महाराष्ट्र सूखा राहत: ₹5,000 की सहायता पर विपक्ष का हमला, किसान संगठनों ने बताया 'क्रूर मजाक'
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के 305 सूखा प्रभावित तालुकों के किसानों को ₹5,000 की अग्रिम राहत राशि देने की घोषणा की है, जिसने 14 अक्टूबर 2026 को तीखी राजनीतिक बहस और किसान संगठनों में व्यापक रोष को जन्म दिया है। विपक्षी दलों और अखिल भारतीय किसान सभा (एकेएस) ने इस राशि को 'क्रूर मजाक' करार देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार से तत्काल पर्याप्त राहत की माँग की है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और विपक्ष का आरोप
शिवसेना (यूबीटी) विधायक कैलाश पाटिल ने ₹5,000 की राशि को गंभीर महंगाई और कठिनाइयों से जूझ रहे किसानों का 'अपमान और उपहास' बताया। उनके अनुसार, यह रकम मौजूदा कृषि संकट की गहराई को समझने में सरकार की विफलता को उजागर करती है।
पूर्व गृह मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) नेता अनिल देशमुख ने मुख्यमंत्री फडणवीस पर सीधे निशाना साधते हुए कहा कि सरकार ने शुरुआत में सभी प्रभावित किसानों को व्यापक सहायता देने का वादा किया था, लेकिन बाद में प्रशासनिक बहानों की आड़ में राहत राशि घटा दी गई।
कांग्रेस का वित्तीय प्राथमिकताओं पर सवाल
वरिष्ठ कांग्रेस नेता और विधायक विजय वडेट्टीवार ने कहा कि ₹5,000 की राहत राशि संकटग्रस्त किसानों के 'घावों पर नमक छिड़कने' के समान है। उन्होंने किसानों की वास्तविक स्थिति का हवाला देते हुए बताया कि कई किसानों ने खेती के लिए निजी ऋणदाताओं और अन्य वित्तीय स्रोतों से भारी कर्ज लिया था, किंतु फसल पूरी तरह बर्बाद हो जाने से उनके भंडार खाली हो गए और ऋण का बोझ बढ़ता जा रहा है।
वडेट्टीवार ने राज्य की वित्तीय प्राथमिकताओं पर तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि जब सरकार आगामी कुंभ मेले और शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे जैसी विशाल परियोजनाओं पर हजारों करोड़ रुपये खर्च कर सकती है, तो संकटग्रस्त किसानों के लिए धन की कमी का तर्क स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने माँग की कि सरकार गैर-जरूरी उच्च-बजट परियोजनाएँ रद्द कर उस धन को किसानों की राहत पर खर्च करे।
किसान संगठनों का आक्रोश
मुंबई में जारी एक संयुक्त बयान में अखिल भारतीय किसान सभा के प्रमुख नेताओं ने बताया कि ₹5,000 की यह मामूली रकम उर्वरक, बीज, कीटनाशक और श्रम जैसे बुनियादी उत्पादन खर्चों को भी पूरा करने में असमर्थ है। संगठन ने मुख्यमंत्री फडणवीस द्वारा 305 सूखा प्रभावित तहसीलों में घोषित इस अग्रिम भुगतान की कड़ी निंदा की।
गौरतलब है कि दिवाली त्योहार से ठीक पहले कृषि सामग्री विक्रेताओं द्वारा पुराने ऋणों के भुगतान का दबाव बढ़ने से किसान कर्ज के एक ऐसे दुष्चक्र में फँस गए हैं, जिससे बाहर निकलना उनके लिए अत्यंत कठिन हो गया है।
आम जनता और किसानों पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र के विदर्भ, मराठवाड़ा और अन्य सूखाग्रस्त क्षेत्रों में किसान कई मौसमों से लगातार फसल बर्बादी का सामना कर रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि ₹5,000 की राशि एक औसत किसान परिवार की महीने भर की न्यूनतम जरूरतों को भी पूरा नहीं कर पाती।
किसान संगठनों का तर्क है कि न केवल मौजूदा फसल नुकसान, बल्कि अगले कृषि चक्र के लिए बीज, खाद और सिंचाई पर होने वाले खर्च के लिए भी किसानों के पास कोई संसाधन नहीं बचे हैं। यह संकट उनके अस्तित्व को ही खतरे में डाल रहा है।
क्या होगा आगे
विपक्षी दलों और किसान संगठनों की माँग है कि सरकार तत्काल समीक्षा बैठक बुलाए और राहत राशि को वास्तविक नुकसान के अनुरूप बढ़ाए। वडेट्टीवार ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने अपना रवैया नहीं बदला, तो किसानों का आक्रोश राजनीतिक आंदोलन का रूप ले सकता है। महाराष्ट्र सरकार की ओर से अभी तक विपक्ष के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।