26 सितंबर 2026
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महाराष्ट्र के 265 तालुकों में सूखा घोषित: CM फडणवीस ने किसानों के लिए राहत उपायों का किया ऐलान

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महाराष्ट्र के 265 तालुकों में सूखा घोषित: CM फडणवीस ने किसानों के लिए राहत उपायों का किया ऐलान

सारांश

महाराष्ट्र के 75 फीसदी तालुकों में सूखे का संकट — CM फडणवीस ने 265 तालुकों को आधिकारिक तौर पर सूखा-प्रभावित घोषित किया और किसानों के लिए ऋण पुनर्गठन, बिजली बिल में छूट, पेयजल टैंकर और चारे की व्यवस्था सहित व्यापक राहत पैकेज का ऐलान किया।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र के 358 में से 265 तालुकों को 26 सितंबर 2026 को आधिकारिक रूप से सूखा-प्रभावित घोषित किया गया — राज्य के लगभग 75% तालुके प्रभावित।
'ट्रिगर-1' के मानक पूरे करने वाले तालुकों को सूखाग्रस्त का दर्जा दिया गया।
राहत उपायों में भूमि राजस्व छूट , फसल ऋण पुनर्गठन , कृषि ऋण वसूली पर रोक और 7.5 हॉर्सपावर से अधिक के पंपों के बिजली बिल में छूट शामिल।
किसानों के कृषि पंपों का बिजली कनेक्शन नहीं काटा जाएगा; पेयजल टैंकर , अनाज और पशु चारे की व्यवस्था होगी।
सभी जिला कलेक्टरों को पंचनामा प्रक्रिया तत्काल पूरी करने के आदेश; जीपीएस -आधारित फसल नुकसान डेटा संग्रह अनिवार्य।
24 सितंबर को वाशिम दौरे में CM ने पिछली योजनाओं से वंचित किसानों को फसल कर्ज माफी का लाभ देने का वचन दिया था।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 26 सितंबर 2026 को राज्य के 358 तालुकों में से 265 तालुकों को आधिकारिक रूप से सूखा-प्रभावित घोषित किया। जिन तालुकों में 'ट्रिगर-1' के निर्धारित मानक पूरे हुए हैं, उन्हें इस दायरे में शामिल किया गया है — यानी राज्य के लगभग 75 प्रतिशत तालुकों में अब सूखे जैसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं। इस घोषणा के साथ ही मुख्यमंत्री ने किसानों और आम नागरिकों को राहत देने के लिए कई ठोस उपायों का ऐलान किया है।

सूखा घोषणा: पृष्ठभूमि और दायरा

गौरतलब है कि 24 सितंबर को वाशिम दौरे के दौरान मुख्यमंत्री फडणवीस ने संकेत दिया था कि राज्य सरकार प्रभावित क्षेत्रों में गंभीर सूखा घोषित करने के लिए शीघ्र सरकारी आदेश (जीआर) जारी करेगी। उन्होंने ग्रामीण किसानों को संबोधित करते हुए भरोसा दिलाया था कि सरकारी तंत्र राहत कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देगा। यह घोषणा उसी वचन की औपचारिक परिणति है।

यह ऐसे समय में आया है जब खेती-किसानी का संकट महाराष्ट्र के बड़े हिस्से में गहराता जा रहा है और किसान संगठन राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की माँग कर रहे थे।

किसानों के लिए घोषित राहत उपाय

मुख्यमंत्री द्वारा घोषित राहत पैकेज में निम्नलिखित प्रमुख उपाय शामिल हैं:

भूमि राजस्व में छूट दी जाएगी और फसल ऋण का पुनर्गठन (रीस्ट्रक्चर) किया जाएगा। खेती से जुड़े ऋणों की वसूली पर तत्काल रोक लगाई गई है। 7.5 हॉर्सपावर से अधिक क्षमता वाले कृषि बिजली पंपों को भी बिजली बिल में छूट मिलेगी — उल्लेखनीय है कि 7.5 हॉर्सपावर तक के पंपों का बिल पहले से माफ था।

स्कूल-कॉलेज के छात्रों की परीक्षा शुल्क में रियायत दी जाएगी। रोज़गार गारंटी योजना के नियमों में ढील देकर अधिकाधिक रोज़गार कार्य शुरू किए जाएँगे। जहाँ भी आवश्यकता होगी, पेयजल टैंकर उपलब्ध कराए जाएँगे। किसानों के कृषि पंपों का बिजली कनेक्शन नहीं काटा जाएगा।

खाद्य सुरक्षा, पशुधन और जल प्रबंधन

खेती पर निर्भर किसानों और कृषि मज़दूरों को अनाज वितरण सुनिश्चित किया जाएगा। पशुओं के लिए चारे का पर्याप्त प्रबंध किया जाएगा। बड़े पैमाने पर जल संरक्षण कार्य शुरू होंगे और पेयजल व पशु-जल की योजना निरंतर जारी रहेगी।

वाशिम दौरे में मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की थी कि पिछली फसल ऋण माफी योजनाओं से वंचित रह गए सभी पात्र किसानों को फसल कर्ज माफी का लाभ दिया जाएगा।

प्रशासनिक निर्देश और डिजिटल सर्वेक्षण

सभी जिला कलेक्टरों को पंचनामा प्रक्रिया तत्काल पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। फसलों की वास्तविक स्थिति दर्शाने वाली तस्वीरें और जीपीएस-आधारित डेटा संग्रह के आदेश जारी किए गए हैं, ताकि नुकसान का सटीक और पारदर्शी आकलन हो सके।

यह डिजिटल दस्तावेज़ीकरण का कदम महत्वपूर्ण है, क्योंकि पिछले वर्षों में पंचनामा में देरी के कारण किसानों को मुआवजा मिलने में विलंब होता रहा है।

आगे की राह

राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि राहत कार्यों की निगरानी उच्च स्तर पर की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि 75% तालुकों में सूखे की आधिकारिक घोषणा सरकारी राहत ट्रिगर करने के लिए अनिवार्य कदम था, और अब क्रियान्वयन की गति ही असली परीक्षा होगी। सूखा राहत के समयबद्ध वितरण पर विपक्षी दलों की नज़र बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि राहत धरातल तक कितनी तेज़ी से पहुँचती है। महाराष्ट्र में सूखा राहत का इतिहास बताता है कि पंचनामा में देरी और ऋण पुनर्गठन की जटिल प्रक्रियाएँ अक्सर किसानों को वास्तविक लाभ से महीनों दूर रखती हैं। जीपीएस-आधारित डेटा संग्रह का नया निर्देश पारदर्शिता की दिशा में सकारात्मक संकेत है, लेकिन इसका क्रियान्वयन ज़िला स्तर पर अधिकारियों की इच्छाशक्ति पर निर्भर करेगा। विपक्ष और किसान संगठनों को चाहिए कि वे प्रत्येक तालुके में राहत वितरण की समयसीमा और पारदर्शी सत्यापन तंत्र की माँग करें — सिर्फ घोषणा की नहीं।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र में कितने तालुकों को सूखा-प्रभावित घोषित किया गया है?
महाराष्ट्र के कुल 358 तालुकों में से 265 तालुकों को 26 सितंबर 2026 को सूखा-प्रभावित घोषित किया गया है। यह राज्य के लगभग 75 प्रतिशत तालुकों के बराबर है, जहाँ 'ट्रिगर-1' के निर्धारित मानक पूरे हुए हैं।
'ट्रिगर-1' मानक क्या होता है और इसका सूखा घोषणा से क्या संबंध है?
'ट्रिगर-1' सूखे की गंभीरता मापने का एक सरकारी मानक है, जिसे पूरा करने पर तालुके को आधिकारिक रूप से सूखा-प्रभावित माना जाता है। जिन 265 तालुकों में यह मानक पूरा हुआ, उन्हें ही सूखाग्रस्त घोषित किया गया, जिससे वहाँ सरकारी राहत उपाय स्वतः सक्रिय हो जाते हैं।
CM फडणवीस ने सूखा-प्रभावित किसानों के लिए कौन-से मुख्य राहत उपाय घोषित किए हैं?
CM देवेंद्र फडणवीस ने भूमि राजस्व में छूट, फसल ऋण पुनर्गठन, कृषि ऋण वसूली पर रोक, 7.5 हॉर्सपावर से अधिक के कृषि पंपों के बिजली बिल में छूट, परीक्षा शुल्क में राहत और रोज़गार गारंटी योजना के तहत अधिक काम शुरू करने की घोषणा की है। इसके अलावा पेयजल टैंकर, अनाज वितरण और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था भी की जाएगी।
पंचनामा प्रक्रिया क्या है और इसे तत्काल क्यों पूरा करने के आदेश दिए गए हैं?
पंचनामा फसल नुकसान का सरकारी आकलन है, जो मुआवजा वितरण की पूर्वशर्त होती है। CM फडणवीस ने सभी जिला कलेक्टरों को पंचनामा प्रक्रिया तुरंत पूरी करने के आदेश दिए हैं ताकि किसानों को बिना देरी के राहत मिल सके। इस बार जीपीएस डेटा और फसल तस्वीरों से आकलन को अधिक पारदर्शी बनाने की कोशिश की जा रही है।
वाशिम दौरे में CM फडणवीस ने फसल कर्ज माफी को लेकर क्या घोषणा की थी?
24 सितंबर को वाशिम दौरे के दौरान CM फडणवीस ने घोषणा की थी कि पिछली फसल ऋण माफी योजनाओं से वंचित रह गए सभी पात्र किसानों को इस बार लाभ दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि राज्य प्रशासन पेयजल आपूर्ति, पशु चारा वितरण और पंचनामा जैसे कार्यों को आपातकालीन प्राथमिकता देगा।
राष्ट्र प्रेस
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