15 अगस्त 2026
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'दिमागी नक्सली' बयान पर कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी का पलटवार: 'पहले संविधान पढ़ें'

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'दिमागी नक्सली' बयान पर कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी का पलटवार: 'पहले संविधान पढ़ें'

सारांश

PM मोदी के 'दिमागी नक्सली' बयान ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर राजनीतिक बहस छेड़ दी। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने चंडीगढ़ से पलटवार किया — संविधान की दुहाई देते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध को नक्सलवाद से जोड़ना असंवैधानिक है।

मुख्य बातें

PM मोदी ने 15 अगस्त 2026 को लाल किले से 'दिमागी नक्सलियों' को पहचानने और आइसोलेट करने का आह्वान किया।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने चंडीगढ़ में तिरंगा यात्रा के दौरान इस बयान पर तीखी आपत्ति जताई।
तिवारी ने कहा — संविधान शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार देता है; लाठी या पैलेट गन का उल्लेख असंवैधानिक है।
महिला आरक्षण पर तिवारी ने कहा कि 543 लोकसभा सीटों में से एक तिहाई महिलाओं को मिलनी चाहिए और परिसीमन से इसे नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
कानून पारित हो चुका है; 2029 में क्रियान्वयन पर सरकार का रुख अभी स्पष्ट नहीं।

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने 15 अगस्त 2026 को चंडीगढ़ में तिरंगा यात्रा में भाग लेकर राष्ट्रीय ध्वज फहराया और 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'दिमागी नक्सली' वाले बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जो लोग शांतिपूर्ण विरोध को नक्सलवाद से जोड़ रहे हैं, उन्हें पहले भारत का संविधान ठीक से पढ़ना चाहिए।

प्रधानमंत्री का 'दिमागी नक्सली' बयान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में कहा कि जंगलों में हथियारबंद नक्सलवाद के खिलाफ देश को सफलता मिली है, लेकिन अब 'दिमागी नक्सल' सक्रिय हैं जो हिंसा और अराजकता के रास्ते खोज रहे हैं। उन्होंने कहा, 'इन दिमागी नक्सलियों को पहचानना होगा, इन्हें आइसोलेट करना होगा और देश की युवा पीढ़ी को विकसित राष्ट्र बनाने की मुख्यधारा से जोड़ना होगा।'

मनीष तिवारी की तीखी प्रतिक्रिया

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा, 'हमारा संविधान इस बात का अधिकार देता है कि हम शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध प्रदर्शन कर सकें और संगठित हो सकें। संविधान में यह कहीं नहीं लिखा है कि अगर विरोध प्रदर्शन करने के लिए संगठित होते हैं, उनके ऊपर लाठियाँ बरसाई जाएं, पैलेट गन से मारा जाए।' उन्होंने आगे कहा कि जो लोग इस तरह की नसीहत दे रहे हैं, उनसे उनका आग्रह है कि वे भारत के संविधान को ठीक तरीके से पढ़ लें।

यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच असहमति की अभिव्यक्ति को लेकर बहस तेज़ हो रही है। आलोचकों का कहना है कि 'दिमागी नक्सली' जैसे व्यापक शब्द का प्रयोग वैध असहमति को भी अपराधीकरण की श्रेणी में ला सकता है।

महिला आरक्षण पर कांग्रेस का रुख

प्रधानमंत्री के संबोधन में महिला आरक्षण का उल्लेख होने पर मनीष तिवारी ने कहा कि महिला आरक्षण पर पहल सबसे पहले कांग्रेस ने की थी। उन्होंने कहा कि लोकसभा की 543 सीटों में से एक तिहाई महिला शक्ति को मिलनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिसीमन के नाम पर महिला आरक्षण को भटकाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इसका कानून पहले ही पारित हो चुका है।

तिवारी ने कहा, 'सिर्फ यह सुनिश्चित करना है कि वह 2029 में क्रियान्वित होगा या परिसीमन के साथ क्रियान्वित करना चाहते हैं।' गौरतलब है कि महिला आरक्षण कानून के क्रियान्वयन की तिथि को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच मतभेद बने हुए हैं।

80वें स्वतंत्रता दिवस पर संदेश

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर 144 करोड़ भारतीयों को बधाई देते हुए कहा, 'यह आज़ादी हमारे उन पूर्वजों के बलिदान का प्रमाण है, जिन्होंने बहुत कष्ट सहे, लेकिन संघर्ष का रास्ता कभी नहीं छोड़ा। आज इस स्वतंत्रता को और सुदृढ़ करना हमारा कर्तव्य और हमारी ज़िम्मेदारी बनती है।'

आगे क्या होगा

प्रधानमंत्री के इस बयान पर राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है। विपक्षी दल इस मुद्दे को संसद के अगले सत्र में उठा सकते हैं, जबकि नागरिक समाज संगठन भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संदर्भ में इस बयान की व्याख्या पर सवाल उठा रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

छात्र आंदोलन और नागरिक समाज सभी आ सकते हैं। मनीष तिवारी का संविधान की दुहाई देना सही दिशा में है, लेकिन कांग्रेस को यह भी स्पष्ट करना होगा कि वह महिला आरक्षण के क्रियान्वयन पर सरकार को किस ठोस समयसीमा पर जवाबदेह ठहराएगी — केवल बयानबाज़ी से नहीं।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने 'दिमागी नक्सली' किसे कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त 2026 को लाल किले से कहा कि हथियारबंद नक्सलवाद तो काफी हद तक समाप्त हुआ, लेकिन 'दिमागी नक्सल' अभी भी सक्रिय हैं जो हिंसा और अराजकता के रास्ते खोज रहे हैं और युवाओं को गलत दिशा में ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने इन्हें पहचानने और आइसोलेट करने का आह्वान किया।
मनीष तिवारी ने मोदी के बयान पर क्या आपत्ति जताई?
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि भारत का संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध और संगठित होने का अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि संविधान में कहीं नहीं लिखा कि विरोध करने वालों पर लाठी चलाई जाए या पैलेट गन से मारा जाए, और जो ऐसी नसीहत दे रहे हैं उन्हें संविधान ठीक से पढ़ना चाहिए।
महिला आरक्षण पर कांग्रेस का क्या रुख है?
मनीष तिवारी ने कहा कि महिला आरक्षण पर पहल सबसे पहले कांग्रेस ने की थी और लोकसभा की 543 सीटों में से एक तिहाई महिलाओं को मिलनी चाहिए। उनका कहना है कि महिला आरक्षण कानून पहले ही पारित हो चुका है और इसे परिसीमन से जोड़कर भटकाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
महिला आरक्षण कब लागू होगा?
महिला आरक्षण कानून संसद में पारित हो चुका है, लेकिन इसके क्रियान्वयन की तिथि को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। मनीष तिवारी ने सवाल उठाया कि क्या यह 2029 में लागू होगा या परिसीमन के साथ — जिसका जवाब सरकार ने अभी नहीं दिया है।
80वें स्वतंत्रता दिवस पर मनीष तिवारी ने क्या संदेश दिया?
मनीष तिवारी ने चंडीगढ़ में तिरंगा यात्रा में भाग लेकर 144 करोड़ भारतीयों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह आज़ादी पूर्वजों के बलिदान का प्रमाण है और इस स्वतंत्रता को सुदृढ़ करना हर नागरिक का कर्तव्य है।
राष्ट्र प्रेस
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