शिर्डी साईं संस्थान ने महाराष्ट्र सूखा राहत के लिए मुख्यमंत्री निधि में दिए ₹5 करोड़
सारांश
मुख्य बातें
श्रीसाईं बाबा संस्थान, शिर्डी ने 27 अक्टूबर 2026 को महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं पुनर्वास कार्यों को गति देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री सहायता निधि में ₹5 करोड़ की आर्थिक सहायता प्रदान की। संस्थान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गोरक्ष गाडिलकर ने स्वयं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को यह चेक सौंपा।
योगदान की पृष्ठभूमि
संस्थान की ओर से स्पष्ट किया गया कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में गहराते सूखे की स्थिति को देखते हुए यह आर्थिक सहयोग दिया गया है। मुख्यमंत्री सहायता निधि के माध्यम से यह राशि सूखाग्रस्त किसानों और प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत कार्यों पर खर्च की जाएगी। संस्थान ने इसे अपनी सामाजिक प्रतिबद्धता और दीर्घकालिक सेवाभावी परंपरा का हिस्सा बताया।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख जन
चेक सौंपने के अवसर पर जल संसाधन मंत्री एवं अहिल्यानगर जिले के पालकमंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल तथा जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन भी मौजूद रहे। यह उपस्थिति राज्य सरकार द्वारा सूखा राहत में सार्वजनिक एवं धार्मिक संस्थानों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के प्रयासों का संकेत देती है।
सरकार की व्यापक राहत योजना
यह पहल ऐसे समय में आई है जब महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के करीब 1.5 करोड़ सूखा प्रभावित किसानों को ₹5,000 की अग्रिम वित्तीय सहायता देने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि यह सहायता राशि उसी सप्ताह किसानों के बैंक खातों में जमा कराई जाए। मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए इस फैसले पर कुल ₹7,500 करोड़ खर्च किए जाने का अनुमान है।
साईं संस्थान की सामाजिक भूमिका
श्रीसाईं बाबा संस्थान करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र होने के साथ-साथ विभिन्न जनकल्याणकारी गतिविधियों में भी सक्रिय रहा है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब संस्थान ने आपदा या संकट की स्थिति में राज्य सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया हो। संस्थान का यह कदम उन धार्मिक-सामाजिक निकायों के लिए एक नज़ीर के रूप में देखा जा रहा है जो सार्वजनिक संसाधनों को संकट काल में पुनर्वितरित कर सकते हैं।
आगे की राह
सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले ₹7,500 करोड़ के राहत पैकेज और साईं संस्थान जैसे संगठनों के योगदान के बीच, विशेषज्ञों का मानना है कि असली परीक्षा वितरण तंत्र की होगी — यह सुनिश्चित करना कि सहायता सीधे प्रभावित किसानों तक समय पर पहुँचे। राज्य सरकार के अगले कदमों पर सभी की नजरें टिकी हैं।