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह विषय उच्च स्तर पर भी उठाया गया है।

अमेरिकी सांसदों ने कहा कि भारत ने सेब पर 50 प्रतिशत टैरिफ लागू किया है, जो एक बड़ा उदाहरण है। इस कारण अमेरिकी सेबों की बाजार में हिस्सेदारी काफी कम हो गई है। 2018 में भारत के सेब आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 53 प्रतिशत थी, जो अब घट कर लगभग 8.5 प्रतिशत रह गई है। इस बीच, ईरान, तुर्की और अफगानिस्तान जैसे देशों की हिस्सेदारी बढ़ी है।

ग्रीर ने कहा कि अमेरिका चाहता है कि एक ऐसा संतुलित समझौता हो जिसमें अमेरिकी निर्यातकों को भी उन बाजारों में बराबरी का मौका मिले, जहां भारत अभी भी आयात पर निर्भर है।

उन्होंने कहा, “अगर भारत सेब आयात करता है, तो हम चाहते हैं कि वह अमेरिका से भी सेब खरीदे,” लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका भारत के घरेलू किसानों को नुकसान पहुँचाने का प्रयास नहीं कर रहा है।

ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं, जब ट्रंप प्रशासन अपनी व्यापक रणनीति के तहत टैरिफ का उपयोग करके व्यापार समझौतों को अपने पक्ष में करने और व्यापार संबंधों को नए तरीके से बनाने का प्रयास कर रहा है।

ग्रीर ने सांसदों को बताया कि अमेरिका कई देशों के साथ समझौते कर चुका है और अब अमेरिकी किसानों और उद्योगों के लिए निर्यात के अवसर बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

सांसदों ने कहा कि टैरिफ के कारण अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं की लागत बढ़ी है, और साथ ही दूसरे देशों की ओर से उठाए गए जवाबी कदमों ने निर्यात को और अधिक कठिन बना दिया है।

अमेरिकी कृषि उत्पादकों के लिए भारत एक बड़ा अवसर भी है और एक बड़ी चुनौती भी।

सांसदों ने चेतावनी दी कि यदि टैरिफ कम नहीं किए गए, तो अमेरिकी निर्यातक उन देशों से पीछे रह जाएंगे जिनके साथ भारत के बेहतर व्यापारिक समझौते हैं।

ग्रीर ने जोर देकर कहा कि बातचीत अभी भी जारी है और कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा, “इन बातचीत में तब तक कुछ तय नहीं होता, जब तक सब कुछ फाइनल न हो जाए।”

Point of View

लेकिन यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि घरेलू किसानों को नुकसान न पहुंचे।
NationPress
18/04/2026

Frequently Asked Questions

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता में टैरिफ का क्या महत्व है?
टैरिफ व्यापार वार्ता में एक महत्वपूर्ण मुद्दा है क्योंकि यह अमेरिकी निर्यातकों की बाजार पहुंच को प्रभावित करता है।
भारत ने सेब पर कितना टैरिफ लगाया है?
भारत ने सेब पर 50 प्रतिशत टैरिफ लागू किया है।
क्या अमेरिका और भारत के बीच व्यापार वार्ता सफल होगी?
यह वार्ता सफल होने की संभावना है, अगर दोनों पक्ष संतुलित समझौते पर सहमत होते हैं।
क्या टैरिफ के कारण अमेरिकी कंपनियों को नुकसान हो रहा है?
हाँ, टैरिफ के कारण अमेरिकी कंपनियों की लागत बढ़ रही है।
भारत में अमेरिकी सेबों की हिस्सेदारी कितनी है?
भारत में अमेरिकी सेबों की हिस्सेदारी अब घटकर लगभग 8.5 प्रतिशत रह गई है।
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