सूखाग्रस्त किसानों के लिए विधायक शंकर जगताप ने मुख्यमंत्री राहत कोष में दिए ₹11 लाख
सारांश
मुख्य बातें
चिंचवड विधानसभा क्षेत्र के विधायक शंकर जगताप और चंद्ररंग डेवलपर्स एंड बिल्डर्स के प्रमुख विजू सेठ जगताप ने 1 नवंबर 2026 को महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त किसानों की सहायता के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष में ₹11 लाख का योगदान दिया। यह सहायता राशि का चेक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सौंपा गया, ताकि प्रभावित किसानों तक शीघ्र राहत पहुँच सके।
सूखे का किसानों पर असर
महाराष्ट्र के कई हिस्सों में इस वर्ष कम वर्षा के कारण सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। शंकर जगताप ने इस अवसर पर कहा कि बारिश की कमी के चलते फसलों को भारी नुकसान हुआ है, जिससे कृषि पर निर्भर परिवारों की आर्थिक स्थिति बुरी तरह प्रभावित हुई है। उनके अनुसार, किसानों के लिए सूखा केवल जल-संकट नहीं, बल्कि उनके परिवार की आजीविका और भविष्य से जुड़ी एक गंभीर समस्या है।
अचानक वर्षा रुक जाने से कई क्षेत्रों में खड़ी फसलें बर्बाद हुई हैं, जिससे किसानों की आय में गिरावट आई है और कर्ज तथा आर्थिक दबाव बढ़ा है। जगताप ने कहा कि ऐसे संकट में किसानों को केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि ठोस और व्यावहारिक सहायता की ज़रूरत है।
मुख्यमंत्री राहत कोष में योगदान
पिंपरी-चिंचवड से विधायक शंकर जगताप और विजू सेठ जगताप ने संयुक्त रूप से ₹11 लाख का चेक मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सौंपा। इस अवसर पर एडवोकेट सखाराम कोलसे पाटिल, निलेश पवार, प्रवीण जगताप सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। यह राशि मुख्यमंत्री सहायता निधि के माध्यम से सीधे सूखाग्रस्त किसानों तक पहुँचाई जाएगी।
कृषि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में भूमिका
शंकर जगताप ने कहा कि कृषि क्षेत्र देश और राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। उनके अनुसार, जब तक किसान आर्थिक रूप से सशक्त नहीं होगा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी वास्तविक मज़बूती नहीं मिल सकती। उन्होंने सामाजिक और नैतिक ज़िम्मेदारी का हवाला देते हुए इस योगदान को ज़रूरी बताया।
समाज से अपील
विधायक जगताप ने समाज के सक्षम वर्गों, उद्योग समूहों और सामाजिक संस्थाओं से अपील की कि वे भी आगे आकर सूखाग्रस्त किसानों की मदद के लिए योगदान करें। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र के कई ज़िलों में कृषि संकट गहराता जा रहा है और किसानों का मनोबल बनाए रखना सामाजिक प्राथमिकता बन गई है। आगामी हफ्तों में सरकारी राहत वितरण की गति और अन्य सक्षम वर्गों की भागीदारी यह तय करेगी कि प्रभावित किसानों को कितनी जल्दी सहायता मिल पाती है।