महाराष्ट्र के 265 तालुकों में सूखा घोषित, फडणवीस सरकार ने SSC-HSC परीक्षा फीस माफ की
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में 29 सितंबर 2026 को राज्य कैबिनेट ने सूखा-प्रभावित क्षेत्रों के किसानों और छात्रों के लिए कई अहम राहत उपायों की घोषणा की। 2026 खरीफ सीजन में अपर्याप्त मानसून के बाद राज्य के 358 में से 265 तालुकों में आधिकारिक रूप से सूखे की स्थिति घोषित की जा चुकी है, और अब उन तालुकों को भी राहत के दायरे में लाया जा रहा है जो तकनीकी मानदंडों के कारण शुरुआत में इससे बाहर रह गए थे।
मुख्य घोषणाएँ
कैबिनेट बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि जिन तालुकों में फसलें सूख गईं, लेकिन स्वचालित 'ट्रिगर-1' मापदंड पूरे नहीं हुए, वहाँ अब जमीनी स्तर पर भौतिक निरीक्षण कराया जाएगा। ऐसे क्षेत्रों के किसानों को विशेष छूट के तहत सूखे से जुड़े सभी सरकारी लाभ दिए जाएंगे।
यह इसलिए ज़रूरी हो गया क्योंकि कई क्षेत्रों में मौसम की अनियमितता विशेष रही — शुरुआती दो महीनों में भारी वर्षा हुई और उसके बाद पूर्णतः सूखा पड़ गया, जिसके कारण मानक ट्रिगर मापदंड पूरे नहीं हो पाए।
परीक्षा फीस माफी — छात्रों को सीधी राहत
सूखा-प्रभावित क्षेत्रों में परिवारों को प्रत्यक्ष राहत देने के उद्देश्य से, कक्षा 10 (SSC) और कक्षा 12 (HSC) के छात्रों की परीक्षा फीस पूरी तरह माफ कर दी गई है। यह निर्णय पहले की फीस-संग्रह और प्रतिपूर्ति की व्यवस्था का स्थान लेगा, जिससे परिवारों को अग्रिम भुगतान की ज़रूरत नहीं रहेगी।
गौरतलब है कि सूखे के दौर में किसान परिवारों पर आर्थिक दबाव सबसे अधिक होता है, और परीक्षा फीस की माफी उन परिवारों के लिए एक सीधी वित्तीय राहत है जिनकी आमदनी फसल नुकसान से पहले से ही प्रभावित है।
प्रशासनिक ढाँचा और जल प्रबंधन
जिला योजना एवं विकास समितियों (DPDC) को सूखा राहत कार्यों के लिए अधिकतम संसाधन आवंटित करने का दायित्व दिया गया है। संरक्षक मंत्रियों को स्थानीय स्तर पर सक्रिय रहने और प्रस्ताव बिना देरी के प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
राज्य सरकार एक पारदर्शी सरकारी संकल्प (GR) जारी करेगी जिसमें जल उपयोग की प्राथमिकता तय की जाएगी — पीने के पानी और पशुधन की ज़रूरतों को अन्य आवंटनों से पहले रखा जाएगा।
सूखे से निपटने के लिए गठित एक उप समिति नियमित बैठकें करेगी। प्रारंभिक सूखा-प्रभावित सूची से बाहर रहे जिलों के अधिकारियों को वैकल्पिक मापदंड लागू कर नए राहत प्रस्ताव देने के निर्देश जारी किए गए हैं।
पृष्ठभूमि — सूखे की आधिकारिक घोषणा
यह कदम राहत एवं पुनर्वास विभाग द्वारा शनिवार को जारी उस सरकारी प्रस्ताव के कुछ दिनों बाद आया है, जिसमें राज्य के 358 तालुकों में से 265 तालुकों में आधिकारिक सूखा घोषित किया गया था। यह कदम सूखा प्रबंधन संहिता 2016 के ट्रिगर-1 दिशानिर्देशों और कृषि आयुक्त की रिपोर्ट के आधार पर उठाया गया।
यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र के कई ज़िलों में किसान पहले से ही कर्ज़ और फसल बर्बादी की दोहरी मार झेल रहे हैं। स्वचालित मानदंडों के कारण योग्य किसानों के राहत से बाहर रहना प्रशासनिक विफलता का एक चिरपरिचित पैटर्न है, और भौतिक निरीक्षण का यह प्रावधान उस अंतर को पाटने की कोशिश है।
आगे की राह
नवगठित क्षेत्रों के लिए वित्तीय सहायता और संसाधन वितरण के विस्तृत दिशानिर्देश आने वाले दिनों में जारी होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि राहत वितरण की पारदर्शिता और समयबद्धता ही इन उपायों की वास्तविक परीक्षा होगी।