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महाराष्ट्र में 265 तालुके सूखाग्रस्त घोषित, 19 अतिरिक्त तालुकों में सर्वेक्षण के आदेश

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महाराष्ट्र में 265 तालुके सूखाग्रस्त घोषित, 19 अतिरिक्त तालुकों में सर्वेक्षण के आदेश

सारांश

महाराष्ट्र में 265 तालुके सूखाग्रस्त घोषित हो चुके हैं और 19 और तालुके इस सूची में जुड़ सकते हैं। कैबिनेट उप-समिति ने फसल सर्वेक्षण, पशु चारा, पेयजल और ऋण वसूली रोकने के ठोस निर्देश दिए हैं — जून से जारी वर्षा की कमी ने संकट को गहरा कर दिया है।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र सरकार ने 265 तालुकों को आधिकारिक तौर पर सूखाग्रस्त घोषित किया।
19 अतिरिक्त तालुकों में शीर्ष पाँच फसलों का 20% जमीनी सर्वेक्षण तत्काल करने के आदेश जारी।
किसानों से जबरन ऋण वसूली रोकने के लिए राष्ट्रीयकृत बैंकों और DCC बैंकों को निर्देश दिए जाएंगे।
चारे की कमी से निपटने के लिए साइलो प्रबंधन प्रक्रिया 15 दिनों के भीतर लागू करने के निर्देश।
MSEDCL के निदेशक धनंजय औंधेकर ने समस्त तकनीकी स्टाफ को हाई अलर्ट पर रहने का परिपत्र जारी किया।
जून 2026 से राज्य में भारी वर्षा की कमी; सभी प्रशासनिक अधिकारियों को मुख्यालय न छोड़ने के आदेश।

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के 265 तालुकों को आधिकारिक तौर पर सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है। 1 अक्टूबर 2026 को अधिकारियों ने बताया कि गुरुवार को हुई कैबिनेट उप-समिति की बैठक में पहले से घोषित 'ट्रिगर-वन' तालुकों के अलावा 19 अतिरिक्त तालुकों में तत्काल जमीनी सर्वेक्षण शुरू करने के निर्देश दिए गए। जून 2026 से राज्य में भारी वर्षा की कमी दर्ज की गई है, जिसने कृषि, पशुपालन और पेयजल आपूर्ति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।

19 अतिरिक्त तालुकों की जिलेवार सूची

जन प्रतिनिधियों के अनुरोध पर इन 19 तालुकों में शीर्ष पाँच फसलों का 20 प्रतिशत सर्वेक्षण करने और शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। इन तालुकों की जिलेवार सूची इस प्रकार है:

नांदेड़ — मुदखेड़, मुखेड और अर्धापुर; चंद्रपुर — जीवती, ब्रह्मपुरी और बल्लारपुर; गोंदिया — अमगांव, देवड़ी, सालेकासा और गोंदिया; वर्धा — करंजा; भंडारा — मोहादी और तुमसर; नासिक — त्र्यंबकेश्वर, चांदवड और निफाड; सतारा — पाटन; सांगली — शिराला और वालवा।

राहत उपाय: किसान, पशु और पेयजल

बैठक में फसल हानि आकलन (पंचनामा) को तत्काल पूरा करने, पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था सुनिश्चित करने और पेयजल की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने पर विशेष ज़ोर दिया गया। अधिकारियों को पारंपरिक चारा शिविरों के साथ-साथ 'साइलो प्रबंधन' प्रक्रिया अपनाने का निर्देश दिया गया, जिसमें अधिशेष क्षेत्रों से कमी वाले क्षेत्रों में चारे की आपूर्ति की जाएगी। यह व्यवस्था 15 दिनों के भीतर लागू करनी होगी।

गंभीर रूप से प्रभावित क्षेत्रों में बड़े क्षमता वाले पानी के टैंकरों की जगह छोटे टैंकरों की तैनाती पर जोर देने के निर्देश भी जारी किए गए। सभी प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों को सूखे की पूरी अवधि में अपना मुख्यालय न छोड़ने के आदेश दिए गए हैं।

बैंकों को ऋण वसूली रोकने के निर्देश

राष्ट्रीयकृत बैंकों को निर्देश जारी किए जाएंगे कि वे सूखा संबंधी सरकारी संकल्प (GR) के अनुसार भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करें। इसके अतिरिक्त, सहकारिता विभाग को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया कि निजी और जिला केंद्रीय सहकारी (DCC) बैंक सूखा प्रभावित क्षेत्रों में किसानों से जबरन ऋण वसूली न करें। यह कदम कर्ज़ में डूबे किसानों को तत्काल राहत देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

MSEDCL हाई अलर्ट पर, तकनीकी तंत्र सक्रिय

राज्य की सूखे की स्थिति को देखते हुए महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (MSEDCL) ने अपने पूरे तकनीकी तंत्र को 'हाई अलर्ट' पर रखा है। MSEDCL के निदेशक (संचालन) धनंजय औंधेकर द्वारा हाल ही में जारी परिपत्र में सभी इंजीनियरों, ऑपरेटरों और लाइन स्टाफ को मुख्यालय न छोड़ने के सख्त आदेश दिए गए हैं।

पृष्ठभूमि और आगे की राह

गौरतलब है कि जून 2026 से महाराष्ट्र में वर्षा की भारी कमी दर्ज की गई है, जिसके कारण अधिकांश क्षेत्रों में फसलों को नुकसान हुआ है और सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य के किसान पहले से ही उपज के उचित मूल्य और कर्ज़ माफी जैसे मुद्दों पर दबाव में हैं। विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और समय पर सहायता पहुँचाना प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी। 19 तालुकों में सर्वेक्षण रिपोर्ट आने के बाद राज्य सरकार इन्हें भी आधिकारिक सूखाग्रस्त क्षेत्रों में शामिल कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि पंचनामा प्रक्रिया और राहत वितरण ज़मीनी स्तर पर कितनी तेज़ी से पहुँचती है — अतीत में यही कड़ी सबसे कमज़ोर साबित हुई है। साइलो प्रबंधन जैसे नवाचार सही दिशा में हैं, लेकिन 15 दिनों की समयसीमा में विभागीय समन्वय की विफलता से राहत कागज़ों तक सिमटने का खतरा बना रहेगा।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र में कितने तालुके सूखाग्रस्त घोषित किए गए हैं?
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के 265 तालुकों को आधिकारिक तौर पर सूखाग्रस्त घोषित किया है। इसके अलावा 19 अतिरिक्त तालुकों में जमीनी सर्वेक्षण के बाद उन्हें भी इस सूची में शामिल किया जा सकता है।
19 अतिरिक्त तालुकों में सर्वेक्षण क्यों किया जा रहा है?
जन प्रतिनिधियों ने इन तालुकों में भी सूखा घोषित करने की माँग की थी। कैबिनेट उप-समिति ने अधिकारियों को शीर्ष पाँच फसलों का 20 प्रतिशत जमीनी सर्वेक्षण कर शीघ्र रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं, ताकि इन क्षेत्रों में सूखे की गंभीरता का आकलन किया जा सके।
सूखाग्रस्त क्षेत्रों के किसानों को ऋण राहत कैसे मिलेगी?
सरकार राष्ट्रीयकृत बैंकों को RBI के दिशानिर्देशों के अनुसार सूखा संबंधी GR का पालन करने के निर्देश जारी करेगी। निजी और DCC बैंकों को भी सूखा प्रभावित क्षेत्रों में किसानों से जबरन ऋण वसूली न करने के आदेश दिए जाएंगे।
पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था कैसे होगी?
पशुपालन विभाग को पर्याप्त चारा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है। पारंपरिक चारा शिविरों के अलावा 'साइलो प्रबंधन' प्रक्रिया के तहत अधिशेष क्षेत्रों से कमी वाले क्षेत्रों में चारे की आपूर्ति की जाएगी, और यह व्यवस्था 15 दिनों के भीतर लागू करनी होगी।
MSEDCL ने सूखे की स्थिति में क्या कदम उठाए हैं?
महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (MSEDCL) ने अपने पूरे तकनीकी तंत्र को हाई अलर्ट पर रखा है। निदेशक (संचालन) धनंजय औंधेकर द्वारा जारी परिपत्र में सभी इंजीनियरों, ऑपरेटरों और लाइन स्टाफ को मुख्यालय न छोड़ने के सख्त आदेश दिए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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