17 अगस्त 2026
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केजरीवाल का पलटवार: 'दिमागी नक्सली' बयान पर मोदी को घेरा, भगत सिंह और आंबेडकर का दिया हवाला

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केजरीवाल का पलटवार: 'दिमागी नक्सली' बयान पर मोदी को घेरा, भगत सिंह और आंबेडकर का दिया हवाला

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी के 'दिमागी नक्सली' वाले बयान पर केजरीवाल का पलटवार — उन्होंने पूछा कि क्या भगत सिंह और आंबेडकर भी इसी परिभाषा में आते? सरकार से सवाल पूछने और बेहतर सुविधाएँ माँगने को देश-विरोध बताना लोकतंत्र पर सीधा सवाल है।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को लाल किले से 'दिमागी नक्सलियों' से सतर्क रहने की बात कही थी।
अरविंद केजरीवाल ने 17 अगस्त को इस बयान पर तीखा पलटवार किया और पूछा — सरकार से सवाल पूछने वाला क्या देश-विरोधी है?
केजरीवाल ने भगत सिंह और डॉ.
भीमराव आंबेडकर का उदाहरण देते हुए कहा कि इस परिभाषा से वे भी 'दिमागी नक्सली' कहलाते।
AAP नेताओं ने कहा कि असहमति और सवालों को राष्ट्र-विरोधी विचारधारा से जोड़ना लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है।
विपक्षी दल सरकार से 'दिमागी नक्सल' की स्पष्ट परिभाषा माँग सकते हैं।

आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने 17 अगस्त 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल किले से दिए गए स्वतंत्रता दिवस भाषण पर तीखी प्रतिक्रिया दी, विशेष रूप से 'दिमागी नक्सली' वाली टिप्पणी को लेकर। केजरीवाल ने सवाल उठाया कि क्या सरकार से जवाब माँगना, बेहतर सुविधाओं की माँग करना और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाना अब देश-विरोधी कार्य मान लिया जाएगा?

मूल विवाद: प्रधानमंत्री का 'दिमागी नक्सल' बयान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा था कि देश में हथियारबंद नक्सलवाद को काफी हद तक समाप्त किया जा चुका है, लेकिन अब 'दिमागी नक्सलियों' से भी सतर्क रहने की ज़रूरत है। प्रधानमंत्री के इसी बयान ने विपक्षी दलों में तीव्र प्रतिक्रिया उत्पन्न की, जिसमें AAP सबसे मुखर रही।

केजरीवाल की मुख्य आपत्तियाँ

केजरीवाल ने कहा कि जो नागरिक अपने बच्चों के लिए बेहतर सरकारी स्कूल, उन्नत अस्पताल, साफ पानी, बेहतर बिजली व्यवस्था और सीवर-ड्रेनेज सुविधाओं की माँग करता है, उसे 'दिमागी नक्सली' करार देना लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है। उनका कहना था कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और सरकार से सवाल पूछने की हिम्मत रखने वाले को इस दृष्टि से देखा जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि जो व्यक्ति भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना देखता है और ईमानदार व जवाबदेह शासन की माँग करता है, वह किसी भी कोण से देश-विरोधी नहीं हो सकता।

भगत सिंह और आंबेडकर का संदर्भ

केजरीवाल ने अपने तर्क को ऐतिहासिक आधार देते हुए स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी भगत सिंह का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि आज भगत सिंह जीवित होते और व्यवस्था परिवर्तन तथा आज़ादी के मूल मूल्यों की बात करते, तो प्रधानमंत्री के बयान के पैमाने पर उन्हें भी 'दिमागी नक्सली' कहा जा सकता था।

इसी क्रम में उन्होंने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर का उदाहरण देते हुए कहा कि जो व्यक्ति समानता, अधिकार और सामाजिक न्याय की बात करता है, क्या उसे भी इसी श्रेणी में रखा जाएगा? यह टिप्पणी सीधे तौर पर 'दिमागी नक्सल' की परिभाषा को चुनौती देती है।

AAP का व्यापक रुख

AAP के अन्य नेताओं ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा। पार्टी नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना, नागरिक सुविधाओं की माँग करना और व्यवस्था में सुधार की आवाज़ उठाना जनता का संवैधानिक अधिकार है। उनके अनुसार, असहमति और सवालों को किसी आपराधिक या राष्ट्र-विरोधी विचारधारा से जोड़ना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है।

आगे क्या

यह विवाद संसद के आगामी सत्र और राजनीतिक बहसों में भी गूँजने की संभावना है। विपक्षी दल 'दिमागी नक्सल' की परिभाषा को लेकर सरकार से स्पष्टीकरण माँग सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह बयान-प्रतिबयान का दौर आने वाले विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में और तीखा हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जब यह प्रधानमंत्री के भाषण में आती है तो इसका असर कहीं अधिक व्यापक होता है। केजरीवाल का भगत सिंह और आंबेडकर को उद्धृत करना रणनीतिक है — यह बहस को वैचारिक धरातल पर ले जाता है जहाँ BJP के लिए पलटवार कठिन होगा। असली सवाल यह है कि सरकार इस शब्द की कोई जवाबदेह परिभाषा देगी या यह एक राजनीतिक हथियार बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रधानमंत्री मोदी ने 'दिमागी नक्सली' किसे कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को लाल किले से दिए भाषण में कहा कि हथियारबंद नक्सलवाद काफी हद तक समाप्त हो चुका है, लेकिन अब 'दिमागी नक्सलियों' से सतर्क रहने की ज़रूरत है। उन्होंने इस शब्द की विस्तृत परिभाषा नहीं दी, जिससे विवाद उत्पन्न हुआ।
केजरीवाल ने मोदी के बयान पर क्या आपत्ति जताई?
केजरीवाल ने कहा कि सरकार से सवाल पूछना, बेहतर स्कूल-अस्पताल माँगना, भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाना और जवाबदेह शासन की माँग करना — इनमें से किसी को भी 'दिमागी नक्सलवाद' नहीं कहा जा सकता। उनके अनुसार यह बयान लोकतांत्रिक असहमति को अपराधीकरण करने जैसा है।
केजरीवाल ने भगत सिंह और आंबेडकर का ज़िक्र क्यों किया?
केजरीवाल ने तर्क दिया कि यदि आज भगत सिंह व्यवस्था परिवर्तन की बात करते या डॉ. आंबेडकर समानता और सामाजिक न्याय की माँग करते, तो प्रधानमंत्री के पैमाने पर उन्हें भी 'दिमागी नक्सली' कहा जा सकता था। यह उदाहरण 'दिमागी नक्सल' की परिभाषा की सीमाओं को उजागर करने के लिए दिया गया।
AAP का इस मुद्दे पर क्या रुख है?
आम आदमी पार्टी का कहना है कि लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना और नागरिक सुविधाओं की माँग करना संवैधानिक अधिकार है। पार्टी नेताओं ने कहा कि असहमति को राष्ट्र-विरोधी विचारधारा से जोड़ना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है।
इस विवाद का राजनीतिक असर क्या होगा?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह बहस संसद के आगामी सत्र और विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में और तेज़ हो सकती है। विपक्षी दल सरकार से 'दिमागी नक्सल' की स्पष्ट और जवाबदेह परिभाषा माँग सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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