30 जून 2026
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भारत अब वैश्विक आधारस्तंभ बन चुका है — राजदूत विनय क्वात्रा का USISPF समिट में बड़ा बयान

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भारत अब वैश्विक आधारस्तंभ बन चुका है — राजदूत विनय क्वात्रा का USISPF समिट में बड़ा बयान

सारांश

वाशिंगटन में USISPF समिट में राजदूत विनय क्वात्रा का संदेश साफ था — भारत अब केवल साझेदार नहीं, वैश्विक व्यवस्था का आधारस्तंभ है। 4.3 ट्रिलियन से 25–30 ट्रिलियन डॉलर की यात्रा, मिशन 500 और बायोसार्थी 2026 — यह भारत-अमेरिका सहयोग के एक नए अध्याय की शुरुआत है।

मुख्य बातें

राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने 30 जून 2026 को USISPF लीडरशिप समिट, वाशिंगटन में कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का अपरिहार्य आधारस्तंभ बन चुका है।
भारत की अर्थव्यवस्था अभी 4.3 ट्रिलियन डॉलर ; दशक के अंत तक 7 ट्रिलियन , 2030 के मध्य तक 14 ट्रिलियन और 2047 तक 25–30 ट्रिलियन डॉलर का अनुमान।
भारत-अमेरिका मिशन 500 के तहत 2030 तक 500 बिलियन डॉलर द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य; अभी 240 बिलियन डॉलर पर।
हाल ही में लॉन्च बायोसार्थी 2026 पहल और भारत में 12,000 बायोटेक स्टार्टअप को अमेरिकी वेंचर कैपिटल से जोड़ने पर जोर।
माइक्रोन की सेमीकंडक्टर फैसिलिटी के साथ भारत में पायलट प्रोडक्शन 2026 के अंत तक और कमर्शियल प्रोडक्शन 2027 तक अपेक्षित।
AI, बायोटेक और सेमीकंडक्टर को भारत-अमेरिका तकनीकी सहयोग के तीन प्राथमिक स्तंभ बताया गया।

अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने 30 जून 2026 को वाशिंगटन में आयोजित अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी फोरम (USISPF) लीडरशिप समिट में कहा कि भारत अब केवल एक आवश्यक वैश्विक साझेदार नहीं रहा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का एक अपरिहार्य आधारस्तंभ बन चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह स्थान भारत ने निरंतर आर्थिक विकास, विश्वसनीय साझेदारी और तकनीकी रूपांतरण के बल पर हासिल किया है।

भारत की वैश्विक भूमिका का नया आयाम

क्वात्रा ने समिट में कहा, "मैं कहूंगा कि जिस तरह की चुनौतियों और मुश्किलों का हम सामना कर रहे हैं, उन्हें देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी का भारत सिर्फ एक जरूरी स्तंभ नहीं है। मुझे लगता है कि यह ग्लोबल ऑर्डर, आर्थिक विकास, स्थिरता, भरोसे और विश्वसनीयता का एक जरूरी सहारा है।" उन्होंने भारत की बढ़ती भूमिका के पीछे तीन प्रमुख कारण गिनाए: तेज़ी से बदलती घरेलू अर्थव्यवस्था, लगातार अनिश्चित होता भू-राजनीतिक माहौल और संरचनात्मक सुधार जिन्होंने देश की आर्थिक नींव को मज़बूत किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुई आर्थिक प्रगति ने, उनके अनुसार, भारत को भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच एक स्थिर और भरोसेमंद साझेदार की भूमिका में ला खड़ा किया है।

आत्मनिर्भर भारत: अंदर की ओर नहीं, बाहर की ओर

राजदूत क्वात्रा ने 'आत्मनिर्भर भारत' की अवधारणा को लेकर एक महत्त्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भरता की ऐसी अवधारणा प्रस्तुत की है, जो आत्मकेंद्रित नहीं, बल्कि वैश्विक सहयोग के साथ संतुलित है। यह ऐसा इकोसिस्टम है, जो सकारात्मक वैश्विक प्रभाव पैदा करता है।" उन्होंने कहा कि यह दृष्टिकोण वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी मैन्युफैक्चरिंग और सुदृढ़ सप्लाई चेन विकसित करने के लिए बनाया गया है, न कि अलगाव की नीति के तहत।

क्वात्रा ने आर्थिक सुरक्षा के व्यापक दायरे की बात करते हुए कहा, "खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा — आप इन तीनों और कई दूसरी सुरक्षा को आर्थिक सुरक्षा के बड़े दायरे में ला सकते हैं।"

अर्थव्यवस्था का आकार: ₹4.3 ट्रिलियन से ₹25–30 ट्रिलियन की राह

क्वात्रा ने भारत की आर्थिक यात्रा का एक महत्त्वाकांक्षी खाका पेश किया। उनके अनुसार भारत, जो अभी 4.3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था है, इस दशक के अंत तक लगभग 7 ट्रिलियन डॉलर, 2030 के दशक के मध्य तक लगभग 14 ट्रिलियन डॉलर और 2047 तक 25 से 30 ट्रिलियन डॉलर के बीच पहुँचने की राह पर है। गौरतलब है कि ये अनुमान राजदूत के अपने आकलन हैं और आधिकारिक सरकारी प्रक्षेपण नहीं हैं।

तकनीक और बायोटेक: भारत-अमेरिका सहयोग का अगला चरण

राजदूत ने कहा कि उभरती तकनीकें — विशेष रूप से बायोटेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर — भारत-अमेरिका सहयोग के अगले चरण को परिभाषित करेंगी। हाल ही में लॉन्च हुए बायोसार्थी 2026 पहल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत बायोटेक और बायोफार्मास्युटिकल्स में इनोवेशन की नई लहर के लिए तैयार है।

उन्होंने बताया कि भारत में बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्र में लगभग 12,000 स्टार्टअप हैं और इन्हें अमेरिकी वेंचर कैपिटल इकोसिस्टम से जोड़ने से दोनों देशों के बीच इनोवेशन और मज़बूत होगा। बायोटेक्नोलॉजी को प्रधानमंत्री मोदी के अमेरिकी दौरे के दौरान लॉन्च किए गए द्विपक्षीय TRUST पहल का एक केंद्रीय स्तंभ बताया गया।

सेमीकंडक्टर क्षेत्र में प्रगति का उल्लेख करते हुए क्वात्रा ने कहा, "दो, तीन साल पहले, हमारे पास न के बराबर सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री थी। उम्मीद है कि पायलट प्रोडक्शन इस साल के अंत तक और कमर्शियल प्रोडक्शन अगले साल के अंत तक शुरू हो जाएगा।" उन्होंने माइक्रोन की फैसिलिटी को इस परिवर्तन का ठोस उदाहरण बताया।

मिशन 500: 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य

क्वात्रा ने बताया कि भारत और अमेरिका ने 2030 तक 500 बिलियन डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य — जिसे 'मिशन 500' कहा जा रहा है — तय किया है, जबकि फिलहाल यह आँकड़ा लगभग 240 बिलियन डॉलर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लक्ष्य केवल आयात-निर्यात बढ़ाने से नहीं, बल्कि सुदृढ़ सप्लाई चेन, बढ़ते निवेश, मैन्युफैक्चरिंग सहयोग और कुशल प्रतिभा की गतिशीलता से हासिल होगा।

भारत इस साल के G20 समिट में अमेरिका के साथ मिलकर काम करने को लेकर उत्सुक है। क्वात्रा ने याद दिलाया कि नई दिल्ली ने तनावपूर्ण भू-राजनीतिक माहौल के बावजूद अपनी G20 अध्यक्षता के दौरान आम सहमति बनाने में सफलता पाई थी। आने वाले वर्षों में भारत-अमेरिका संबंधों की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों देश इन महत्त्वाकांक्षी लक्ष्यों को ज़मीन पर कितनी तेज़ी से उतार पाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा मिशन 500 में है। 240 से 500 बिलियन डॉलर की छलांग के लिए जिस गहरे सप्लाई-चेन एकीकरण और प्रतिभा-गतिशीलता की बात क्वात्रा ने की, वह अभी तक नीतिगत इरादे से आगे नहीं बढ़ी है। बायोसार्थी और सेमीकंडक्टर जैसी पहलें उत्साहजनक हैं, पर 12,000 स्टार्टअप को अमेरिकी पूंजी से जोड़ना और माइक्रोन की एक फैसिलिटी को पूरे इकोसिस्टम में बदलना — दोनों में क्रियान्वयन की खाई अभी बड़ी है। 2047 के 25–30 ट्रिलियन डॉलर के अनुमान प्रेरक हैं, लेकिन वे राजदूत के अपने आकलन हैं; इन्हें सत्यापन-योग्य मील के पत्थरों से जोड़े बिना ये महत्त्वाकांक्षी भाषण से अधिक नहीं बन पाएंगे।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

USISPF समिट में राजदूत विनय क्वात्रा ने क्या कहा?
राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने 30 जून 2026 को वाशिंगटन में USISPF लीडरशिप समिट में कहा कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का अपरिहार्य आधारस्तंभ बन चुका है — न केवल एक आवश्यक साझेदार। उन्होंने आर्थिक विकास, तकनीकी सहयोग और विश्वसनीयता को इस भूमिका की बुनियाद बताया।
भारत-अमेरिका मिशन 500 क्या है?
मिशन 500 भारत और अमेरिका का वह द्विपक्षीय लक्ष्य है जिसके तहत 2030 के अंत तक आपसी व्यापार को 500 बिलियन डॉलर तक पहुँचाना है। फिलहाल यह व्यापार लगभग 240 बिलियन डॉलर पर है और इसे हासिल करने के लिए सप्लाई चेन एकीकरण, निवेश और कुशल प्रतिभा की गतिशीलता ज़रूरी बताई गई है।
बायोसार्थी 2026 पहल क्या है और इसका भारत-अमेरिका संबंधों से क्या लेना-देना है?
बायोसार्थी 2026 हाल ही में लॉन्च की गई एक पहल है जिसका उद्देश्य भारत में बायोटेक्नोलॉजी और बायोफार्मास्युटिकल्स में इनोवेशन को बढ़ावा देना है। राजदूत क्वात्रा के अनुसार यह प्रधानमंत्री मोदी के अमेरिकी दौरे पर लॉन्च हुई द्विपक्षीय TRUST पहल का केंद्रीय स्तंभ है, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग, व्यापार, शोध और रेगुलेटरी सहयोग के चार रास्ते शामिल हैं।
भारत में सेमीकंडक्टर उत्पादन कब तक शुरू होगा?
राजदूत क्वात्रा के अनुसार माइक्रोन की फैसिलिटी के साथ भारत में पायलट प्रोडक्शन 2026 के अंत तक और कमर्शियल प्रोडक्शन 2027 के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है। यह उल्लेखनीय है क्योंकि दो-तीन साल पहले तक भारत में लगभग कोई सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम नहीं था।
2047 तक भारत की अर्थव्यवस्था कितनी बड़ी होगी?
राजदूत क्वात्रा के अनुमान के अनुसार भारत, जो अभी 4.3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था है, इस दशक के अंत तक लगभग 7 ट्रिलियन, 2030 के दशक के मध्य तक लगभग 14 ट्रिलियन और 2047 तक 25 से 30 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच सकती है। ये राजदूत के व्यक्तिगत आकलन हैं और आधिकारिक सरकारी अनुमान नहीं हैं।
राष्ट्र प्रेस
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