युवाओं को 'दिमागी नक्सल' कहना दुर्भाग्यपूर्ण: नाना पटोले का मोदी के लाल किला भाषण पर पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने 18 अगस्त 2026 को नागपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लाल किले की प्राचीर से देश के युवाओं को 'दिमागी नक्सल' कहना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। पटोले ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) को कांग्रेस और उसके नेताओं को देशभक्ति का पाठ पढ़ाने की कोई आवश्यकता नहीं है।
मुख्य घटनाक्रम
पटोले ने कहा कि जब देश के प्रधानमंत्री लाल किले से बोलते हैं, तो उनका संदेश पूरी दुनिया तक पहुँचता है। ऐसे में राष्ट्र के युवाओं को 'दिमागी नक्सल' जैसे शब्दों से संबोधित करना न केवल अपमानजनक है, बल्कि यह उस मंच की गरिमा के भी विपरीत है। उन्होंने 'वंदे मातरम' विवाद पर कहा कि यह गीत दो पदों में गाया जाता है और BJP का खुद को देशभक्त बताने का यह तरीका प्रधानमंत्री के भाषण की असल सामग्री से ध्यान भटकाने की कोशिश है।
युवाओं और जेन-जी पर BJP की भाषा
पटोले ने आरोप लगाया कि BJP ने पहले युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया और अब उन्हें अपमानजनक उपाधियाँ दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि 12 वर्षों में सरकार ने देश के युवाओं का भविष्य अंधकारमय किया, जिसके परिणामस्वरूप पूरे देश में युवा जागृत हुए और सत्तारूढ़ दल को चुनौती देने लगे। पटोले के अनुसार, युवा पीढ़ी को 'गटर' तक कहा गया है, और इस तरह के बयान सरकार के खिलाफ बढ़ते जन-असंतोष को और गहरा करेंगे।
राहुल गांधी को इलाहाबाद हाई कोर्ट से राहत
पटोले ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पक्ष में दिए गए निर्णय का भी उल्लेख किया और इसे सत्य की जीत बताया। इससे पूर्व कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा था कि राहुल गांधी के खिलाफ दर्जनों एफआईआर दर्ज की गई हैं और BJP ने हमेशा उन्हें निशाना बनाया है। उदित राज के अनुसार, "BJP उनसे डरती है, लेकिन अब इन सब का कोई फायदा नहीं हो रहा। वे राहुल गांधी को बदनाम करने और उनके खिलाफ झूठे मामले दर्ज करने की जितनी ज्यादा कोशिश करते हैं, राहुल गांधी उतने ही मजबूत होकर उभरते हैं।"
सरकार पर मुद्दे से भटकाने का आरोप
पटोले ने यह भी कहा कि कांग्रेस पर आरोप लगाकर सरकार मूल मुद्दों — बेरोज़गारी, युवाओं के भविष्य और जन-असंतोष — से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने चेताया कि छात्रों के जख्मों पर नमक छिड़कने का यह सिलसिला जारी रहा, तो सरकार को इसके राजनीतिक परिणाम भुगतने पड़ेंगे।
आगे क्या
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब स्वतंत्रता दिवस 2026 के भाषण को लेकर विपक्षी दलों और सत्तारूढ़ पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक जारी है। गौरतलब है कि 'दिमागी नक्सल' वाली टिप्पणी पर विपक्ष की एकजुट प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में संसदीय बहस का केंद्र बन सकती है।