महाराष्ट्र के 304 तालुके सूखाग्रस्त घोषित, किसानों को दिवाली से पहले ₹5,000 की अग्रिम मदद
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार ने बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को राज्य के 304 तालुकाओं को औपचारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित कर दिया और प्रभावित किसानों को दिवाली से पहले ₹5,000 की अग्रिम आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में देने का ऐलान किया। खरीफ सीजन में हुई भारी बारिश की कमी को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है, जो राज्य के व्यापक कृषि संकट की गहराती गंभीरता को रेखांकित करता है।
सूखाग्रस्त तालुकों की संख्या कैसे पहुँची 304 पर
26 सितंबर 2026 को राज्य सरकार ने 'ट्रिगर-1' के मानदंडों के आधार पर 265 तालुकाओं को पहले ही सूखाग्रस्त घोषित किया था। इसके बाद, लगातार कम होती वर्षा और कृषि हालात की गहन समीक्षा के उपरांत 'ट्रिगर-1' और 'ट्रिगर-2' दोनों मानदंडों के अंतर्गत 39 अतिरिक्त तालुकों को सूची में जोड़ा गया। इस प्रकार सूखाग्रस्त प्रशासनिक ब्लॉकों की कुल संख्या 304 हो गई है।
राज्य के राहत और पुनर्वास मंत्री मकरंद जाधव पाटिल ने बताया कि जिला कलेक्टरों को प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल और व्यापक 'पंचनामा' — यानी फसल नुकसान का आकलन — शुरू करने का निर्देश दिया गया है, ताकि किसानों को समय पर मुआवजा सुनिश्चित किया जा सके।
मुख्यमंत्री फडणवीस की उच्चस्तरीय बैठक और राहत पैकेज
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को राज्य मंत्रिमंडल की एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे तथा मंत्रिपरिषद के प्रमुख सदस्य शामिल रहे। बैठक में राज्य के कई जिलों में तेज होते सूखे की स्थिति का विस्तृत आकलन किया गया।
फडणवीस ने पत्रकारों को बताया, '16,000 से अधिक अवैध जल कनेक्शन पहले ही काटे जा चुके हैं। शिक्षा शुल्क पूरी तरह माफ कर दिया गया है; बैंकों और माइक्रोफाइनेंस संस्थाओं को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे जबरदस्ती कर्ज वसूली या बिजली बिल न वसूलें।' उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्येक प्रभावित किसान को दिवाली से पूर्व ₹5,000 सीधे उनके बैंक खाते में हस्तांतरित किए जाएंगे।
सरकार के 12 प्रमुख राहत उपाय
राज्य सरकार ने प्रभावित किसानों, खेतिहर मजदूरों और ग्रामीण परिवारों पर आर्थिक बोझ कम करने के लिए 12 राहत उपाय घोषित किए हैं। इनमें शामिल हैं: प्रभावित तालुकों में भू-राजस्व की पूर्ण माफी; कृषि ऋण चुकाने की समय-सीमा का विस्तार; वित्तीय संस्थाओं द्वारा जबरदस्ती वसूली पर अस्थायी रोक; कृषि पंपों के विद्युत बिलों में उल्लेखनीय छूट; कठिन परिस्थितियों में जीवन-यापन कर रहे परिवारों के विद्यार्थियों की परीक्षा फीस की पूर्ण माफी; सूखाग्रस्त क्षेत्रों में कृषि पंपों की विद्युत आपूर्ति न काटे जाने के निर्देश; तथा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGS) के नियमों में ढील देकर शारीरिक श्रम के त्वरित अवसर उत्पन्न करना।
इसके अतिरिक्त, गंभीर जलसंकट वाले गाँवों और दूरदराज की बस्तियों में GPS-ट्रैक्ड टैंकरों से पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने, किसानों और खेत मजदूरों को आवश्यक खाद्यान्न वितरण, तथा पशुधन संरक्षण हेतु विशेष चारा-प्रबंध का प्रावधान भी किया गया है। राज्य प्रशासन ने जिला अधिकारियों को ये राहत कार्य 'युद्ध स्तर पर' संचालित करने का निर्देश दिया है।
मराठवाड़ा में भूजल संकट और ऋण माफी की प्रगति
गौरतलब है कि मराठवाड़ा में भूजल स्तर 3 मीटर से अधिक गिर चुका है, जिससे पेयजल और सिंचाई दोनों पर गहरा संकट मंडरा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार ने ऋण माफी योजना के लाभार्थियों की सूची को अंतिम रूप दे दिया है और उसकी प्रक्रिया जारी है — इससे 3.5 लाख किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।
यह महाराष्ट्र में खरीफ सीजन के दौरान घोषित अब तक के सबसे बड़े सूखा-राहत पैकेजों में से एक है। राज्य प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि संकट के दौरान कोई भी प्रभावित किसान या ग्रामीण परिवार बिना सहायता के न रहे। आने वाले हफ्तों में पंचनामा प्रक्रिया पूरी होने के बाद अतिरिक्त मुआवजे की घोषणा संभव है।