15 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

फडणवीस सरकार की ₹5,000 सहायता पर कांग्रेस का हमला: 'बच्चे के कपड़े भी नहीं आते, किसानों का मज़ाक'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
फडणवीस सरकार की ₹5,000 सहायता पर कांग्रेस का हमला: 'बच्चे के कपड़े भी नहीं आते, किसानों का मज़ाक'

सारांश

महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त किसानों को दिवाली से पहले ₹5,000 की राहत देने की फडणवीस सरकार की घोषणा पर कांग्रेस सांसद बलवंत वानखड़े ने तीखा हमला बोला — बोले, इतने में बच्चे के कपड़े भी नहीं आते। साथ ही जंतर-मंतर और अंकिता भंडारी मामले पर भी सरकार को घेरा।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सूखाग्रस्त किसानों को दिवाली से पहले ₹5,000 की अंतरिम सहायता देने की घोषणा की।
कांग्रेस सांसद बलवंत वानखड़े ने इसे 'किसानों के संघर्ष का मज़ाक' बताते हुए कड़ी आलोचना की।
वानखड़े ने जंतर-मंतर को विरोध स्थल से हटाने के केंद्र सरकार के फैसले की भी निंदा की, इसे संवैधानिक अधिकार पर हमला कहा।
अंकिता भंडारी के माता-पिता को इंडिया गेट पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने हिरासत में लिया, बाद में रिहा किया गया।
कांग्रेस ने तीनों मुद्दों पर सरकार से जवाबदेही की माँग की।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा राज्य के सूखाग्रस्त किसानों को दिवाली से पहले ₹5,000 की अंतरिम आर्थिक सहायता देने की घोषणा पर कांग्रेस ने तीखा पलटवार किया है। कांग्रेस सांसद बलवंत वानखड़े ने 15 अक्टूबर 2026 को अमरावती में कहा कि यह राशि किसानों की वास्तविक ज़रूरतों के सामने 'मज़ाक' के समान है। उनका तर्क है कि जब फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हो, तब ₹5,000 की रकम किसी भी तरह से पर्याप्त राहत नहीं कही जा सकती।

₹5,000 की सहायता पर सीधा हमला

वानखड़े ने कहा, 'महाराष्ट्र सरकार ने किसानों के लिए जो ₹5,000 की मदद घोषित की है, वह किसानों के साथ मज़ाक करने जैसा है। आज के समय में ₹5,000 में एक बच्चे के कपड़े भी नहीं आते। किसानों ने अपनी सारी जमा-पूँजी खेती में लगा दी है और अब जब फसल बर्बाद हो गई है, तो सरकार उन्हें सिर्फ ₹5,000 दे रही है। यह निश्चित तौर पर मज़ाक वाली बात है।'

गौरतलब है कि महाराष्ट्र के कई ज़िले इस वर्ष सूखे की चपेट में हैं और किसान संगठन लंबे समय से व्यापक राहत पैकेज की माँग कर रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि ₹5,000 की यह घोषणा असल में महँगाई के इस दौर में किसानों की उत्पादन लागत का एक छोटा-सा हिस्सा भी नहीं भर पाती।

जंतर-मंतर विवाद पर केंद्र सरकार को घेरा

वानखड़े ने जंतर-मंतर को आधिकारिक विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में हटाए जाने के केंद्र सरकार के कदम की भी कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा, 'जंतर-मंतर का एक ऐतिहासिक महत्व है। देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में यह बड़े-बड़े आंदोलनों को लेकर चर्चित है। जंतर-मंतर की पहचान को खत्म करने के लिए सरकार यह कदम उठा रही है। हम कांग्रेस की ओर से इसकी कड़ी निंदा करते हैं।'

उन्होंने आगे कहा कि 'विरोध करना हर नागरिक का संवैधानिक हक है और सरकार लगातार इस हक पर रोक लगाने की कोशिश कर रही है। हम ऐसा कोई भी निर्णय नहीं लेने देंगे और इसके खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे।'

अंकिता भंडारी मामले पर भी सरकार पर निशाना

कांग्रेस सांसद ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की माँग को लेकर इंडिया गेट पर प्रदर्शन कर रहे अंकिता के माता-पिता को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की घटना पर भी सरकार को आड़े हाथों लिया।

वानखड़े ने कहा, 'अंकिता भंडारी के माता-पिता इंडिया गेट पर न्याय के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया और बाद में छोड़ दिया गया। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। यह सरकार तानाशाही तरीके से काम कर रही है — जो भी आवाज़ उठाता है, उस पर दबाव बनाया जाता है।'

यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर सरकार की नीतियों को लेकर मोर्चा खोले हुए हैं। कांग्रेस का यह हमला आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति को और गर्माने की संभावना रखता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 की घोषणा राजनीतिक रूप से सुविधाजनक है — दिवाली से ठीक पहले, जब भावनाएँ ऊँची होती हैं — लेकिन आर्थिक रूप से यह खोखली है। महाराष्ट्र में एक एकड़ कपास की खेती की औसत लागत ₹20,000-₹25,000 से अधिक है; ऐसे में ₹5,000 की रकम को 'राहत' कहना तथ्यों की अनदेखी है। वानखड़े का बयान भले ही विपक्षी आलोचना का हिस्सा हो, लेकिन उनके आँकड़े असल ज़मीनी तस्वीर से मेल खाते हैं। असली सवाल यह है कि क्या यह घोषणा व्यापक फसल बीमा या ऋण माफी की दिशा में पहला कदम है — या केवल एक चुनावी इशारा।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फडणवीस सरकार ने किसानों को कितनी सहायता देने का ऐलान किया?
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य के सूखाग्रस्त किसानों को दिवाली से पहले ₹5,000 की अंतरिम आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। यह राशि तात्कालिक राहत के तौर पर दी जानी है।
कांग्रेस ने ₹5,000 की सहायता को नाकाफी क्यों बताया?
कांग्रेस सांसद बलवंत वानखड़े का कहना है कि मौजूदा महँगाई में ₹5,000 में एक बच्चे के कपड़े भी नहीं आते, जबकि किसानों की पूरी फसल बर्बाद हो चुकी है। उन्होंने इसे किसानों की मेहनत और संघर्ष का मज़ाक उड़ाने के समान बताया।
जंतर-मंतर विवाद पर वानखड़े ने क्या कहा?
वानखड़े ने जंतर-मंतर को आधिकारिक विरोध स्थल से हटाने के केंद्र सरकार के कदम को असंवैधानिक बताया। उन्होंने कहा कि विरोध करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और कांग्रेस इस फैसले के खिलाफ लड़ाई लड़ेगी।
अंकिता भंडारी के माता-पिता को हिरासत में क्यों लिया गया?
अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की माँग को लेकर उनके माता-पिता इंडिया गेट पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और बाद में रिहा कर दिया। कांग्रेस ने इसे सरकार की 'तानाशाही' करार दिया।
महाराष्ट्र के किसानों की मौजूदा स्थिति क्या है?
राज्य के कई ज़िले इस वर्ष सूखे की चपेट में हैं और फसल बर्बादी से किसान गंभीर आर्थिक संकट में हैं। किसान संगठन व्यापक राहत पैकेज और ऋण माफी की माँग करते रहे हैं, जिसके जवाब में सरकार ने ₹5,000 की अंतरिम सहायता की घोषणा की है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 21 घंटे पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 3 सप्ताह पहले
  5. 3 सप्ताह पहले
  6. 3 सप्ताह पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले