'दिमागी नक्सली' बयान पर कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी का पलटवार: 'पहले संविधान पढ़ें'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने 15 अगस्त 2026 को चंडीगढ़ में तिरंगा यात्रा में भाग लेकर राष्ट्रीय ध्वज फहराया और 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'दिमागी नक्सली' वाले बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जो लोग शांतिपूर्ण विरोध को नक्सलवाद से जोड़ रहे हैं, उन्हें पहले भारत का संविधान ठीक से पढ़ना चाहिए।
प्रधानमंत्री का 'दिमागी नक्सली' बयान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में कहा कि जंगलों में हथियारबंद नक्सलवाद के खिलाफ देश को सफलता मिली है, लेकिन अब 'दिमागी नक्सल' सक्रिय हैं जो हिंसा और अराजकता के रास्ते खोज रहे हैं। उन्होंने कहा, 'इन दिमागी नक्सलियों को पहचानना होगा, इन्हें आइसोलेट करना होगा और देश की युवा पीढ़ी को विकसित राष्ट्र बनाने की मुख्यधारा से जोड़ना होगा।'
मनीष तिवारी की तीखी प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा, 'हमारा संविधान इस बात का अधिकार देता है कि हम शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध प्रदर्शन कर सकें और संगठित हो सकें। संविधान में यह कहीं नहीं लिखा है कि अगर विरोध प्रदर्शन करने के लिए संगठित होते हैं, उनके ऊपर लाठियाँ बरसाई जाएं, पैलेट गन से मारा जाए।' उन्होंने आगे कहा कि जो लोग इस तरह की नसीहत दे रहे हैं, उनसे उनका आग्रह है कि वे भारत के संविधान को ठीक तरीके से पढ़ लें।
यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच असहमति की अभिव्यक्ति को लेकर बहस तेज़ हो रही है। आलोचकों का कहना है कि 'दिमागी नक्सली' जैसे व्यापक शब्द का प्रयोग वैध असहमति को भी अपराधीकरण की श्रेणी में ला सकता है।
महिला आरक्षण पर कांग्रेस का रुख
प्रधानमंत्री के संबोधन में महिला आरक्षण का उल्लेख होने पर मनीष तिवारी ने कहा कि महिला आरक्षण पर पहल सबसे पहले कांग्रेस ने की थी। उन्होंने कहा कि लोकसभा की 543 सीटों में से एक तिहाई महिला शक्ति को मिलनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिसीमन के नाम पर महिला आरक्षण को भटकाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इसका कानून पहले ही पारित हो चुका है।
तिवारी ने कहा, 'सिर्फ यह सुनिश्चित करना है कि वह 2029 में क्रियान्वित होगा या परिसीमन के साथ क्रियान्वित करना चाहते हैं।' गौरतलब है कि महिला आरक्षण कानून के क्रियान्वयन की तिथि को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच मतभेद बने हुए हैं।
80वें स्वतंत्रता दिवस पर संदेश
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर 144 करोड़ भारतीयों को बधाई देते हुए कहा, 'यह आज़ादी हमारे उन पूर्वजों के बलिदान का प्रमाण है, जिन्होंने बहुत कष्ट सहे, लेकिन संघर्ष का रास्ता कभी नहीं छोड़ा। आज इस स्वतंत्रता को और सुदृढ़ करना हमारा कर्तव्य और हमारी ज़िम्मेदारी बनती है।'
आगे क्या होगा
प्रधानमंत्री के इस बयान पर राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है। विपक्षी दल इस मुद्दे को संसद के अगले सत्र में उठा सकते हैं, जबकि नागरिक समाज संगठन भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संदर्भ में इस बयान की व्याख्या पर सवाल उठा रहे हैं।